
🏥बस्ती: स्वास्थ्य विभाग में ‘करोड़ों का खेल’, डिप्टी सीएम की धमक से सहमे जिम्मेदार🏥
⭐महिला अस्पतालों में ‘मलाई’ का खेल! करोड़ों के साजो-सामान की खरीद में मानकों की धज्जियां, जांच शुरू।
⭐अस्पताल के बजट पर ‘डाका’: बस्ती और हरैया में उपकरणों की खरीद की खुलेगी फाइल, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट।
⭐साहब, सौदागर और सिंडिकेट: बस्ती स्वास्थ्य विभाग का ‘करोड़पति’ खेल अब लखनऊ की रडार पर।
⭐भ्रष्टाचार की ‘उन्नयन’ फाइल: क्या मां-नवजातों के हक के पैसों से भरा गया अधिकारियों का खजाना?
⭐कुर्सी पर खतरा: बस्ती स्वास्थ्य विभाग के ‘बड़े चेहरों’ पर गिरेगी गाज, डिप्टी सीएम कार्यालय ने कसी नकेल।
अजीत मिश्रा (खोजी), ब्यूरो चीफ
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
बस्ती। सरकारी धन की मलाई काटने वाले ‘सफेदपोश’ अधिकारियों के सिंडिकेट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सीधे प्रदेश की राजधानी से जांच की गाज गिरी। जनपद के दो प्रमुख महिला अस्पतालों— जिला महिला चिकित्सालय बस्ती और 100 शैय्या महिला अस्पताल हरैया में करोड़ों की लागत से हुए उन्नयन, उपकरणों की खरीद और साज-सज्जा के नाम पर जो ‘खेल’ खेला गया, उसकी गूंज अब लखनऊ तक पहुंच चुकी है।
💫डिप्टी सीएम का हंटर: भुगतान पर लगी ‘ब्रेक’
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के कार्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि संबंधित फर्मों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्देश उन अधिकारियों के लिए किसी झटके से कम नहीं है जो बंदरबांट की तैयारी में बैठे थे। सूत्रों की मानें तो करोड़ों रुपये के उपकरणों और फर्नीचर की खरीद में मानकों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को उपकृत करने की साजिश रची गई थी।
💫जांच के घेरे में ‘साहब’ और ‘सौदागर’
इस पूरे प्रकरण में जिला महिला चिकित्सालय और हरैया अस्पताल के चिकित्साधीक्षकों की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है। जांच की आंच अब उन फाइलों तक पहुंच गई है, जिनमें उपकरणों की खरीद के बिल और कोटेशन दबे हुए थे।
⭐अनियमितता: क्या बाजार दर से कई गुना अधिक दामों पर सामान खरीदा गया?
⭐गुणवत्ता: क्या घटिया उपकरणों को ‘ब्रांडेड’ बताकर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई?
⭐सिंडिकेट: इस खेल के पीछे कौन से प्रभावशाली चेहरे हैं?
💫तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, गिरेगी गाज
शासन ने इस मामले में आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखते हुए मात्र 3 दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में सन्नाटा पसरा है और कई बड़े चेहरों की कुर्सी अब खतरे में नजर आ रही है। यदि जांच निष्पक्ष हुई, तो बस्ती स्वास्थ्य विभाग का यह ‘महारैकेट’ पूरे प्रदेश में मिसाल बनेगा कि भ्रष्टाचार करने वालों की जगह विभाग में नहीं, जेल में है।
“जनता के टैक्स के पैसे से मां और नवजातों के लिए आने वाली सुविधाओं को भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। जांच शुरू हो चुकी है, सच जल्द सामने होगा।”— प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से



















