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बस्ती का ‘डेथ विहार’: मिल की राख ने घेरा बच्चों का भविष्य, कुआनो भी खतरे में!

प्रशासन की 'सफेद चुप्पी' और मिल की 'काली राख': वन विहार को बनाया डंपिंग यार्ड।

अजीत मिश्रा (खोजी)

🌳वन विहार में ‘प्रदूषण का जहर’: क्या प्रशासन की नाक के नीचे स्वाहा हो रही है बस्ती की सेहत?🌳

🪾फेफड़ों पर भारी मिल की राख: वन विहार में टहलने वाले बुजुर्ग और बच्चों की सेहत से खिलवाड़।

🪾केंद्रीय विद्यालय के मासूमों पर प्रदूषण का साया, चंद कदमों की दूरी पर उड़ रहा है राख का गुबार।

🪾खतरे में कुआनो का अस्तित्व: राख के ढेर से दूषित हो रहा नदी का जल और वन संपदा।

🪾बिना अनुमति ‘सरकारी बाग’ में प्राइवेट मिल की राख का खेल, राहुल पटेल ने खोला मोर्चा।

🪾DM की चौखट पर पहुँचा ‘राख’ का मुद्दा: वन विहार में डंपिंग रोकने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।

🪾नियम ताक पर, राख का अंबार: आखिर किसकी शह पर वन विहार में फेंका जा रहा है कचरा?

उत्तर प्रदेश।

बस्ती। जिस ‘वन विहार’ को बस्ती के लोग शुद्ध हवा और सुकून के लिए जानते हैं, वह आज मिलों की जहरीली राख का डंपिंग ग्राउंड बन चुका है। गणेशपुर रोड स्थित इस प्राकृतिक धरोहर में प्राइवेट मिल की राख का अवैध ढेर न केवल नियमों की धज्जी उड़ा रहा है, बल्कि शहर के फेफड़ों पर भी घातक वार कर रहा है। हैरत की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर जिला प्रशासन ने अब तक रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।

💫सेहत से ‘खिलवाड़’ या सुनियोजित लापरवाही?

जिला पर्यावरण समिति के नामित सदस्य राहुल पटेल ने इस मुद्दे पर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था को आईना दिखाया है। राहुल पटेल का कहना है कि यह राख महज कचरा नहीं, बल्कि साइलेंट किलर है।

⭐बुजुर्ग और बच्चे निशाने पर: वन विहार में सुबह-शाम टहलने वाले बुजुर्गों और खेलने वाले बच्चों के लिए यह राख सांस की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।

⭐शिक्षा पर प्रदूषण का साया: वन विहार से चंद कदमों की दूरी पर केंद्रीय विद्यालय है। हवा के झोंकों के साथ उड़ने वाली यह राख स्कूल आने-जाने वाले हजारों मासूम बच्चों की आंखों और फेफड़ों में जहर घोल रही है।

💫पर्यावरण का ‘दम’ घोंटती राख

यह मामला केवल इंसानी सेहत तक सीमित नहीं है। मिल की इस दूषित राख का वैज्ञानिक परीक्षण तक नहीं किया गया है, फिर भी इसे सरकारी बाग में धड़ल्ले से डाला जा रहा है।

⭐कुआनो नदी पर खतरा: वन विहार के बगल से बह रही जीवनदायिनी कुआनो नदी का जल इस राख की वजह से दूषित होने की कगार पर है।

⭐वनस्पति का विनाश: राख की परत पेड़ों के रंध्रों (Pores) को बंद कर रही है, जिससे वन विभाग के कीमती पेड़ों का अस्तित्व खतरे में है।

“बिना किसी अनुमति के एक निजी मिल की राख को सरकारी बाग में डालना अपराध है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”— राहुल पटेल, नामित सदस्य, जिला पर्यावरण समिति

🔥सवाल जो जवाब मांगते हैं

क्या वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस अवैध डंपिंग की खबर नहीं है? या फिर किसी ‘बड़े प्रभाव’ के चलते जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? सरकारी जमीन पर प्राइवेट मिल की गंदगी खपाने का यह खेल बस्ती की जनता की सेहत के साथ एक क्रूर मजाक है।

राहुल पटेल ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और संबंधित अधिकारियों व मिल प्रबंधन पर कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या बस्ती की जनता इसी तरह राख के गुबार में अपना भविष्य धुंधला होते देखती रहेगी।

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