

तेज़ रफ़्तार अनियंत्रित भारी वाहन (डम्पर) ने कार को बेरहमी से कुचला, सड़क पर मौत का तांडव — एक ही परिवार के 5 सदस्यों की ‘चीखें बनी खामोशी’, भीषण सड़क दुर्घटना में 4–5 मौत की अनौपचारिक पुष्टि, ग्रामीणों का आक्रोश उफान पर, मुख्य राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को मौके पर बुलाने की ज़िद, स्थिति तनावपूर्ण — जाम और विरोध प्रदर्शन की सुगबुगाहट 🚨⛔
सहारनपुर। जनपद के गागलहेड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गाँव सैयद माजरा में बीती देर रात एक ऐसा दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसने पूरे जिले का दिल झकझोर कर रख दिया। मिली प्रारंभिक सूचना के अनुसार, सैयद माजरा निवासी परिवार के 4 से 5 सदस्य अपनी निजी कार में सवार होकर जैसे ही गाँव से मुख्य सड़क की ओर निकले, तभी सामने से आ रहे तेज़ गति के भारी डम्पर ने अचानक अपना नियंत्रण खो दिया, और आंख झपकते ही असंतुलित होकर चलते-चलते सीधे कार पर पलट गया। हादसा इतना भयानक था कि कार डम्पर के नीचे टीन की परत की तरह दबकर पिचक गई, काँच, लोहे और चीखों का एक विनाशकारी मिश्रण सायरन-नुमा खामोशी में बदल गया। वाहन के नीचे दबे परिवार के सदस्यों के बचने की संभावना सेकंडों में समाप्त हो गई, और घटनास्थल पर ही 4–5 जीवन समाप्त होने की खबर है, हालांकि पुलिस द्वारा आधिकारिक आंकड़ा अभी जारी होना शेष है। दुर्घटना की भीषणता ने यह साफ कर दिया कि यह मात्र एक्सीडेंट नहीं था, बल्कि सड़क पर सुरक्षा-तंत्र, तेज़-गति भारी वाहनों की निगरानी और प्रतिबंधित खनन-मार्गों पर नियंत्रण (जहाँ अक्सर रात्रि में भारी वाहन चलते हैं) की विफलता का मार्मिक प्रतिबिंब है।
दुर्घटना के तुरंत बाद जब ग्रामीणों तक यह दुखद समाचार पहुँचा तो वे संभल भी नहीं पाए थे कि सैकड़ों की संख्या में लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। देखते ही देखते पूरा खेत-किनारा, कच्चा रास्ता और मुख्य सड़क भारी भीड़ से भर गया। शोक, गुस्सा, डर, बेबसी और आक्रोश — सभी भाव एक साथ ग्रामीणों की आंखों और आवाज़ों में साफ देखे जा सकते थे। गांव की महिलाएँ रो-रोकर बेसुध हो रही थीं, बच्चे सदमे में खड़े थे और पुरुष वर्ग हाथों में वाहन हटवाने तथा राहत-बचाव कार्य तेज़ कराने की मांग को लेकर पुलिस-बल से भिड़ने जैसी मुद्रा में आ चुका था। थाना क्षेत्र में जाम लग जाने की भी प्रारंभिक सूचना मिल रही है, और ग्रामीणों द्वारा डम्पर-संचालन मार्गों पर अवैध प्रवेश-सहमति (एंट्री सिस्टम) और रात में बे-रोक-टोक परिवहन को लेकर जांच की मांग तेज़ होने लगी है। सूचना मिलते ही नगर और सदर क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी, यातायात पुलिस प्रभारी तथा भारी पुलिस-दल सुरक्षा-उपकरण, जे.सी.बी मशीन, एंबुलेंस और बचाव दल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गया।
मौके पर पहुंचते ही क्षेत्राधिकारी सदर के निर्देशन में वाहन-हटाने और दबे शवों को बाहर निकालने का कार्य शुरू करा दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि राहत-कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है और दोषी वाहन-चालक या उसके मालिक की जवाबदेही तय की जाएगी। दुर्घटना के बाद सड़क पर डम्पर पलटा पड़ा था, जिसके कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो चुका था। प्रशासन की यातायात-पुलिस टीम ने मोर्चा संभालते हुए दोनों दिशाओं से वाहनों को रोककर, भीड़ को नियंत्रित कर जाम खुलवाने का प्रयास तेज कर दिया। कार का ढांचा इतना बुरी तरह नष्ट हो चुका था कि शवों को बाहर निकालने में 2 से 3 घंटे का समय लगा, जिसके दौरान ग्रामीण अधिकारियों से बार-बार यह सवाल पूछ रहे थे कि “शासन के सख्त आदेश के बाद भी रात में रेत-बालू वाले भारी डम्पर इस मार्ग पर किसकी स्वीकृति से दौड़ रहे हैं?” ग्रामीण यह भी कह रहे हैं कि इसी मार्ग पर पिछले महीनों में कई छोटे-बड़े हादसे हुए, लेकिन ना तो तेज़-गति भारी वाहन संचालन पर प्रतिबंध लगा, ना खनन परिवहन मार्गों पर निगरानी बढ़ी, बल्कि चुनाव-ड्यूटी, बीएलओ-ड्यूटी, शिक्षक-ड्यूटी आदि के कारण प्रशासन के बड़े अधिकारी ग्रामीण इलाकों की सड़क-सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दे पाए।
सबसे चिंताजनक और मानव-मन को विचलित कर देने वाली बात यह है कि यह हादसा एक ऐसे परिवार के साथ हुआ जिसमें संभवतः पिता, माता, एक युवा पुत्री और 2 अन्य सदस्य अपनी सामान्य दैनिक यात्रा पर निकले थे, लेकिन तेज़-गति, भारी-वजन, नियंत्रणहीन डम्पर और असुरक्षित परिवहन मार्ग ने पूरे परिवार की जिंदगी सेकंडों में लील दी। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जिलाधिकारी स्वयं यहां मौके पर नहीं आते या उपजिलाधिकारी इस मामले को गंभीरता से निस्तारित नहीं करते, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। हालांकि पुलिस ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया है, लेकिन भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है, और माहौल शोक-पीड़ित होने के साथ-साथ विरोध-प्रर्शन की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। सूचना मिल रही है कि कुछ ग्रामीण गुस्से में सड़क पर धरना देने की तैयारी में भी हैं, वहीं अन्य गांवों से भी लोग जुट रहे हैं। पुलिस ने शोक-जनित आक्रोश को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा-दलों को भी बुला लिया है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर ना होने पाए, साथ ही शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह हादसा एक बड़ा सबक है कि सड़क पर सुरक्षा-व्यवस्था केवल बड़े शहर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, ग्रामीण क्षेत्रों में रात में अवैध परिवहन, डम्परों की तेज़-गति, तथा खनन-मार्ग एंट्री-सिंडीकेट की जांच भी उतनी ही अनिवार्य होनी चाहिए। वहीं जिले के आम नागरिक यह भी चाहते हैं कि इस मामले की उच्च-स्तरीय प्रशासनिक जांच हो और दोषी व्यक्ति या अधिकारियों पर स्पष्ट जवाबदेही तय हो, ताकि किसी और परिवार की जिंदगी सड़क पर ऐसे ही हादसे में समाप्त ना हो।
रिपोर्ट : अलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी समाचार
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
संपर्क : 8217554083











