
🚨अपराध बेलगाम, पुलिस नाकाम: डुमरियागंज में ‘खाकी’ पस्त, अपराधी मस्त!🚨
⭐सिर्फ कागजों पर ‘नाइट पेट्रोलिंग’? चोरों ने चटकाए आधा दर्जन दुकानों के ताले, पुलिस सोती रही!
⭐स्टेट बैंक के पास से बार-बार चोरी: साहब! जब बैंक सुरक्षित नहीं, तो आम जनता कहाँ जाए?
⭐थानाध्यक्ष की सुस्ती या अपराधियों की दबंगई? आखिर कब थमेगा डुमरियागंज में वारदातों का सिलसिला?
⭐23 फरवरी से 26 मार्च: तारीख दर तारीख खुलती पुलिसिया इकबाल की पोल!
उत्तर प्रदेश।
सिद्धार्थनगर।। जनपद के डुमरियागंज थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। पिछले एक महीने के भीतर हुई ताबड़तोड़ वारदातों ने पुलिसिया इकबाल पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। 23 फरवरी से लेकर 26 मार्च तक का घटनाक्रम यह बताने के लिए काफी है कि अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ काफूर हो चुका है और आम जनता दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
💫वारदातों की झड़ी: तारीख दर तारीख खुली पोल
डुमरियागंज पुलिस की सुस्ती का आलम यह है कि अपराधी जब चाहते हैं, जहां चाहते हैं, वारदात को अंजाम देकर निकल जाते हैं। घटनाओं पर नजर डालें तो तंत्र की विफलता साफ दिखती है:
🔥23 फरवरी: चाकू की नोक पर सरेआम डकैती की गई, जिसने सुरक्षा दावों की हवा निकाल दी।
🔥06 मार्च: परसा चौराहे पर चोरों ने पुलिस को खुली चुनौती देते हुए एक ही रात में आधा दर्जन दुकानों के ताले चटका दिए।
🔥17 मार्च: सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले स्टेट बैंक के बगल से बाइक चोरी हुई।
🔥26 मार्च: हद तो तब हो गई जब उसी जगह (स्टेट बैंक के पास) से दोबारा बाइक पार कर दी गई।
💫गश्त सिर्फ कागजों पर, दहशत में जनता
लगातार हो रही इन चोरी और डकैती की घटनाओं से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का पूछना है कि आखिर पुलिस की ‘नाइट पेट्रोलिंग’ और सुरक्षा व्यवस्था कहां है? बाजार में चर्चा आम है कि जब बैंक जैसी जगहों के पास से बार-बार चोरियां हो रही हैं, तो सुरक्षित कौन है? अब तक एक भी बड़ी घटना का खुलासा न होना थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
💫कप्तान से उम्मीद, SHO की कार्यशैली पर सवाल
एक तरफ जहां क्षेत्र की जनता थानाध्यक्ष (SHO) की लापरवाही से त्रस्त है, वहीं दूसरी ओर जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन की सख्त छवि और सक्रियता पर लोगों का भरोसा अब भी कायम है। डॉ. महाजन अपनी जीरो-टालरेंस नीति के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में क्षेत्रीय जनता को उम्मीद है कि कप्तान साहब खुद इस मामले का संज्ञान लेंगे।
💫प्रमुख मुद्दे और जन-आक्रोश
👉पुलिस का खौफ खत्म: अपराधियों द्वारा एक ही स्थान को बार-बार निशाना बनाना पुलिस चुनौती देने जैसा है।
👉नाइट पेट्रोलिंग पर सवाल: दुकानों के ताले टूटना यह बताता है कि रात की गश्त केवल कागजों तक सीमित हो सकती है।
👉खुलासे में देरी: एक महीने बाद भी किसी बड़ी घटना का पर्दाफाश न होना स्थानीय SHO की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
⭐कप्तान से आस: जनता को अब केवल जनपद के कप्तान (SP) डॉ. अभिषेक महाजन की ‘जीरो-टालरेंस’ नीति से ही न्याय की उम्मीद है।
अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक की सख्ती के बाद जिम्मेदार SHO इस चुनौती को गंभीरता से लेते हैं या फिर अपराधियों के हौसले यूं ही बुलंद रहेंगे। क्या पुलिस इन मामलों का खुलासा कर खोया हुआ विश्वास बहाल कर पाएगी, या डुमरियागंज ‘अपराध का गढ़’ बना रहेगा?
ब्यूरो रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश



















