
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨 खाकी का खौफ खत्म: लालगंज में दबंगों का नंगा नाच, निर्माणाधीन मकान ढहाया 🚨
⭐ आधी रात को रणक्षेत्र बना जगरनाथपुर, ग्रामीणों ने घेरा तो गाड़ियाँ छोड़कर भागे हमलावर।
⭐ लाठी, डंडे और धारदार हथियार: लालगंज में जमीन विवाद ने लिया खूनी मोड़!
⭐ जमीन विवाद में खूनी खेल की साजिश, निर्माणाधीन मकान में जमकर तोड़फोड़।
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती (ब्यूरो चीफ)। जनपद के थाना लालगंज अंतर्गत जगरनाथपुर गांव में शनिवार की शाम जो कुछ हुआ, उसने कानून-व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जमीनी विवाद में बेखौफ 20-25 दबंगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों के साथ एक निर्माणाधीन मकान पर धावा बोल दिया। तांडव ऐसा कि दीवारें गिरा दी गईं, मारपीट हुई और पूरे इलाके को दहशत के साए में धकेल दिया गया।
💫 शाम ढलते ही शुरू हुआ खूनी खेल
पीड़ित के अनुसार, गाटा संख्या 231 पर शांतिपूर्ण तरीके से निर्माण कार्य चल रहा था। लेकिन 21 मार्च की शाम करीब 7:30 बजे गांव के ही कुछ ‘मनबढ़’ तत्वों ने अपनी फौज के साथ हमला बोल दिया। चश्मदीदों की मानें तो हमलावर जबरन रास्ता देने का दबाव बना रहे थे। जब पीड़ित पक्ष ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने कानून को हाथ में लेते हुए न केवल मारपीट की, बल्कि बन रही दीवार को भी जमींदोज कर दिया।
💫 ग्रामीणों की एकजुटता देख भागे हमलावर
दबंगों की गुंडागर्दी उस वक्त थमी जब शोर सुनकर ग्रामीण एकजुट होने लगे। ग्रामीणों की घेराबंदी देख हमलावर इतने घबरा गए कि अपनी गाड़ियां मौके पर ही छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। सूचना पाकर पहुंची लालगंज पुलिस ने लावारिस छोड़ी गई गाड़ियों को कब्जे में ले लिया है।
💫 दहशत में ग्रामीण, पुलिस के दावों पर सवाल
जगरनाथपुर की इस घटना ने पुलिसिया इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम आदमी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है।
“मामला संज्ञान में है। मौके से गाड़ियां जब्त की गई हैं। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो नजीर बनेगी।” — प्रभारी निरीक्षक, थाना लालगंज
लालगंज थाना क्षेत्र के जगरनाथपुर गांव में शनिवार की शाम जो कुछ हुआ, वह केवल दो पक्षों का जमीनी विवाद नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर कानून के राज को दी गई चुनौती है। 20-25 दबंगों का हथियारों के साथ एक निर्माणाधीन मकान पर हमला करना और तांडव मचाना यह साबित करता है कि अपराधी अब खाकी की धमक से बेखौफ हो चुके हैं।
सवाल यह है कि आखिर इन ‘मनबढ़’ तत्वों को शह कौन दे रहा है? गाटा संख्या 231 पर दीवार का गिरना महज ईंट-पत्थरों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह आम आदमी के उस भरोसे का टूटना है जो वह अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस पर करता है। शाम के साढ़े सात बजे, जब पुलिस की गश्त का दावा किया जाता है, तब दर्जनों लोग लाठी-डंडों के साथ सरेआम उत्पात मचाते हैं। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि इलाके में खुफिया तंत्र (LID) पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
गनीमत रही कि ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई और हमलावर अपनी गाड़ियाँ छोड़कर भाग खड़े हुए। लेकिन क्या पुलिस अब केवल उन गाड़ियों को ‘कब्जे’ में लेकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेगी? गाड़ियों का मौके पर मिलना इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह हमला सुनियोजित था।
🔥 प्रशासन को यह समझना होगा: अगर जमीन के छोटे-छोटे विवादों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो बस्ती का शांत माहौल बिगाड़ने में इन गुंडों को देर नहीं लगेगी। पुलिस को केवल तहरीर का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि ऐसी सख्त ‘नजीर’ पेश करनी चाहिए कि दोबारा कोई कानून को हाथ में लेने की जुर्रत न करे।



















