
अजीत मिश्रा (खोजी)
किसान यूरिया खाद के लिए भटक रहे:सजनाखोर देवमी समिति पर 275 रुपए में बिक रही यूरिया

बस्ती के बनकटी विकासखंड स्थित सजनाखोर देवमी साधन सहकारी समिति पर यूरिया खाद की भारी किल्लत देखी जा रही है। किसान सुबह 4 बजे से ही लाइन में लगकर खाद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दोपहर 12 बजे तक भी उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रही है।
अधिक मूल्य पर मिल रही निजी दुकानों पर यूरिया
बस्ती के क्षेत्रीय किसानों ने डीएपी खाद के लिए मेहनत करने के बाद गेहूं, दलहन और तिलहन की फसल की बुवाई की। अब वे यूरिया खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सरकारी गोदामों में खाद की कमी है, जिससे प्राइवेट दुकानदार मनमाने दाम पर यूरिया बेच रहे हैं। किसानों को 500 रुपये में एक बोरी यूरिया खरीदनी पड़ रही है।
बस्ती के सजनाखोर देवमी समिति पर यूरिया खाद की भारी किल्लत है, जिससे किसान सुबह से लाइन लगाकर भी खाद नहीं पा रहे और उन्हें मजबूरन बाज़ार में ₹275 या उससे ज़्यादा (₹400-₹500 तक) में ऊंचे दामों पर यूरिया खरीदनी पड़ रही है, जबकि निर्धारित मूल्य ₹266.50 है, जिससे किसान परेशान और आक्रोशित हैं।
समस्या के मुख्य बिंदु:
कमी और लंबी लाइनें: सहकारी समितियों में खाद की कमी है, किसान सुबह 4 बजे से लाइन में लगते हैं लेकिन दोपहर तक भी खाद नहीं मिल पाती।
कालाबाजारी: सरकारी समितियों में खाद न मिलने के कारण निजी दुकानदार मनमाने दामों (₹350-₹500) पर ब्लैक में यूरिया बेच रहे हैं।
तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें: फिंगरप्रिंट और खतौनी से जुड़ी समस्याओं के कारण भी किसान खाद से वंचित रह जा रहे हैं।
आक्रोश: किसान वितरण प्रणाली में खामियों और कालाबाजारी को लेकर नाराज़ हैं और प्रशासन से समाधान की मांग कर रहे हैं।
उदाहरण:
⭐ बनकटी ब्लॉक में सजनाखोर देवमी समिति पर किल्लत है, जहां किसान सुबह से इंतजार कर रहे हैं।
⭐ रुधौली क्षेत्र में भी खाद के लिए लंबी कतारें लगी हैं और प्राइवेट दुकानों पर ज़्यादा दाम वसूले जा रहे हैं।
⭐ एक किसान को कई दिनों की लाइन और धक्का-मुक्की के बाद भी खाद नहीं मिली, जिसपर ब्लॉक प्रमुख ने संज्ञान लिया।
यह स्थिति सरकारी वितरण प्रणाली में सुधार और उचित मूल्य पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है, ताकि किसानों को अपनी फसलों के लिए समय पर खाद मिल सके और वे कालाबाजारी से बच सकें।

















