
कटनी, रीठी ।। GANESH UPADHYAY VANDE BHARAT LIVE TV NEWS KATNI MP.
सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा है। गांव-गांव रोजगार देने के दावों की हकीकत इन दिनों रीठी रेलवे स्टेशन पर लगी मजदूरों की भीड़ बयां कर रही है। यहां मजदूरों का कुंभ नजर आ रहा है। एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों गांवों से हजारों मजबूर मजदूर गांव-घर छोडकऱ परिवार सहित पलायन कर पहुंचे है। श्रमिकों की संख्या इतनी अधिक है कि रोजाना चलने वाली ट्रेनों से आवागमन करना मुश्किल हो रहा है। 
जानकारी के अनुसार रीठी रेलवे स्टेशन में हजारों की संख्या में श्रमिक रीठी सहित पड़ोसी जिला पन्ना व दमोह से से पहुंचे है। रीठी निवासी सुखचेन बताते है कि गांव में इन दिनों रोजगार नहीं मिल रहा है। रोजगार मिलता है तो 200 से 300 रुपए मजदूरी मिलती है। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण मुश्किल से हो पाता है। मजबूरीवश घरों में ताला बंद कर काम की तलाश में जा रहे है। इन मजदूरों के साथ उनका परिवार भी है, जिनमें छोटे-बड़े बच्चे और घर के बड़े-बुजुर्ग शामिल है। मजदूर फूलचंद बताते है कि बड़ों को काम मिल जाता है इसलिए सभी जा रहे है।
फसलों की कटाई के लिए जा रहे
जानकारी के अनुसार हजारों की संख्या में ये मजदूर सागर, खुरई, बीना आदि क्षेत्र में जाकर फसलों की कटाई करने के लिए पहुंचते हैं। दो माह तक यहां पर फसलों की कटाई करके भरण पोषण के लिए राशि जुटाते हैं। 2 महीने के बाद गेहूं की कटाई कर अपने-अपने गांव मजदूर आ जाते हैं।
गांव में 150, बाहर 350 रुपए मजदूरी
रीठी रेलवे स्टेशन में ट्रेन का इंतजार कर रहे मजदूरों ने चर्चा के दौरान बताया कि गांव में सरकारी योजना में रोजगार नहीं मिलता। आसपास काम पर भी जाएं तो 150 से 200 रुपए मिलता है लेकिन कटाई के काम में 350 रुपए प्रतिदिन मिल जाता है। पूरे महीने काम मिलता है, जिससे कुछ पैसा बचत में भी जमा रहता है। पत्नी और बच्चों को साथ लेकर जाते है, जिससे परिवार की चिंता नहीं रहती।
बेटियां छोड़ देती है पढ़ाई
मजदूरों के बीच बड़ी संख्या में किशोरियां भी है, जो सर पर बोझा रखकर स्टेशन में प्रवेश करते नजर आईं। पूछने पर आदिवासी बच्चियों ने बताया कि बताती है कि आठवीं तक पढ़ाई की है लेकिन अब स्कूल नहीं जाती। माता-पिता के साथ खेत पर तो कई बार बाहर इसी तरह मजदूरी करने जाती हैं। अधिकांश बलिकाएं यहां कक्षा पांच व आठ तक पढ़ी हुई है, ऐसा बताया गया।
प्लेटफार्म पर डेरा, यहीं पका रहे भोजन*l
गंतव्य तक जाने के लिए मजदूरों को ट्रेनें भी मिलना मुश्किल हो रहा है। रीठी स्टेशन में दो से तीन दिनों से कई मजदूर परिवार सहित डेरा डाले हुए हैं। प्लेटफार्म में खाना बना-खा रहे हैं। एक-दो ट्रेन आने पर चढऩे का प्रयास करते हैं, नहीं चढ़ पाते तो फिर डेरा डाल लेते हैं।
बोझा लिए खड़े रहते हैं मजदूर
प्लटफॅार्म पर जैसे ही ट्रेन आने का अलाउंसमेंट होता है कि सागर-बीना की ओर जाने के लिए कोई ट्रेन आ रही है तो मजदूर डेरे का बोल झेलकर 15 मिनट पहले से ही खड़े हो जाते हैं। सवार होने खूब जद्दोजहद करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही।कई ट्रेनों में यात्री ठूंस-ठूंसकर भर जाते है तब ट्रेन को रवाना किया जा रहा है।


