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बस्ती में खाकी और कलम का शर्मनाक गठजोड़: कोतवाल की नाक के नीचे सज रही जुए की महफिल!

।। जुआरियों के 'कवच' बने खाकीधारी; दो पत्रकारों के दामन पर भी लगा सट्टे की स्याही का दाग।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। बस्ती में ‘खाकी’ और ‘कलम’ के पहरे में जुए का नंगा नाच: बर्बादी की कगार पर युवा पीढ़ी।।

🔥बस्ती कोतवाल का मौन समर्थन या मजबूरी? ब्लॉक रोड पर सरेआम फल-फूल रहा अवैध लॉटरी का खेल।

🔥क्या अपराधियों के आगे पस्त हो गई है बस्ती पुलिस? ब्लॉक रोड की गलियों से उठ रहे गंभीर सवाल।

🔥रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं: क्या पत्रकारों की कलम अब जुआ माफियाओं की तिजोरी भरेगी?

वृहस्पतिवार 22 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। जनपद में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए जुआ और लॉटरी का अवैध धंधा अपनी जड़ें जमा चुका है। शहर के ब्लॉक रोड स्थित डॉ. रमेश वाली गली में अशोक गुप्ता और सूरज गुप्ता जैसे नामों द्वारा संचालित यह अवैध कारोबार अब किसी से छिपा नहीं है। लेकिन विडंबना देखिए, जिस पुलिस के कंधों पर सुरक्षा का जिम्मा है और जिस पत्रकारिता को समाज का दर्पण कहा जाता है, वही इस काले खेल के ‘सुरक्षा कवच’ बने हुए हैं।

💫पुलिस की लाचारी या ‘हिस्सेदारी’?

जिले के दो थानों की पुलिस इस लॉटरी गैंग के आगे पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रही है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि पुलिस अफसर ‘पस्त’ नहीं, बल्कि ‘मस्त’ हैं क्योंकि उनके पास समय पर उनका ‘हिस्सा’ पहुँच रहा है। बस्ती कोतवाल की नाक के नीचे चल रहे इस खेल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। क्या खाकी अब अपराधियों को पकड़ने के बजाय उनकी ढाल बनने के लिए है?

💫पत्रकारिता के नाम पर काला धब्बा

खुलासा होने के बाद गैंग के सरगना ने खुद कबूला है कि दो तथाकथित पत्रकारों के संरक्षण में यह सारा खेल चल रहा है। समाज के चौथे स्तंभ का जुआ माफियाओं के साथ यह गठबंधन लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। जब रक्षक ही भक्षक के साथ हाथ मिला लें, तो आम जनता न्याय की गुहार किससे लगाए?

💫बर्बाद होता भविष्य

इस अवैध जुए और लॉटरी की लत में शहर का युवा वर्ग और बेरोजगार तबका पूरी तरह डूब चुका है। मेहनत की कमाई को माफियाओं की जेब में डाल रहे ये लोग अंततः अपराध के रास्ते पर बढ़ रहे हैं।

बड़ा सवाल: क्या बस्ती का प्रशासन और उच्च अधिकारी इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को तोड़ने का साहस दिखाएंगे, या फिर अशोक और सूरज गुप्ता जैसे माफियाओं के आगे शहर का भविष्य इसी तरह दांव पर लगा रहेगा?

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