
अजीत मिश्रा (खोजी)
“गांजा गणराज्य” अयोध्या: मासूमों का भविष्य, अफसरों का ठिकाना।।
उत्तर प्रदेश
अयोध्या की धरती अब सिर्फ रामनगरी नहीं, गांजानगरी भी कहलाने लगी है। यहां नाबालिग बच्चों से गांजे का कारोबार करवाना अब नया “स्कूल प्रोजेक्ट” बन चुका है। हाजिरी लगाओ, गांजा बेचो और घर जाओ।प्रशासन का हाल यह है कि शायद वे खुद भी “ध्यानयोग” की नई परिभाषा खोज रहे हों— ध्यान गांजे पर, जिम्मेदारी से ध्यान हटाकर! पुलिस इतनी “संवेदनशील” है कि गांजे की गंध भी अगर आए तो नथुने बंद कर लेती है, रिपोर्ट नहीं लिखती। “संतोष जायसवाल” जैसे कारोबारी तो मानो स्थानीय विकास पुरुष बन चुके हैं* — जहां जाओ वहीं उनका सप्लाई नेटवर्क तैयार। और बच्चों का क्या…? देश का भविष्य हैं, तो देश का “नशा भविष्य” बनाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर डाल दी गई है।
सवाल बस इतना है —क्या प्रशासन तब जागेगा जब ये नाबालिग कल को “गांजा गुरु” बनकर उनके ही दफ्तरों के सामने दुकान खोल देंगे?















