
🚨सूचना के ‘दुश्मनों’ पर आयोग का हंटर: सिद्धार्थनगर के 4 अधिशासी अधिकारियों पर लगा भारी #जुर्माना🚨
⭐बेलगाम अफसरों पर चला सूचना आयोग का डंडा: सिद्धार्थनगर के चार निकायों के EO की उतरी ‘साहबी’
⭐भ्रष्टाचार छिपाना और आयोग की अनदेखी पड़ी भारी, सिद्धार्थनगर के 4 अधिकारियों को 25-25 हजार का दंड
⭐RTI को ‘जागीर’ समझने वाले अफसरों को झटका, आयोग ने ठोका 1 लाख का जुर्माना।
⭐बांसी, सिद्धार्थनगर, सोहरतगढ़ और उसका बाजार के EO पर गिरी गाज; वेतन कटेगा, CR पर भी दाग।
⭐ सूचना दबाने वाले सिद्धार्थनगर के 4 EO की जेब होगी ढीली, आयोग ने सुनाया कड़ा फैसला।
सिद्धार्थनगर: राज्य सूचना आयोग ने चार नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों पर लगाया ₹25,000-25,000 का अर्थदंड।
⭐RTI कानून की अवहेलना: समय पर सूचना न देने और नोटिस की अनदेखी पर सिद्धार्थनगर के 4 अधिकारियों पर कार्रवाई।
अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में जन सूचना अधिकार (RTI) कानून को अपनी जागीर समझने वाले और जनता को दफ्तरों के चक्कर कटवाने वाले बेलगाम अफसरों पर राज्य सूचना आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। सिद्धार्थनगर जिले के चार अधिशासी अधिकारियों (EO) की लापरवाही और हठधर्मिता पर कड़ा प्रहार करते हुए आयोग ने प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड ठोंक दिया है। यह जुर्माना सीधे तौर पर इन अधिकारियों के वेतन से वसूला जाएगा।
💫इन अधिकारियों की उतरी ‘साहबी’
राज्य सूचना आयोग के निशाने पर आए अधिकारियों में शामिल हैं:
👉EO, नगर पालिका परिषद बांसी
👉EO, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर
👉EO, नगर पंचायत सोहरतगढ़
👉EO, नगर पंचायत उसका बाजार
💫क्या है पूरा मामला?
बस्ती जनपद निवासी सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी ने इन चारों निकायों से RTI के तहत महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। लेकिन, खुद को कानून से ऊपर समझने वाले इन अधिकारियों ने न तो समय पर सूचना दी और न ही आयोग के नोटिसों को गंभीरता से लिया। आवेदक को महीनों तक मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
💫आयोग के आदेश का उड़ाया मखौल
सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त ने इन अधिकारियों को अपना पक्ष रखने और सूचना उपलब्ध कराने के कई अवसर दिए। सूत्र बताते हैं कि भ्रष्टाचार की परतों को दबाने के लिए इन अधिकारियों ने न केवल सूचना छिपाई, बल्कि आयोग की पेशी से भी नदारद रहे। अधिकारियों की इस कार्यशैली को ‘लोकतंत्र और कानून का माखौल’ मानते हुए आयोग ने सख्त रुख अख्तियार किया और कुल 1 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।
💫वेतन से कटौती और ‘CR’ पर दाग
आयोग के इस आदेश के बाद जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जुर्माने की यह राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटी जाएगी। सबसे बड़ी मार उनके चरित्र प्रविष्टि (CR) पर पड़ेगी, जहां इस दंड का उल्लेख उनके करियर के लिए भविष्य में रोड़ा बनेगा।
”यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता को जवाबदेह नहीं समझते और फाइलों को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा देते हैं।”



















