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महाराष्ट्र मुंबई में हिंदी से इतनी नफरत क्यों? मनसे को हिंदी बोलने पर मारने पीटने का अधिकार किसने दिया है।फिर संविधान कहा है और अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ मनसे के लोगों को दिया गया है।

राज्य महाराष्ट्र में आप लोगों की कोई सुरक्षा मुहैया नहीं है। सरकार गूंगी बहरी अंधी हो चुकी है। आए दिन सबसे ज्यादा बोली समझने जाने वाली हिंदी भाषा को लेकर महाराष्ट्र में इतनी नफरत हो चुकी है कि आए दिन कही न कही किसी को हिंदी बोलने पर मारा पीटा जाता है। कुछ लोग जबरजस्ती मराठी भाषा बोलने का दबाव बनाते है। अगर वह बोल नही पाता तो खुलेआम उसको मारा पीटा जाता है। उसे प्रताड़ित किया जाता है। उसके मान सम्मान की गरिमा को भंग किया जाता है। मीरा रोड में बालाजी रेस्टोरेंट के पास एक दुकानदार को मराठी में न बोलने के कारण बुरी तरह से मनसे के लोगों ने मारा पीटा और प्रताड़ित किया उसकी गरिमा स्मिता और मानवाधिकार का हनन किया।

विजय कुमार भारद्वाज/मुंबई
महाराष्ट्र मुंबई में हिंदी से इतनी नफरत क्यों? मनसे को हिंदी बोलने पर मारने पीटने का अधिकार किसने दिया है।फिर संविधान कहा है और अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ मनसे के लोगों को दिया गया है।

मुंबई/ महाराष्ट्र: राज्य महाराष्ट्र में आप लोगों की कोई सुरक्षा मुहैया नहीं है। सरकार गूंगी बहरी अंधी हो चुकी है। आए दिन सबसे ज्यादा बोली समझने जाने वाली हिंदी भाषा को लेकर महाराष्ट्र में इतनी नफरत हो चुकी है कि आए दिन कही न कही किसी को हिंदी बोलने पर मारा पीटा जाता है। कुछ लोग जबरजस्ती मराठी भाषा बोलने का दबाव बनाते है। अगर वह बोल नही पाता तो खुलेआम उसको मारा पीटा जाता है। उसे प्रताड़ित किया जाता है। उसके मान सम्मान की गरिमा को भंग किया जाता है। मीरा रोड में बालाजी रेस्टोरेंट के पास एक दुकानदार को मराठी में न बोलने के कारण बुरी तरह से मनसे के लोगों ने मारा पीटा और प्रताड़ित किया उसकी गरिमा स्मिता और मानवाधिकार का हनन किया। ऐसे ही आए दिन कही न कही हिंदी बोलने वाले लोगों प्रताड़ित किया जा रहा है। मराठी भाषा बोलने के नाम पर जबकि दूसरे राज्यों से अपने रोजी रोटी के लिए कमाने महाराष्ट्र में आए लोग मराठी भाषा का सम्मान करते है। प्यार करते है। मराठी भाषा बोलना सीखना और समझना चाहते है। लेकिन कुछ लोग जबरजस्ती महाराष्ट्र को बदनाम कर माहौल खराब करना चाहते है। जबकि मुंबई में पूरा बॉलीवुड है। हिंदी फीचर फिल्म सांग्स एड एलबम शॉर्ट फिल्म वेब सीरीज, सब हिंदी प्रोजेक्ट्स बनते है। और बड़े बड़े हिंदी भाषा बोलने वाले कलाकार से लेकर प्रोडयूसर, डायरेक्टर, एक्टर, एडिटर, जर्नालिस्ट, राइटर , क्रिकेटर, सेलिब्रिटी और बिसेनमैन रहते है। आखिर किसकी नजर महाराष्ट्र को लग गई है। जो अलगाववादी जैसे बर्ताव कर महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति का भी नुकसान कर रहे है। सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए। क्या इससे महाराष्ट्र का फायदा होगा। अगर लोग प्रताड़ित, असहाय, असुरक्षित और अपने कारोबार में नुकसान होते देख महाराष्ट्र राज्य छोड़कर सुरक्षित जगह चले जाएंगे जहां पर सरकार अपने नागरिकों की सहायता सुविधा सुरक्षा और रोजगार को बढ़ावा देने में मदद करती है तो क्या महाराष्ट्र में शांति सुकून और आर्थिक स्थिति सही हो सकती हैं। अगर ऐसा है तो फिर ठीक है। नही तो महाराष्ट्र के आर्थिक स्थिति सही और जनता के हित में सोचे। लेकिन कुछ लोग जबरजस्ती अपनी राजनीतिक फायदे के लिए राजनीति करेंगे। यह कैसा नियम किसने बनाया है।जबरन किसी हिंदी भाषा बोलने वाले के साथ मराठी न बोलने पर दुर्व्यवहार किया जाता है।जैसे वह कोई आतंकवादी है। चोर है। कोई बड़ा गुनाह कर दिया है।लोग दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र के आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए कमाने आते है। और मराठी भाषा न बोल पाने पर उन्हें मारा पीटा जाता है। ऐसा लगता है मराठी भाषा न बोल पाना बहुत बड़ा गुनाह कर दिया है। जबकि काफी मराठी लोग खुद हिन्दी भाषा बोलते है। दूसरे राज्यों से आए लोग मराठी भाषा से प्रेम करते है। वो लोग मराठी भाषा सीखना चाहते है। लेकिन खुद मराठी भाषा बोलने वाले लोग खुद हिन्दी भाषा बोलते है तो वो लोग हिंदी भाषा में सबसे सरल और आसान भाषा समझ कर बात करते है। लेकिन कुछ लोग कभी किसी डिलीवरी बॉय को तो कभी किसी दुकानदार तो कभी किसी सोसायटी में कभी बैंक में जाकर मराठी भाषा बोलने के लिए जबरजस्ती दबाव डालते है। और मराठी न बोल पाए तो दे दना दन उसकी पिटाई शुरू कर देते है। अगर दूसरे राज्यों से आए लोगों को मराठी भाषा बोलने के लिए कहा जाता है तो पहले खुद मराठी बोलने वाले लोग हिंदी भाषा बोलने वाले लोगों के सामने हिंदी में न बोलकर मराठी भाषा में ही बात करें। जिससे उन्हें भी मराठी भाषा सीखने को मिलेगी और वो लोग भी कुछ महीनों में मराठी में बात करना शुरू कर देंगे। किसी को जबरजस्ती दबाव बनाकर मारपीटकर प्रताड़ित करना कहा का क़ानून और अधिकार है। आखिर ऐसा करने का ठेका किसने दिया है। क्या हिंदी भाषा में बात करना गुनाह हो चुका है। इसकी कॉपीराइट ले रखा गया है कि हिन्दी भाषा में कोई बात न करें। अगर मराठी भाषा बोलना ही जरूरी है तो लोगों से प्यार मान सम्मान से बात कर समझाए। और उनको बोलना सिखाए। लोग सीखेंगे समझेंगे तो जरूर बोलेंगे। हर कोई चाहता है। भाषा जितना ज्यादा सीखने समझने को मिले खुद को गर्व समझेंगे। लेकिन किसी को इतना जनहित में सहायता करने से क्या फायदा होने वाला है। लोगों को अपने अपने स्वार्थ और फायदे के लिए राजनीति की रोटियां सेकना है।खुले आम गुंडागर्दी करने और मारने पीटने का ठेका लिया है। जो मन में आए करे। सरकार शासन प्रशासन को ताक पर रखकर अपनी मनमानी करें और सरकार मूकदर्शक बनी रहे। यह सब लोग अपने अपने राजनीतिक दलों के लोग आप जनता में आकर ढोलक की तरह पीटकर चले जाते है। हमेशा जनता ऐसे लोगो के आगे लाचार कैसे हो जाती है। जबकि उन्हें पता है। चुनावों में कुकुरमुत्ते की तरह निकलकर उनके दरवाजे पर लालच देकर वोट की भीख मांगने पहुंच जाते है। ऐसे लोगों को मानव समाज से बाहर निकाल फेंक देना चाहिए। जिससे जिंदगी में कभी उनकी हिम्मत न हो किसी मजदूर मजबूर आम जनता को परेशान कर सके। ऐसे लोगों को मानव समाज में कोई जगह नही देनी चाहिए। जहां ऐसे अलगाववादी मानसिक के जनता के रक्षक की जगह भक्षक बने। और न ऐसी सरकार चुने जो अपंग नपुंसकता की शिकार हो। और लाचार मजबूर बौना हिजड़ा बनी सिर्फ ढिंढोरा पीटे। और आप लोगों का शोषण होते रहे। उनकी सुविधाओं और सुरक्षा मुहैया का कोई व्यवस्था न कर सके। सिर्फ भाषणबाजी और राजनैतिक दलों को लेकर नंगा नाच करती है। और जनता बेचारी मरती पिटती रहे। आखिर ऐसी समस्या का समाधान सरकार के पास है कि नही।

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