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CG.वन विभाग की बोलेरो और ट्रक में भीषण टक्कर, फॉरेस्ट रेंजर की मौत, आठ लोगों की हालत गंभीर

वन विभाग की बोलेरो और ट्रक में भीषण टक्कर, फॉरेस्ट रेंजर की मौत, आठ लोगों की हालत गंभीर

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में बुधवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। वन विभाग देवभोग की शासकीय बोलेरो और एक तेज रफ्तार ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत में वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) अश्वनी दास मुरचुलिया की मौत हो गई। वहीं वाहन चालक सहित कुल 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह घटना ध्रुवागुड़ी और बुढघेलटप्पा के बीच हुई।

जानकारी के मुताबिक बोलेरो में कुल 9 लोग सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि वन विभाग के बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोगों, प्रशासनिक अमला और सुरक्षा बल के जवानों ने राहत कार्य शुरू किया। सभी घायलों को तत्काल देवभोग अस्पताल पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार रेंजर अश्वनी दास मुरचुलिया को सबसे अधिक चोटें आई, जिसके कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। अन्य 8 घायलों का उपचार जारी है। हादसे के बाद कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात प्रभावित रहा। सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू की। वहीं मृतक रेंजर अश्विनी दास के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इस घटना से वन विभाग और पूरे इलाके में शोक की लहर है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

सड़क किनारे मुरुम की जगह मिट्टी डालने से हो रहे हादसे
NH 130 पर बुढ़गेलटप्पा के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच और स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क के चौड़ीकरण या मरम्मत के दौरान नियमों को ताक पर रखकर मुरुम की जगह घटिया मिट्टी डाली गई है।​ अक्सर निर्माण कार्यों के दौरान सड़कों के किनारे मजबूत पकड़ और वाहनों के फिसलने से बचाव के लिए मुरुम (लाल कंकरीट मिट्टी) का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके विपरीत, चिकनी और पिलपिली मिट्टी डालने से हल्की सी बारिश या वाहनों के टर्निंग के दौरान टायर फिसलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि सड़क किनारे फैली यही चिकनी मिट्टी इस भीषण टक्कर और गाड़ी बेकाबू होने का एक बड़ा कारण है।

​सड़क किनारे मिट्टी डालने के दुष्परिणाम
​टायरों की ग्रिप खत्म होना: बारिश या नमी के संपर्क में आते ही यह मिट्टी कीचड़ बन जाती है, जिससे वाहनों के पहिए अपनी पकड़ खो देते हैं।
​मोड़ (टर्निंग्स) पर जानलेवा खतरा: तीखे मोड़ों पर वाहन मुड़ते समय जैसे ही पटरी से उतरकर किनारे की मिट्टी पर जाते हैं, ड्राइवर का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
​जिम्मेदारों की अनदेखी: ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की यह लापरवाही आए दिन बेकसूर लोगों की जान ले रही है।

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CHANDRABHAN YADAW

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