
अजीत मिश्रा (खोजी)
⭐भ्रष्टाचार की ‘लाइब्रेरी’: किताबों का पता नहीं, कंप्यूटर गायब; बहादुरपुर में विकास के दावों की खुली पोल⭐
😇”साहब की मेहरबानी: लाइब्रेरी की किताबें ‘दूसरे गांव’ में और रोस्टर में ‘तारीखों’ का खेल!”
😇”कागजों पर ‘स्मार्ट’ गांव, हकीकत में फाइलों का ढेर; डीपीआरओ का एडीओ और सचिव पर हंटर।”
😇”बस्ती डीपीआरओ का कड़ा एक्शन: बहादुरपुर के एडीओ और सचिव को नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब।”
😇”बहादुरपुर में ‘डिजिटल लाइब्रेरी’ के नाम पर खेल! गायब किताबों ने बढ़ाई सचिव की मुश्किलें।”
उत्तर प्रदेश।
बस्ती। जनपद के बहादुरपुर विकास खंड में ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों को जमीनी हकीकत ने आईना दिखा दिया है। ग्राम पंचायत अमिलहा में विकास की गंगा ऐसी सूखी है कि न वहां कंप्यूटर बचे हैं और न ही सरकार द्वारा भेजी गई किताबें। सीडीओ के निरीक्षण में मिली ‘महा-लापरवाही’ के बाद अब डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत और ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ हंटर चलाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
💫कागजों पर लाइब्रेरी, हकीकत में सन्नाटा
अमिलहा ग्राम पंचायत को डिजिटल लाइब्रेरी के लिए चुना गया था, लेकिन यहां ज्ञान की रोशनी पहुंचने से पहले ही अव्यवस्था का अंधेरा छा गया। सीडीओ के निरीक्षण में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं:
👉गायब किताबें: एकेडमी की किताबें तो आईं, लेकिन सचिव साहब ने उन्हें किसी दूसरी पंचायत में ‘सुरक्षित’ कर दिया। जब गिनती हुई, तो वहां भी किताबें कम मिलीं।
👉लापता कंप्यूटर: पंचायत भवन से कंप्यूटर नदारद थे। जिस भवन को ग्रामीणों की समस्याओं का केंद्र होना चाहिए था, वहां केवल धूल फांकती कुछ फाइलें मिलीं।
👉लापरवाही का आलम: सालों से पंचायत सहायक की तैनाती नहीं है और भवन पूरी तरह से ‘शो-पीस’ बनकर रह गया है।
💫झूठा रोस्टर और साहब की ‘मनमर्जी’
हैरानी की बात तो यह है कि पंचायत भवन के बाहर लगा रोस्टर भी अधिकारियों को गुमराह करने के लिए गलत लिखा गया था। सचिव का उपस्थिति दिवस शुक्रवार है, लेकिन बोर्ड पर सोमवार अंकित कर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम किया जा रहा था। सीडीओ ने इस फर्जीवाड़े पर कड़ा रोष व्यक्त किया है।
“अमिलहा पंचायत भवन की स्थिति सरकारी धन और जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है। सचिव फिरोज खान और एडीओ पंचायत अवधेश कुमार को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।”— घनश्याम सागर, डीपीआरओ, बस्ती
💫 कब सुधरेगा सिस्टम?
सरकारी योजनाओं का बजट तो बंदरबांट की भेंट चढ़ जाता है, लेकिन जब धरातल पर काम की बारी आती है, तो जिम्मेदार अधिकारी बगलें झांकने लगते हैं। बहादुरपुर की यह घटना महज एक बानगी है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ नोटिस से व्यवस्था सुधरेगी या इन ‘कुर्सी तोड़’ अधिकारियों पर कोई बड़ी कार्रवाई भी होगी?



















