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“विकास भवन का ‘दीमक’ गिरफ्तार: वेतन की फाइल के बदले मांग रहा था घूस, अपनों ने ही बुना जाल!”

"भ्रष्टाचार की हद: साथी कर्मचारी को भी नहीं बख्शा, ₹10 हजार लेते एंटी करप्शन के हत्थे चढ़ा बाबू"

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨भ्रष्टाचार की ‘बलि’ चढ़ा विकास भवन का बाबू: अपनों ने ही बुना जाल, एंटी करप्शन ने रंगे हाथ दबोचा 🚨

🔥संत कबीर नगर में बड़ा ‘ट्रैप’: बाबू राजन कुमार का खेल खत्म, रिश्वत के रंग में रंगे हाथ”

🔥”रक्षक ही निकला भक्षक: विकास भवन में एंटी करप्शन की बड़ी कार्रवाई, बाबू गिरफ्तार”

🔥”साहब, अपनों ने ही लुटवाया! साथी की सैलरी ठीक करने के नाम पर मांग रहा था ‘कमीशन’, पहुंचा जेल”

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

संत कबीर नगर। भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका ताजा प्रमाण खलीलाबाद स्थित विकास भवन में देखने को मिला। यहाँ तैनात एक बाबू ने जब अपने ही विभाग के साथी को चूना लगाने की कोशिश की, तो उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसका ‘अपना’ ही उसकी विदाई का इंतजाम कर चुका है। बुधवार को एंटी करप्शन टीम ने विकास भवन के बाबू राजन कुमार को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

⭐वेतन विसंगति ठीक करने के नाम पर ‘वसूली’

मामला वेतन विसंगति से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि पंचायती राज विभाग के ही एक कर्मचारी की सैलरी से जुड़ी गड़बड़ी को ठीक करने के बदले बाबू राजन कुमार ने ₹30,000 की मोटी रकम की मांग की थी। पीड़ित कर्मचारी ने सिस्टम से लड़ने का मन बनाया और इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) से कर दी।

⭐सीडीओ की जांच और टीम का ‘ट्रैप’

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को जांच सौंपी गई थी। योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया और जैसे ही पीड़ित कर्मचारी ने बाबू राजन कुमार को रिश्वत की पहली किश्त के रूप में ₹10,000 थमाए, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी एंटी करप्शन की टीम ने उसे दबोच लिया। विकास भवन जैसे महत्वपूर्ण दफ्तर में हुई इस छापेमारी से अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

💫 जब विभाग का ही कर्मचारी न बचे, तो आम जनता का क्या?

यह घटना शासन के “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर सवालिया निशान लगाती है। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि एक बाबू अपने ही साथी कर्मचारी से काम के बदले पैसे मांग रहा था। अगर विकास भवन के भीतर कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें अपना हक पाने के लिए घूस देनी पड़ रही है, तो आम जनता की फाइलों का क्या हश्र होता होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

“विकास भवन अब भ्रष्टाचार का भवन बनता जा रहा है। राजन कुमार की गिरफ्तारी उन भ्रष्ट मानसकिता वाले बाबुओं के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो कलम की ताकत का इस्तेमाल जेब भरने के लिए करते हैं।”

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