
अजीत मिश्रा (खोजी)
भ्रष्टाचार का ‘महायज्ञ’: कागजों पर खोद डाला तालाब, जेबें भरने में मशगूल जिम्मेदार!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- बस्ती आ रहे मुख्यमंत्री से ग्रामीण पूछेंगे सवाल- क्या तेनुआ गाँव में ‘न्याय’ भी पट्टे की तरह नीलाम हो गया?
- भ्रष्टाचार का ‘महायज्ञ’: तालाब की खुदाई कागजों में, कमाई असल में; आखिर कौन है इस लूट का मास्टरमाइंड?
- ‘जीरो टॉलरेंस’ को ठेंगा दिखा रहे गौर के जिम्मेदार, तेनुआ गाँव में हुआ विकास का ‘चीरहरण’
बस्ती। जनपद के गौर विकासखंड अंतर्गत माझौवा चौबे के राजस्व गांव तेनुआ में विकास के नाम पर जो खेल खेला गया है, उसे देखकर तो सरकारी तंत्र की शुचिता भी शर्मसार हो जाए। यहाँ डबल इंजन सरकार की “जीरो टॉलरेंस” वाली नीति धरातल पर आते-आते “जीरो डर और 100% हिम्मत” में तब्दील हो चुकी है। आलम यह है कि गाँव के तालाब में मछलियाँ हँस रही हैं और जिम्मेदार बेखौफ भ्रष्टाचार के पानी में तैर रहे हैं।

कागजी खुदाई, असली कमाई: गजब है साहब का गणित!
भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिए कि जिस तालाब का पट्टा 22 मई 2025 को ही हो गया था, उसी तालाब पर 24 जुलाई 2025 से 21 फरवरी 2026 तक कागजों में ‘महा-कार्य’ (खुदाई) चलता रहा। जब तालाब पहले ही पट्टे पर दिया जा चुका था, तो उस पर सरकारी धन का बंदरबांट किसके इशारे पर हुआ? ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि साहब को मोटा हिस्सा मिला है, तभी तो मौके पर सिर्फ पानी है और कागजों में पसीने की मेहनत दिख रही है।
खंड विकास अधिकारी का ‘मेडिटेशन मोड’
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे घोटाले की गूँज गौर ब्लॉक से लेकर जिले तक है, लेकिन खंड विकास अधिकारी (BDO) जैसे मेडिटेशन मोड में चले गए हैं। सब कुछ जानते हुए भी उनकी चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि “मौन ही स्वीकृति है।” ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ घोटाला नहीं, बल्कि ऊपर से नीचे तक मिलीभगत का एक ऐसा महायज्ञ है, जिसमें जनता के टैक्स की आहुति दी जा रही है।
“साहब को हिस्सा मिला है, तभी तो कागजों में इतनी खुदाई दिख रही है। असलियत देखनी हो तो मौके पर आएं, यहाँ विकास नहीं, सिर्फ जिम्मेदारों का निजी उद्धार हुआ है।” — आक्रोशित ग्रामीण
मुख्यमंत्री के दरबार में गूँजेगी ‘तेनुआ’ की लूट
शिकायतकर्ता ने साफ कर दिया है कि अब न्याय की उम्मीद स्थानीय अधिकारियों से करना बेमानी है। मुख्यमंत्री के बस्ती आगमन पर यह मामला उनके संज्ञान में लाया जाएगा। उनसे पूछा जाएगा कि क्या गाँव में “न्याय” भी अब पट्टे की तरह नीलाम होने लगा है?
खबर का भी असर नहीं, क्या ‘बिछ’ गए हैं साहब?
गौरतलब है कि इस भ्रष्टाचार की पोल पहले भी खोली थी। जिम्मेदारों को जगाने की कोशिश की गई, लेकिन लगता है कि साहबान पूरी तरह ‘सेट’ हो चुके हैं। कार्रवाई वहीं होती है जहाँ हिस्सेदारी न हो, लेकिन जहाँ गंगा ही उल्टी बह रही हो, वहाँ निष्पक्ष जांच की उम्मीद बेमानी लगती है।
बड़ा सवाल: क्या सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस के दावे को गौर ब्लॉक के ये ‘भ्रष्टाचारी सिपाही’ ऐसे ही ठेंगा दिखाते रहेंगे? या फिर इन पर भी बाबा का हंटर चलेगा?
मामला: राजस्व गांव तेनुआ, गौर विकासखंड, बस्ती।




















