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बस्ती में खनन माफिया का तांडव: सिकटा में दिन-रात गरज रहा ‘पीला पंजा’, बेबस या बेखबर प्रशासन?

साहब! कब टूटेगी कुंभकर्णी नींद? गणेशपुर के सिकटा में बेखौफ हो रहा अवैध खनन का 'काला खेल'

🚨बस्ती: गणेशपुर के सिकटा में बेखौफ ‘पीला पंजा’, खनन माफिया के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन?🚨

⭐योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ को ठेंगा: बस्ती में खनन माफिया के आगे नतमस्तक हुआ तंत्र!

⭐खनन माफिया से ‘जुगलबंदी’ या मजबूरी? बार-बार शिकायत के बाद भी अफसरों ने साधी चुप्पी।

⭐सफेदपोशों की शह पर धरती का सीना चीर रहे खनन माफिया, प्रशासन की ‘मौन स्वीकृति’ पर उठे सवाल।

⭐डीएम-एसडीएम साहब! आपकी नाक के नीचे लुट रहा राजस्व, आखिर सिकटा के अवैध खनन पर कार्रवाई कब?

बस्ती। जनपद के ग्राम पंचायत गणेशपुर अंतर्गत सिकटा गांव में अवैध खनन का काला खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक धरती का सीना चीरकर चांदी काटी जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि उच्चाधिकारियों को बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नजर नहीं आ रही है। प्रशासन की यह ‘चुप्पी’ अब सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और खनन माफियाओं के साथ उनकी ‘जुगलबंदी’ की ओर इशारा कर रही है।

सूचना के बाद भी ‘सन्नाटा’, आखिर मंशा क्या है?
💫स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन की जानकारी तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक के आला अफसरों को है। इसके बावजूद मौके पर किसी भी टीम का न पहुँचना कई बड़े सवाल खड़े करता है। क्या खनन माफिया इतने रसूखदार हो गए हैं कि कानून के हाथ उन तक पहुँचने से कतरा रहे हैं? या फिर ‘ऊपर तक’ पहुँचने वाली कमीशन की मलाई ने अफसरों की आँखों पर पट्टी बांध दी है?
⭐बड़ा सवाल: क्या डीएम और एसडीएम करेंगे कार्यवाही?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनपद के जिलाधिकारी (DM), एसडीएम (SDM) और खनन अधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेंगे? क्या योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का बस्ती में इसी तरह मखौल उड़ाया जाता रहेगा? जनता अब यह पूछ रही है कि जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में संलिप्त दिखने लगें, तो अवैध खनन पर लगाम कौन लगाएगा?
💫तैयार हो रही है बड़ी जांच की जमीन
सूत्रों की मानें तो सिकटा में चल रहा यह अवैध कारोबार बिना स्थानीय रसूखदारों और विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह न केवल राजस्व की बड़ी हानि है, बल्कि पर्यावरण के साथ भी खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि खबर छपने के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या फिर ‘कागजी कार्यवाही’ का कोरम पूरा कर फाइलें दबा दी जाएंगी।
ब्यूरो रिपोर्ट:
अजीत मिश्रा (खोजी)
मंडल ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उ.प्र.)

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