
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। मिल्कीपुर तहसील: ‘कागजों’ की नहीं, ‘गांधी’ की चलती है कलम।।
अयोध्या, उत्तर प्रदेश।
मिल्कीपुर (अयोध्या)। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और शासन के बीच की कड़ी कहे जाने वाले राजस्व विभाग की साख आज मिल्कीपुर तहसील में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। तहसील का हाल यह है कि यहाँ आम आदमी का वाजिब काम भी बिना ‘सुविधा शुल्क’ के फाइलों की धूल फांकता रहता है। ताजा मामला एक लेखपाल के कथित वीडियो वायरल होने का है, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहाँ नियम-कानून नहीं, बल्कि रिश्वत की रसीदें चलती हैं।
💫वायरल वीडियो: भ्रष्टाचार का “डिजिटल” प्रमाण?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो महज एक लेखपाल की निजी संलिप्तता का मामला नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की सड़ांध है जो ऊपर से नीचे तक व्याप्त है। वीडियो में जिस तरह से बेखौफ होकर लेनदेन की बातें हो रही हैं, वह दर्शाता है कि भ्रष्टाचारियों के मन से प्रशासन और कानून का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
💫पुरानी रवायत, नया कलेवर
मिल्कीपुर तहसील और एंटी करप्शन टीम का पुराना नाता रहा है। पहले भी कई ‘सफेदपोश’ कर्मचारी सलाखों के पीछे जा चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जेल जाने और निलंबन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा है? अगर पुरानी कार्रवाइयों से कोई सबक लिया गया होता, तो आज फिर एक नया वीडियो जनता के बीच चर्चा का विषय न बनता। यहाँ लेखपालों की कार्यशैली देखकर लगता है कि वे जनता के सेवक नहीं, बल्कि किसी रियासत के वसूली एजेंट हैं।
💫सिस्टम की लाचारी या मौन सहमति?
जब एक गरीब किसान अपनी जमीन की पैमाइश या वरासत के लिए तहसील के चक्कर काटता है, तो उसे नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। लेकिन जैसे ही ‘रिश्वत’ की मेज सजती है, सारे नियम किनारे हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील परिसर में बिचौलियों और कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों का ऐसा मकड़जाल है जिसे तोड़ना नामुमकिन सा लगता है।
“क्या भ्रष्टाचार ही अब नया प्रोटोकॉल है? यदि वीडियो सार्वजनिक होने के बाद भी केवल ‘जांच’ का आश्वासन दिया जाएगा, तो यह ईमानदार जनता के साथ भद्दा मजाक होगा।”
💫उपजिलाधिकारी की निष्ठा की अग्निपरीक्षा
अब सबकी निगाहें उपजिलाधिकारी (SDM) सुधीर कुमार पर टिकी हैं। क्या वे इस वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर कोई ऐसी मिसाल पेश करेंगे जिससे भविष्य में कोई कर्मचारी रिश्वत लेने से पहले सौ बार सोचे? या फिर यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?
मिल्कीपुर की जनता अब कोरे आश्वासनों से ऊब चुकी है। उसे ‘जांच’ नहीं, ‘कार्रवाई’ चाहिए। यदि प्रशासन इस बार भी नाकाम रहा, तो सरकारी कार्यालयों से आम आदमी का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का यही सही समय है, वरना तहसीलें केवल शोषण के केंद्र बनकर रह जाएंगी।














