उत्तर प्रदेशगोरखपुरबस्तीलखनऊसिद्धार्थनगर 

“अमिताभ ठाकुर को जेल में ‘डेथ वारंट’: क्या सरकारी संरक्षण में पल रहे हैं अपराधी?”

"जेल की दीवारें या मौत का जाल? देवरिया जेल में पूर्व IPS की हत्या की साजिश!"

अजीत मिश्रा (खोजी)

देवरिया जेल का ‘डेथ वारंट’: क्या यूपी की जेलें अब कत्लगाह बन गई हैं?

शनिवार 17 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

देवरिया।। उत्तर प्रदेश की जेलों से अक्सर अपराध के संचालन की खबरें आती थीं, लेकिन देवरिया जिला कारागार में पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर के साथ जो हुआ, उसने सरकार के ‘कानून के राज’ के दावों की बखिया उधेड़ कर रख दी है। जेल के भीतर कंप्यूटर से टाइप किया हुआ धमकी भरा पत्र और पत्थर मिलना महज एक ‘चूक’ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश की बू देता है।

💫सत्ता के संरक्षण में ‘सिस्टम’ का सरेंडर?

सोचने वाली बात यह है कि जेल के उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में, जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहाँ कंप्यूटर और प्रिंटर का उपयोग कर धमकी भरा पत्र (जिस पर लिखा है- “जान से मार देंगे…”) कौन तैयार कर रहा है? क्या जेल प्रशासन ने अपनी चाबियाँ और ज़मीर, दोनों अपराधियों को सौंप दिए हैं?

💫प्रमुख कानूनी सवाल:

जेल मैनुअल का उल्लंघन: उत्तर प्रदेश जेल नियमावली (UP Jail Manual) के तहत प्रत्येक कैदी की सुरक्षा की जिम्मेदारी जेल अधीक्षक की होती है। क्या इस मामले में जेल प्रशासन पर धारा 166 (लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा) के तहत कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?

मानवाधिकारों का हनन: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ‘सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन’ मामले में स्पष्ट कहा था कि कैदी के भी मौलिक अधिकार होते हैं। क्या अमिताभ ठाकुर को सुरक्षा न दे पाना अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का सीधा उल्लंघन नहीं है?

💫’पॉलिसी’ और ‘प्रशासन’ के बीच का दोहरापन

एक तरफ सरकार अपराधियों के खात्मे की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसे व्यक्ति को जेल के भीतर जान का खतरा पैदा हो गया है जो खुद सिस्टम का हिस्सा रहा है। यदि एक पूर्व पुलिस अधिकारी, जिसके पास कानून की समझ है, वह जेल में ‘असुरक्षित और भयभीत’ महसूस कर रहा है, तो यह प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए ‘इमरजेंसी’ जैसे हालात हैं।

यह घटना सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के गृह विभाग की विफलता है। क्या जेल की दीवारें अब विरोधियों को खामोश करने का नया हथियार बन गई हैं?

सरकार को केवल जांच का ढोंग नहीं करना चाहिए, बल्कि:देवरिया जेल के उन अधिकारियों को तुरंत निलंबित करना चाहिए जिनकी निगरानी में यह ‘धमकी भरा पत्र’ टाइप हुआ।जेल के भीतर के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाए।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय को इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक विचाराधीन कैदी की हत्या की साजिश का मामला प्रतीत होता है।

अमिताभ ठाकुर की सुरक्षा में की गई लापरवाही कल किसी और के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सरकार की चुप्पी यह साबित कर देगी कि ‘सुशासन’ सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित है।

[yop_poll id="10"]
Show More
Back to top button
error: Content is protected !!