
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बस्ती नगर पालिका की तानाशाही: हाउस व वाटर टैक्स में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश।।
बुधवार 14 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बस्ती। नगर पालिका परिषद बस्ती द्वारा शहरवासियों पर मनमाने ढंग से थोपे गए भारी-भरकम हाउस टैक्स और वाटर टैक्स के खिलाफ अब जन-आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। नगर पालिका प्रशासन ने बिना किसी ठोस आधार और जन-सुनवाई के टैक्स की दरों में जो वृद्धि की है, उसे जनता ने “आर्थिक शोषण” करार दिया है।
पुराने बिलों से मिलान करें, खुल जाएगी पोल
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और भवन स्वामियों का कहना है कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार का टैक्स बिल कई गुना बढ़ाकर भेजा जा रहा है। सभी भवन स्वामियों से अपील है कि वे अपने पुराने हाउस टैक्स और वाटर टैक्स के बिलों का नए बिल से मिलान अवश्य करें। यह मिलान आपको हैरान कर देगा कि किस प्रकार चोरी-छिपे आपकी जेब पर डाका डालने की तैयारी की गई है। प्रतिशत के आधार पर की गई यह वृद्धि न तो न्यायसंगत है और न ही व्यवहारिक।
न्यायालय की शरण में जनता: न लें बिल, न करें भुगतान
नगर पालिका की इस मनमानी के खिलाफ जिलाधिकारी बस्ती के न्यायालय में अपील दायर की जा चुकी है। जब मामला विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
शहरवासियों से विशेष अनुरोध:
नगर पालिका द्वारा भेजे जा रहे नए टैक्स बिलों को प्राप्त न करें।
बढ़े हुए टैक्स का एक भी पैसा जमा न करें।
प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए एकजुट रहें और इस तानाशाही का शांतिपूर्ण विरोध करें।
नगर पालिका से तीखे सवाल
जनता पूछना चाहती है कि क्या सुविधाओं के नाम पर शहर को नरक में तब्दील करने के बदले यह टैक्स मांगा जा रहा है? टूटी सड़कें, बजबजाती नालियां और गंदगी के अंबार के बीच टैक्स में यह भारी वृद्धि जनता के साथ भद्दा मजाक है। प्रशासन को यह समझ लेना चाहिए कि बस्ती की जनता जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानती है।
जब तक न्यायालय का फैसला नहीं आता और टैक्स की दरों को जनहित में संशोधित नहीं किया जाता, तब तक यह असहयोग आंदोलन जारी रहेगा।














