
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बस्ती जनपद के लालगंज में अधिवक्ता और होमगार्ड के परिवार पर हुए हमले की घटना न केवल कानून-व्यवस्था की विफलता है, बल्कि पुलिस और अपराधियों के बीच पनप रहे कथित ‘अदृश्य गठजोड़’ की एक खौफनाक तस्वीर भी है।।
🔥 खाकी की सरपरस्ती में ‘गुंडाराज’: लालगंज में अधिवक्ता परिवार लहूलुहान, क्या वर्दी ने अपराधियों से मिलाया हाथ?
🔥बस्ती में कानून का जनाजा: दबंगों ने अधिवक्ता के परिवार को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, लहूलुहान हुई ‘खाकी’ की साख!
🔥लालगंज पुलिस का ‘मौन’ समर्थन? होमगार्ड और अधिवक्ता के परिवार पर जानलेवा हमला, अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर।
🔥दबंगई चरम पर, सुशासन शर्मसार: अपनी ही जमीन पर मकान बनाना पड़ा भारी, लाठी-डंडों से किया गया खूनी संघर्ष।
🔥क्या अपराधियों की ‘जेब’ में है लालगंज पुलिस? गंभीर रूप से घायल पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर।
🔥जीरो टॉलरेंस का निकला दम: बस्ती में सरेआम बहा खून, अपराधियों को किसका संरक्षण?
उत्तर प्रदेश।
बस्ती। प्रदेश सरकार भले ही ‘जीरो टॉलरेंस’ और अपराधियों के गले में तख्ती लटकाने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन बस्ती जनपद का लालगंज थाना क्षेत्र इन दावों की धज्जियां उड़ाने में लगा है। लालगंज पुलिस की कार्यशैली आज आम जनमानस के बीच सवालों के घेरे में है। सवाल यह कि क्या पुलिस अपराधियों की मददगार बन गई है? क्या खाकी के साए में अब ‘दबंग’ जमीनों पर कब्जा और बेगुनाहों का खून बहाने का लाइसेंस पा चुके हैं?
🔥अधिवक्ता और सरकारी कर्मी तक सुरक्षित नहीं
ताजा मामला ग्राम कोपे का है, जहाँ अधिवक्ता सत्येंद्र मिश्रा के परिवार पर उस समय जानलेवा हमला किया गया जब वे अपनी ही वैध जमीन पर निर्माण कार्य कर रहे थे। एक तरफ पीड़ित पक्ष के अनिल मिश्रा स्वयं होमगार्ड (सरकारी कर्मी) हैं, दूसरी तरफ उनके भाई अधिवक्ता हैं। जब समाज के इन जागरूक और रक्षक वर्गों के साथ सरेआम मारपीट हो सकती है, तो लालगंज की आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही मानी जाएगी।
🔥पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
आरोप है कि शिव चरण चौधरी, दुर्योधन चौधरी और उनके अन्य साथियों ने लाठी-डंडों से लैस होकर पीड़ित परिवार पर हमला किया। इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाली बात पुलिस की कथित शिथिलता है।
😇क्या पुलिस ने जानबूझकर अपराधियों को खुला हाथ दिया?
😇क्या ‘रास्ते’ का विवाद खड़ा करना महज एक बहाना था ताकि दबंगई के बल पर जमीन कब्जाई जा सके?
😇आखिर किसके संरक्षण में ये हमलावर इतने बेखौफ हैं कि उन्हें कानून का जरा भी डर नहीं?
🔥जीरो टॉलरेंस या जीरो एक्शन?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पीड़ित परिवार का दर्द और न्याय की गुहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा तमाचा है। यदि पुलिस समय रहते सख्त कदम उठाती, तो शायद एक परिवार को इस तरह लहूलुहान न होना पड़ता। लालगंज पुलिस पर लग रहे ‘मिलीभगत’ के आरोपों ने पूरे पुलिस विभाग की छवि को धूमिल किया है।
अब देखना यह है कि बस्ती के आला अधिकारी इस ‘लालगंज के गठजोड़’ को तोड़ते हैं या फिर अपराधियों को बचाने का यह खेल बदस्तूर जारी रहेगा। यदि दोषियों पर रासुका और गैंगस्टर जैसी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का पुलिस से विश्वास पूरी तरह उठना तय है।





















