
चित्रसेन घृतलहरे, 26 नवम्बर 2025//धान खरीदी के सीजन में अनियमितताओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। झुमका उपार्जन केंद्र में कवरेज के दौरान एक बड़ा घोटाला सामने आया, जहाँ किसानों से प्रति बोरी 40.600 किलोग्राम के बजाय 41.300 किलोग्राम धान लिया जा रहा था। यानी 700 ग्राम धान की जबरन वसूली—वह भी शासन के स्पष्ट निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए।
किसानों पर नमी और डस्ट का दबाव—धोखे से अधिक धान तौल
किसानों ने बताया कि केंद्र में “नमी ज्यादा” और “डस्ट अधिक” का बहाना बनाकर अतिरिक्त 700 ग्राम धान की वसूली की जा रही है। लेकिन मौके पर जांच में पाया गया कि जिस किसान का धान लिया जा रहा था, उसकी नमी 16.9% थी और धान उत्कृष्ट व साफ-सुथरा था।
यानी नमी और डस्ट का पूरा खेल किसानों को डराकर अधिक धान लेने की साजिश था।
फड़ प्रभारी—“प्रबंधन का आदेश”, प्रबंधक—“ऐसा कोई आदेश नहीं!”
जब फड़ प्रभारी से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि—
प्रबंधक और अध्यक्ष ने बैठक में 41.300 किलो तौलने का निर्देश दिया है।
लेकिन जब प्रबंधक से बात की गई, तो उन्होंने ऐसे किसी भी आदेश से साफ इनकार करते हुए कहा—
“41.300 किलो लेना गलत है।”
प्रबंधन के भीतर यह विरोधाभास साफ तौर पर मिलीभगत और जिम्मेदारी टालने का संकेत है। ऊपर बैठे अधिकारी मलाई काट रहे हैं और फड़ प्रभारी को मोहरे की तरह आगे कर दिया गया है।
IPC 420 और 406 लागू—धान नीति का घोर उल्लंघन
इस तरह अधिक धान वसूली करना न केवल किसानों से सीधी धोखाधड़ी है, बल्कि—
भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी)
धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात)
छत्तीसगढ़ धान उपार्जन नीति का उल्लंघन
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध
इन सबके दायरे में आता है।
तहसीलदार का सख्त रुख—“पूरी कार्रवाई होगी”
जब सरसींवा तहसीलदार आयुष तिवारी को इसकी जानकारी दी गई, तो उन्होंने इस पूरे कृत्य को गंभीर और आपराधिक बताया। उन्होंने तुरंत फूड इंस्पेक्टर अमित शुक्ला को मौके पर जांच के निर्देश दिए हैं ताकि दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान—प्रशासन पर बड़े सवाल
ऐसी अनियमितताओं से किसान न केवल ठगे जा रहे हैं, बल्कि खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
लगातार शिकायतों के बावजूद इस तरह की गड़बड़ियाँ होना दर्शाता है कि कहीं-न-कहीं निगरानी तंत्र कमजोर है या अनदेखी जानबूझकर की जा रही है।
















