
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। यूपी पुलिस में तबादला नीति सख्त: 2019 के बाद भर्ती कर्मियों के लिए बदले नियम।।
लखनऊ।। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण और मुख्यालय में उपस्थिति को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय द्वारा जारी इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना और प्रशासनिक कार्यों में होने वाले अनावश्यक विलंब को रोकना है।
2019 के बाद भर्ती कर्मियों पर ‘कपल केस’ की शर्त
मुख्यालय के आदेश के अनुसार, अब वर्ष 2019 तक भर्ती हुए उप-निरीक्षकों (SI) और आरक्षियों (Constables) के स्थानांतरण पर ही सामान्य आधार पर विचार किया जाएगा। 2019 के बाद भर्ती हुए पुलिसकर्मियों के लिए नियम कड़ा कर दिया गया है। अब इस श्रेणी के केवल उन्हीं कर्मियों के तबादले पर विचार होगा जो ‘कपल केस’ के अंतर्गत आते हैं (यानी पति और पत्नी दोनों ही यूपी पुलिस विभाग में कार्यरत हों)।
गृह जनपद और सीमावर्ती जिलों में तैनाती नहीं
स्थानांतरण नीति 2017 और पूर्व के शासनादेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि:
किसी भी निरीक्षक या उप-निरीक्षक को उनके गृह परिक्षेत्र (Range) या गृह जनपद में नियुक्त नहीं किया जाएगा।
आरक्षियों को उनके गृह जनपद या उसके सीमावर्ती (Border) जिलों में तैनाती नहीं दी जाएगी।
मुख्यालय आने पर पाबंदी और कड़े निर्देश
अक्सर देखा गया है कि पुलिसकर्मी बिना अनुमति या बिना पूर्ण विवरण के मुख्यालय पहुंच जाते हैं, जिससे निर्णय लेने में देरी होती है। नए निर्देशों के तहत:
2019 के बाद भर्ती सामान्य कर्मियों को मुख्यालय आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
केवल ‘कपल केस’ वाले कर्मियों को ही विशेष परिस्थिति में अनुमति मिलेगी।
मुख्यालय आने के लिए अनुमति पत्र के साथ ‘पूर्ण अद्यतन सेवा विवरण’ (Updated Service Record) संलग्न करना अनिवार्य होगा।
यदि कोई कर्मी यातायात व्यवस्था, यूपी-112, या वीआईपी सुरक्षा (माननीय मुख्यमंत्री/न्यायाधीश) में तैनात है, तो इसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
विभाग का मानना है कि रिक्तियों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जनपदों में पुलिस बल की मौजूदगी अनिवार्य है। बेवजह मुख्यालय के चक्कर काटने से फील्ड का कार्य प्रभावित होता है। साथ ही, सेवा विवरण के अभाव में फाइलों का निस्तारण समय पर नहीं हो पाता था, जिसे अब अनिवार्य कर दिया गया है।
केवल ‘कपल केस’ वालों को ही मिलेगी 2019 के बाद राहत
मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभाग में रिक्तियों और कानून व्यवस्था के दबाव को देखते हुए स्थानांतरण की नीति को दो हिस्सों में बांटा गया है:
2019 तक के भर्ती कर्मी: वर्ष 2019 बैच तक के उप-निरीक्षक और आरक्षी सामान्य अनुकम्पा के आधार पर तबादले की अर्जी दे सकेंगे।
2019 के बाद के भर्ती कर्मी: इस श्रेणी में केवल उन्हीं पुलिसकर्मियों के प्रार्थना पत्रों पर विचार किया जाएगा जिनके जीवनसाथी (पति/पत्नी) भी यूपी पुलिस विभाग में ही कार्यरत हैं। सामान्य आधार पर होने वाले तबादलों के लिए नए भर्ती कर्मियों को फिलहाल पात्र नहीं माना गया है।
गृह जनपद और सीमावर्ती जिलों पर ‘नो एंट्री’
स्थानांतरण नीति 2017 का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए मुख्यालय ने साफ किया है कि ‘कपल केस’ के तहत भी नियमों की अनदेखी नहीं होगी:
निरीक्षक/उप-निरीक्षक: इन्हें न तो गृह जनपद मिलेगा और न ही वह रेंज (परिक्षेत्र) जहाँ उनका घर है।
आरक्षी: सिपाहियों को उनके गृह जनपद और उनके गृह जनपद की सीमा से सटे किसी भी जिले (Border Districts) में तैनात नहीं किया जाएगा।
तबादला केवल उन्हीं जिलों में संभव होगा जो इन श्रेणियों से बाहर हों, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।
आवेदन के लिए ‘सर्विस रिकॉर्ड’ अनिवार्य
अब तबादले के लिए केवल प्रार्थना पत्र देना पर्याप्त नहीं होगा। विभाग ने ‘कपल केस’ के अंतर्गत आवेदन करने वालों के लिए निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य कर दिए हैं:
पति और पत्नी दोनों के पुलिस पहचान पत्र की स्पष्ट फोटोकॉपी।
कर्मी का पूर्ण अद्यतन सेवा विवरण (Service Record)।
यदि कर्मी यूपी-112, वीआईपी सुरक्षा या यातायात ड्यूटी में तैनात है, तो इसका स्पष्ट विवरण।
मुख्यालय की सीधी चेतावनी
आदेश में कड़े लहजे में कहा गया है कि बिना अनुमति या अधूरे दस्तावेजों के साथ मुख्यालय आने वाले पुलिसकर्मियों के कारण निर्णय लेने में अनावश्यक देरी होती है। अब केवल उन्हीं कर्मियों को मुख्यालय में उपस्थिति की अनुमति दी जाएगी जिनके पास उचित अनुमति पत्र और पूर्ण सेवा विवरण होगा। 2019 के बाद भर्ती सामान्य कर्मियों को मुख्यालय आने की अनुमति नहीं देने के निर्देश भी दिए गए हैं।














