
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: सस्पेंड कर्मचारी की ‘दबंगई’ और सिस्टम की चुप्पी—आखिर किसे बचा रही है कुदरहा की व्यवस्था?
उत्तर प्रदेश।
बस्ती ।। क्या सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाना अब एक फैशन बन गया है? कुदरहा ब्लॉक के रैनिया ग्राम पंचायत का निलंबित सफाईकर्मी शेषराम चौधरी उर्फ ‘भोलू’ इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि यदि सिस्टम की मेहरबानी हो, तो निलंबन भी एक ‘पुरस्कार’ जैसा लगता है।
💫जब निलंबन ही मजाक बन जाए
डीपीआरओ द्वारा लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किए जाने के बाद सामान्यतः कर्मचारी की जवाबदेही बढ़ती है, लेकिन भोलू की कहानी अलग है। उसे तो जैसे निलंबन के बाद और भी ‘आजादी’ मिल गई है। नियमों को ताक पर रखकर, यह निलंबित कर्मचारी न केवल अपनी ड्यूटी से नदारद है, बल्कि जिले भर में बेखौफ घूम रहा है।
💫ब्लॉक कार्यालय या ‘टी-स्टॉल’?
कुदरहा ब्लॉक में भोलू का आगमन किसी प्रशासनिक कार्य के लिए नहीं, बल्कि मात्र औपचारिकता निभाने के लिए होता है। सूत्रों की मानें तो वह ब्लॉक कार्यालय में बड़े इत्मीनान से चाय-नाश्ता करता है और फिर गायब हो जाता है। सवाल यह है कि एक सस्पेंड कर्मचारी का सरकारी परिसर में यह ‘अवैध डेरा’ किसके इशारे पर चल रहा है? क्या ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी अंधे हैं, या फिर उन्हें यह सब नजरअंदाज करने का हुक्म ऊपर से मिला है?
💫संरक्षण का खेल या मिलीभगत?
स्थानीय गलियारों में एक ही चर्चा आम है—आखिर इस बेखौफ दबंगई के पीछे किसका हाथ है? चर्चाओं का बाजार इस बात से भी गर्म है कि सहायक खंड विकास अधिकारी (ADEO) नंदलाल का इसे पूरा संरक्षण प्राप्त है। यदि यह सच है, तो यह महज एक कर्मचारी की लापरवाही नहीं, बल्कि विभाग के भीतर व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार का नग्न प्रदर्शन है।
💫प्रशासन की ‘आंखों में धूल’
जिला प्रशासन और डीपीआरओ की कार्रवाई के बावजूद, कर्मचारी के अंदर न कोई डर है और न ही पछतावा। यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है:
👉क्या प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?
👉क्या किसी ‘बड़े’ का संरक्षण भोलू को कानून से ऊपर बना देता है?
👉आखिर कब तक जनता के टैक्स के पैसे पर पलने वाले ये ‘बाहुबली’ कर्मचारी सिस्टम का मजाक उड़ाते रहेंगे?
💫अब क्या?
बस्ती की जनता पूछ रही है कि क्या कुदरहा ब्लॉक में कोई ऐसा अधिकारी है जो नियमों का पालन करवा सके? यदि भोलू पर अविलंब सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कुदरहा ब्लॉक में ‘सुशासन’ नहीं, बल्कि ‘संरक्षण’ का राज चल रहा है।
प्रशासन को अब जागना होगा, वरना जनता का भरोसा सिस्टम से पूरी तरह उठ जाएगा।























