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यूपी के क्षेत्राधिकारी ऋषिकांत शुक्ला 100 करोड़ की संपत्ति के मालिक

कानपुर पोस्टिंग के दौरान खड़ी की गई 100 करोड़ की कथित बेनामी संपत्ति

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। इनको मिलना चाहिए भारत के महान सपूत का दर्जा।।

🔥 ” यूपी के क्षेत्राधिकारी ऋषिकांत शुक्ला 100 करोड़ की संपत्ति के मालिक! हुए निलंबित..”

उत्तर प्रदेश पुलिस के सर्किल अधिकारी (सीओ) ऋषिकांत शुक्ला इन दिनों सुर्खियों में हैं, वजह है उनकी कानपुर पोस्टिंग के दौरान खड़ी की गई 100 करोड़ की कथित बेनामी संपत्ति। आरोप है कि शुक्ला ने अपने परिवार, साझेदारों और भरोसेमंद लोगों के नाम पर करोड़ों रुपये की जमीन, दुकानें और अन्य संपत्तियां खड़ी कीं। SIT जांच में खुलासा हुआ है कि उनकी ज्यादातर संपत्ति बेनामी निवेश के ज़रिए बनाई गई है। बताया जाता है कि ऋषिकांत शुक्ला ने साल 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस में दारोगा के पद पर नौकरी शुरू की थी। लेकिन उनकी असली “तरक्की” हुई कानपुर में, जहां वे लगभग दस साल तक लगातार तैनात रहे। पहले 1998 से 2006 तक और फिर 2006 से 2009 तक। इतनी लंबी पोस्टिंग और इतनी बड़ी संपत्ति ने अब पूरे महकमे में भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी ऋषिकांत शुक्ला की नजदीकियां कानपुर में तैनाती के दौरान एक स्थानीय कारोबारी अखिलेश दुबे से बढ़ीं। यह वही व्यक्ति है, जिस पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने, वसूली और जमीन कब्जाने जैसे संगठित अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। SIT की रिपोर्ट बताती है कि दुबे ने शहर में एक मजबूत नेटवर्क बना रखा था, जिसमें कुछ पुलिस कर्मियों, केडीए और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी भी उसकी मदद करते थे। यही नेटवर्क सालों तक कानपुर में दबदबा बनाए रखने और अवैध कमाई के खेल को चलाने में कामयाब रहा। 

SIT जांच में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी ऋषिकांत शुक्ला ने कानपुर के आर्यनगर इलाके में 11 दुकानें खरीदीं, जो उनके करीबी सहयोगी देवेंद्र दुबे के नाम पर दर्ज हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये सभी बेनामी संपत्तियां हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शुक्ला और उनके परिवार से जुड़ी कुल 12 बड़ी संपत्तियों की बाजार कीमत लगभग 92 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि तीन अन्य संपत्तियों के दस्तावेज अभी तक जांच टीम को नहीं मिल सके हैं। एसआईटी ने साफ तौर पर कहा है कि शुक्ला की घोषित आय और असली संपत्ति के बीच गहरा अंतर है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी आधिकारिक आय के स्रोतों से इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करना किसी भी तरह संभव नहीं लगता, जिससे यह मामला और ज्यादा संदिग्ध हो गया है।    

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब सख्ती का रुख अपना लिया है। अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) ने, डीजीपी की मंजूरी के बाद, सीओ ऋषिकांत शुक्ला के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। माना जा रहा है कि जांच में दोष साबित होने पर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शुक्ला मैनपुरी जिले में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर तैनात हैं, लेकिन विभागीय हलकों में यह चर्चा तेज है कि अगर जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा के सबसे बड़े घोटालों में से एक बन सकता है।

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