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बस्ती में ‘लोन कांड’ का महाधमाका: अनूप खरे के छह करोड़ी साम्राज्य के नीचे दबी ईमानदारी!

सफेदपोश जालसाजी: बैंक मैनेजर की 'कृपा' और अनूप खरे का 'कारनामा', 83 साल के बुजुर्ग को भी नहीं बख्शा!

अजीत मिश्रा (खोजी)

खुलासा: ‘दी सीएमएस’ की आड़ में करोड़ों का वारा-न्यारा, क्या सलाखों के पीछे जाएंगे जालसाज अनूप खरे?

विशेष ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

 11 अप्रैल 2026

😇’सफेदपोश’ ठगी का ‘छह करोड़ी’ खेल: अनूप खरे के ‘लोन स्कैम’ ने हिलाया बस्ती का बैंकिंग सिस्टम!😇

बस्ती। जनपद में शिक्षा और समाजसेवा की ओट में चल रहे एक बड़े आर्थिक साम्राज्य के काले कारनामों का पर्दाफाश हुआ है। विवादों के ‘पुराने खिलाड़ी’ और चित्रांश भारती के मंत्री एवं दी सीएमएस विद्यालय के प्रबंधक अनूप खरे एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। इस बार मामला मामूली नहीं, बल्कि 6 करोड़ रुपये के संदिग्ध लोन और बैंकिंग धोखाधड़ी का है, जिसने एचडीएफसी बैंक (HDFC) की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

😇साजिश का ‘मास्टरमाइंड’ और बैंक मैनेजर की ‘जुगलबंदी’

इस पूरे खेल में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की बू आ रही है। आरोपों के केंद्र में एचडीएफसी बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अभय प्रताप सिंह हैं। बताया जा रहा है कि जब बैंक मैनेजर की चोरी पकड़ी गई, तो उसे बचाने के लिए बैंक प्रशासन की ओर से एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया गया। जब जांच की आंच बढ़ी और मोबाइल नंबर 7607967747 पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो आरोपितों ने चुप्पी साध ली, जो उनकी संलिप्तता की ओर साफ इशारा करती है।

😇83 वर्षीय बुजुर्ग को बनाया ‘शिकार’, फर्जीवाड़े की हदें पार

धोखाधड़ी की यह कहानी रूह कंपा देने वाली है। शिकायतकर्ता संकटा प्रसाद शुक्ल (पुत्र आचार्य नाथ शुक्ल), जिनकी उम्र 83 वर्ष है, ने एसपी बस्ती को लिखे पत्र में सनसनीखेज खुलासे किए हैं:

⭐बिना जानकारी के बनाया गारंटर: बुजुर्ग संकटा प्रसाद को, जो चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं, उनकी जानकारी के बिना ही करोड़ों के लोन में गारंटर बना दिया गया।

⭐फर्जी हस्ताक्षर का खेल: आरोप है कि अनूप खरे ने बैंक मैनेजर के साथ मिलकर बैंक खाता संख्या 5020004492473 (IFSC: HDFC0001888) में बुजुर्ग के कूटरचित (Fake) हस्ताक्षर किए और उनके पैन कार्ड व दस्तावेजों का दुरुपयोग किया।

⭐इस्तीफे के बाद भी जालसाजी: संकटा प्रसाद शुक्ल ने 22 सितंबर 2023 को ही विद्यालय के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बावजूद, उन्हें लोन के कागजों में फंसाए रखा गया और धोखाधड़ी से नाम हटाने का नाटक 25 नवंबर को किया गया। सवाल यह है कि जब वे पद पर थे ही नहीं, तो उन्हें गारंटर के रूप में रखा ही क्यों गया?

😇सत्ता की हनक और ‘सिविल’ की डकैती

इस घोटाले की जद में सिर्फ संकटा प्रसाद ही नहीं, बल्कि भाजपा नेता राजेंद्रनाथ तिवारी भी आए हैं। उन्हें भी बिना बताए करोड़ों का गारंटर बना दिया गया, जिससे उनका ‘सिविल स्कोर’ बर्बाद हो गया। जब तिवारी ने विरोध किया और बैंक मैनेजर को ‘नौकरी खा जाने’ की चेतावनी दी, तब जाकर बैंक ने आनन-फानन में उनका नाम हटाया।

✍️बड़ा सवाल: क्या एक प्रतिष्ठित बैंक बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के किसी को भी करोड़ों का गारंटर बना सकता है? या फिर अनूप खरे का रसूख बैंक के नियमों से ऊपर है?

🔔जांच का विषय या रफा-दफा करने की साजिश?

अनूप खरे पर पहले भी धोखाधड़ी और धन हड़पने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन इस बार जिस तरह से एक 83 साल के बुजुर्ग और प्रतिष्ठित नागरिकों के दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ किया गया है, वह सीधे तौर पर एक ‘संगठित आर्थिक अपराध’ है।

✍️प्रशासन से कुछ सवाल:

  • क्या एचडीएफसी बैंक के उन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने बिना सत्यापन के करोड़ों का लोन बांट दिया?
  • अनूप खरे के पास इन बुजुर्गों के गोपनीय दस्तावेज और पैन कार्ड कहाँ से आए?
  • क्या बस्ती पुलिस इस ‘व्हाइट कॉलर’ अपराधी पर शिकंजा कसेगी या सत्ता के गलियारों से आने वाले दबाव के आगे घुटने टेक देगी?

बस्ती की जनता अब जवाब चाहती है। शिक्षा के मंदिर की आड़ में ‘लोन माफिया’ का यह चेहरा बेनकाब होना जरूरी है। अगर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आम आदमी का बैंकिंग सिस्टम से भरोसा उठ जाएगा।

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