
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: दहेज के दानवों ने बुझा दिया घर का चिराग, एक माह के मासूम के सिर से उठा मां का साया!
ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- खौफनाक: “इसे मारो तभी कार मिलेगी”… फोन पर दी गई धमकी को ससुरालियों ने अंजाम में बदला!
- नगर पुलिस की सुस्ती या मिलीभगत? तहरीर के बाद भी हत्यारों की गिरफ्तारी में देरी क्यों?
- कानून को ठेंगा दिखाते दहेज के दानव: विचाराधीन मुकदमे के बीच विवाहिता की संदिग्ध मौत से हड़कंप!
- बेटी का गुनहगार कौन? पिता ने नम आंखों से पूछा- “क्या गरीब की सामर्थ्य ही उसकी बेटी की सजा है?”
- इंसाफ की गुहार: नीलम के हाथों के जख्म दे रहे गवाही, क्या सलाखों के पीछे जाएंगे हत्यारे?
बस्ती। जनपद के नगर थाना क्षेत्र में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक विवाहिता को दहेज की वेदी पर चढ़ा दिया गया। थन्वारपुर गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई नीलम की मौत ने पुलिस प्रशासन और समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक कार की कीमत एक मासूम की मां की जान से बढ़कर थी?

खाकी के ‘आश्वासन’ और ससुरालियों के ‘जुल्म’ के बीच पिसी नीलम
मृतका नीलम के पिता रामदेव तिवारी (निवासी सिद्धार्थनगर) की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही पवन मिश्रा और उसका परिवार कार की मांग को लेकर नीलम को लगातार प्रताड़ित कर रहा था। ताज्जुब की बात तो यह है कि आरोपी पहले भी जेल की दहलीज तक पहुंच चुका था (मु0अ0सं0-168/2024), लेकिन ‘अदालती फेरे’ और ‘झूठे पछतावे’ का नाटक कर वह नीलम को दोबारा अपने साथ ले गया। पिता ने भावुक होकर उसे भेजा था कि शायद अब सब ठीक हो जाए, पर उन्हें क्या पता था कि वे अपनी बेटी को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं।
साजिश की बू: “मारो इसे, तभी मिलेगी कार”
परिजनों का दावा है कि यह महज मौत नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या है। आरोप है कि 15 दिन पहले ही साजिश रची जा चुकी थी। फोन पर सरेआम धमकी दी जा रही थी कि “नीलम को मारो, तभी दहेज में कार मिलेगी।” 14 मई की रात जब पुलिस का फोन आया, तब तक सब खत्म हो चुका था। मृतका के हाथों पर मौजूद चोट के निशान चीख-चीख कर ससुरालियों की दरिंदगी की दास्तान बयां कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु जो खड़े करते हैं सवाल:
- मासूम का क्या कसूर? नीलम का बेटा अभी मात्र एक माह का है। जिस उम्र में उसे मां की ममता मिलनी चाहिए थी, उसे अपनी मां की लाश देखनी पड़ी।
- कानून का खौफ खत्म? पहले से दहेज का मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने वारदात को अंजाम दे डाला।
- पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल: घटना के बाद भी तहरीर मिलने के बावजूद मुकदमा दर्ज होने में देरी क्यों? क्या नगर पुलिस किसी दबाव में है?
आरोपियों की सूची और न्याय की मांग
पीड़ित पिता ने पति पवन मिश्रा, सास सुशीला, ननद निर्मला व अर्चना, चचेरे ससुर कैलाश मिश्र, गोपाल मिश्रा और अन्य के खिलाफ नामजद शिकायत की है। बस्ती की जनता अब देख रही है कि क्या थाना प्रभारी भानु प्रताप सिंह और उनकी टीम इन ‘दहेज लोभियों’ को सलाखों के पीछे भेजकर एक मिसाल कायम करेगी या फाइलें दबकर रह जाएंगी।




















