

मिर्जापुर खनन घोटाला: पूर्व DM प्रियंका निरंजन और खनन अफसर पर गंभीर आरोप, आधी कीमत पर पट्टे बाँटकर करोड़ों का नुकसान – पूरा खेल सामने आया
मिर्जापुर – उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में खनन विभाग और जिला प्रशासन के कथित गठजोड़ से हुआ एक बड़ा खनन घोटाला सामने आया है। आरोप है कि तत्कालीन जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन और खनन अधिकारी जितेंद्र पटेल ने बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के खनन पट्टे आधी कीमत पर बाँट दिए। इस कारनामे से न केवल खनन माफिया मालामाल हुए, बल्कि प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
📅 घोटाले की टाइमलाइन
मार्च 2023: प्रियंका निरंजन को मिर्जापुर का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया।
अप्रैल–जून 2023: खनन नीति के तहत नए पट्टों के लिए विज्ञापन जारी होना था, लेकिन प्रक्रिया टाल दी गई।
जुलाई 2023: रॉयल्टी दर 200–220 रुपये प्रति घनमीटर से घटाकर 110 रुपये प्रति घनमीटर कर दी गई।
अगस्त–सितंबर 2023: चुनिंदा खनन कंपनियों को केवल 2–5 रुपये की मामूली वृद्धि के साथ पट्टे आवंटित।
अक्टूबर 2023: “शैलेंद्र पटेल सिंडिकेट” की सक्रियता बढ़ी, खनन अधिकारी जितेंद्र पटेल के जरिए पैटर्न तय हुआ।
दिसंबर 2023: स्थानीय खदानों से रॉयल्टी चोरी और ओवरलोडिंग की शिकायतें बढ़ीं।
फरवरी 2024: मीडिया ने रॉयल्टी रेट में भारी कटौती और चयनित लोगों को फायदा पहुंचाने की रिपोर्ट प्रकाशित की।
मार्च 2024: भारत समाचार की जांच रिपोर्ट प्रसारित — मामला प्रदेश स्तर पर सुर्खियों में आया।
अप्रैल 2024: वाराणसी मंडल के कमिश्नर ने विवादित सभी पट्टे रद्द किए।
2025 (वर्तमान): मामले की विभागीय जांच लंबित, लेकिन अभियोजन या संपत्ति जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।
🏢 जुड़े अफसरों का पदस्थापन और भूमिका
प्रियंका निरंजन (पूर्व DM मिर्जापुर)
कार्यकाल: मार्च 2023 से मई 2024
आरोप: पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया न अपनाना, रॉयल्टी दर कम करके सरकारी राजस्व में हेराफेरी को बढ़ावा देना।
जितेंद्र पटेल (खनन अधिकारी मिर्जापुर)
कार्यकाल: जुलाई 2022 से वर्तमान
आरोप: अपने रिश्तेदार शैलेंद्र पटेल के सिंडिकेट को प्राथमिकता देकर गैरकानूनी रूप से लाभ पहुंचाना।
शैलेंद्र पटेल (खनन ठेकेदार और कथित सिंडिकेट प्रमुख)
भूमिका: जिले में खनन कार्यों पर अनौपचारिक नियंत्रण, ठेकों के जरिए करोड़ों की आमदनी, परिवारजनों की खनन विभाग में तैनाती।
अन्य संबंधित अधिकारी
खनन लिपिक, सर्वे टीम और परिवहन विभाग के निरीक्षक — आरोप है कि इनकी मिलीभगत से ओवरलोडिंग और अवैध खनन को संरक्षण मिला।
🔍 संभावित जांच एजेंसियों की भूमिका
भ्रष्टाचार निवारण संगठन (UP Vigilance Department):
संपत्ति की जांच, सरकारी नुकसान का आकलन और संलिप्त अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना।खनन निदेशालय (Directorate of Geology & Mining, UP):
खनन पट्टों की प्रक्रिया, दर निर्धारण और नीलामी नियमों के उल्लंघन की तकनीकी जांच।आर्थिक अपराध शाखा (EOW):
सिंडिकेट के बैंक खातों, लेन-देन और संदिग्ध ट्रांसफरों की जांच।आयकर विभाग (Income Tax Department):
खनन माफिया और जुड़े अफसरों के आय-व्यय अनुपात की जांच, बेनामी संपत्ति की पहचान।ED (Enforcement Directorate):
मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की जांच।
💬 सवाल जो अब भी बने हुए हैं
इतनी बड़ी गड़बड़ी के बावजूद अभी तक किसी अफसर पर FIR क्यों नहीं हुई?
जिन पट्टों से करोड़ों की हेराफेरी हुई, उनका आर्थिक ऑडिट कब होगा?
सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई में देरी का जिम्मेदार कौन?
📌 विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
🖋 संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र / वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📞 संपर्क: 8217554083










