छग. प्रदेश में निजी स्कूल संस्थान शुरू करने और उनकी मानयता को लेकर अब नियम बदल गए हैं

प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ प्रदेश में अब निजी स्कूल खोलने शुरू करने और स्कूल की मान्यता को लेकर नियम बदल दिए गए हैं। प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से 07 सितंबर 2026 को इसको लेकर नई गाइडलाइन जारी किया गया है, यह नियम एकेडमिक सेशन 2026-27, से लागू किए जायेंगे ।
छत्तीसगढ प्रदेश सरकार ने जून 2026 के नोटिफिकेशन के बाद अब यह ने नियम बनाए हैं। गाइडलाइन के अनुसार निजी स्कूल संचालकों को राहत मिल सकती है।
जानकारी अनुसार अब निजी स्कूल की मानयता प्राप्ति के लिए सेल्फ सर्टिफिकेट देना होगा, जिसमें यह निजी स्कूल को यह यह जानकारी देना होगा कि स्कूल की ईमारत सुरक्षित है, इसमें लैब, लाइब्रेरी , और खेल के मैदान की आदि की सुविधा है, स्कूल के शिक्षक, स्टाफ क्वालिफाइड हैं, और स्कूल के बच्चों की सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक इंतजाम भी किए गए हैं। और यदि दी गई सेल्फ सर्टिफिकेशन में कोई गलत जानाकारी दी गई हो तो स्कूल की मानयता पर पाबंदी या रद्द भी किया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है ।
गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि स्कूल के क्लासरूम में अब एक रूम में अधिकतम 45 बच्चो को ही बैठाया जा सकता है। छत्तीसगढ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा निजी स्कूल के लिए बदले गए नियम मे बड़ा बदलाव यह है कि अब स्कूल खोलने के लिए अनिवार्यता प्रमाण पत्र/ एजेंसियलिटी सर्टिफिकेट नहीं लेना होगा, निजी स्कूल को यह बतलाना होगा कि उनके पास स्कूल चलाने के लिए स्टाफ और स्टाफ को वेतन आदि देने के लिए पर्याप्त आर्थिक व्यवस्था है।
जानकारी अनुसार स्कूल को हर शिक्षा सत्र समाप्त होने के तीन महीनें के अंदर ही अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा करना होगा। प्राप्त जानकारी अनुसार स्कूल की नई मानयता के लिए अब पूरी विधि आनलाईन होगा, स्कूल के ऑथराइज्ड अधिकारी को शिक्षा मंडल के आधिकारिक पोर्टल पर फार्म भरना होगा, और फीस भी आनलाईन माध्यम से जमा करना होगा।
एक ही समय पर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक की मानयता नहीं मिलेगी ,इसके लिए पहले हाई स्कूल की मान्यता लेनी पड़ेगी , इसके बाद ही हायर सेकंडरी की मानयता के लिए आवेदन किया जा सकता है । प्राप्त जानकारी अनुसार नई स्कूल के लिए मानयता के लिए दो साल पहले ही 15 अप्रैल तक आवेदन देना होगा, विलंब के साथ 31 जुलाई तक आवेदन दिया जा सकता है।
नवीनीकरण के लिए 31 दिसंबर तक सामान्य शुक्ल के साथ आवेदन देना होगा ,जानकारी अनुसार इसके बाद 28 फरवरी तक विलंब शुल्क (4,000रू), लगेगा, 28 फरवरी के बाद हर दिन 100 रूपय अतिरिक्त फीस देना होगा। प्राप्त जानकारी अनुसार हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी के लिए विलंब शुल्क अलग अलग लगेगा।
प्राप्त जानकारी अनुसार जिन निजी स्कूलों के पास शिक्षा मंडल की मानयता नहीं है, वह कक्षा नवमीं से लेकर कक्षा बारहवीं तक क्लास नहीं चला सकेंगे । यदि किसी स्कूल की मान्यता रद्द हो जाती है तो फिर वहां अध्ययनरत बच्चों को किसी नजदीकी सरकारी स्कूल में शिफ्ट किया जा सकता है।शिक्षा मंडल की नई गाइडलाइन में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के लिए भी नियम अब सख्त कर लिए गए हैं।
यदि कोई स्कूल हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही माध्यम से चलाना चाहतें हैं तो दोनों के लिए स्कूल की जमीन, ईमारत, प्राचार्य और स्कूल स्टाफ अलग अलग रखना होगा। जानकारी अनुसार एक ही ईमारत में दो अलग अलग बोर्ड भी नहीं चलाए जा सकेंगे।
यदि कोई स्कूल अंग्रेजी माध्यम शुरू करना चाहता है तो इसके लिए उसे नया नया स्कूल मानते हुए नई मानयता भी लेनी होगी। अंग्रेजी माध्यम में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक के पास अंग्रेजी माध्यम पढ़ाने का प्रमाण पत्र भी होना आवश्यक रहेगा।
नई गाइडलाइन में स्कूल की जमीन, स्कूल संचालक के नाम प पर होना जरूरी है, इसके अतिरिक्त कम से कम तीन साल का किराए का अनुबंध या रजिस्टर्ड लीज भी मान्य होगा। स्कूल की जमीन का बी-1, खसरा, सिविल इंजिनियर द्वारा तैयार बिल्डिंग नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत से सर्टिफाइड भी होना चाहिए।
बिल्डिंग के नक्शे में पूरी बिल्डिंग और प्रत्येक कमरे को अलग अलग दिखाना होगा। स्कूल के शुरुआत में उनके पास खुद की जमीन नहीं है, तो फिर जमीन खरीदने और उस पर बिल्डिंग बनाने का वर्क प्लान देना होगा, और इस प्लान को तीन साल में पूरा भी करना होगा ऐसा नहीं करने पर चौंथे साल में जुर्माना लग सकता है।
जानकारी अनुसार स्कूल में पढ़ने वालों बच्चों के लिए खेल , प्रेयर, और पार्किंग की खुली जगह भी रखना जरूरी होगा। कृषि संकाय पढ़ाने वाले स्कूलों में प्रैक्टिकल के लिए कृषि जमीन भी जरूरी होगा।
मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट भी आवश्यक होगा। शिक्षा मंडल की नई गाइडलाइन के अनुसार क्लासरूम कम से कम तीन सौ स्क्वायर फीट का होना चाहिए, एक रूम में अधिकतम 45 बच्चों को ही बैठाया जा सकेगा ।
हाईस्कूल के लिए कम से कम सात क्लासरूम होना जरूरी है, हायर सेकेंडरी में चुने गए संकाय के हिसाब से अतिरिक्त कमरे भी रखने होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक बिल्डिंग में एक ही शिफ्ट चलाया जा सकेगा और स्कूल की शिफ्ट भी कम से कम छह घंटे की होनी चाहिए, आधी अधूरी बिल्डिंग, जंगल की जमीन, सरकारी जमीन, या किसी अतिक्रमण वाली जमीन पर स्कूल को मानयता नहीं मिलेगी ,जांच के दौरान स्कूल की बिल्डिंग की पूरी विडियोग्राफी भी दिखाना जरूरी होगा।
किसी भी व्यवसायिक दुकानों के बीच, फ्लैट्स के बीच अथवा नियमों के विरुद्ध जगह पर स्कूल को मानयता नहीं मिलेगी , स्कूल परिसर के अंदर कोई भी दूसरा व्यवसाय नहीं चलाया जा सकेगा। स्कूल में कंप्यूटर कि शिक्षा देने के लिए पीजीडीसीए, मानयता प्राप्त शिक्षक होना भी जरूरी रहेगा।
स्कूल के प्रिंसिपल के पास कम से कम पांच साल का पढ़ाने का अनुभव भी होना आवश्यक है, इसके लिए उच्चतम न्यायालय के गाइडलाइन का पालन करना भी जरूरी होगा। स्कूल के स्टाफ की लिस्ट के साथ फोटो, आधार कार्ड, मोबाईल नंबर, बैंक एकाउंट, और वेतन पर्ची भी जमा करना होगा।
जानकारी के अनुसार स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल, छात्र- छात्राओं के अलग अलग शौचालय, दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय, और स्कूल स्टाफ के लिए अलग से शौचालय का होना भी जरूरी है। स्कूल में पर्याप्त विद्युत व्यवस्था, पर्याप्त फर्नीचर, सीसीटीवी कैमरों का भी होना आवश्यक होगा।.यदि स्कूल बस चलाया जाता है तो फिर हर साल बस का तकनीकी जांच करवाना जरूरी होगा, बस चालक और उसके सहयोगी का स्वास्थ्य परिक्षण भी जरूरी होगा।
शिक्षा मंडल की नई गाइडलाइन के अनुसार स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। इसमें निजी स्कूल अपने स्कूल के नाम में नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय, एकलव्य, प्रयास, केन्द्रीय, राष्ट्रीय, पीएमश्री, स्वामी आत्मानंद, स्वामी विवेकानंद, आदि जैसे उत्कृष्ट नामों का ईस्तेमाल नहीं कर पायेंगे।
शिक्षा मंडल के अनुसार ऐसे सभी नामों से बच्चों के पालकगणों को स्कूल के विषय में गलतफहमी भी हो सकती है। स्कूल को मानयता प्राप्त होने के बाद कम से कम एक बोर्ड परीक्षा तक चलाना जरूरी रहेगा, इसका मतलब है कि स्कूल के बच्चों को बीच में ही स्कूल बदलने की परिस्थिति नहीं आनी चाहिए।
जानकारी अनुसार यदि कोई स्कूल सीबीएसई या किसी बोर्ड से मानयता प्राप्त करना चाहतें हैं तो फिर उन्हें शिक्षा मंडल में तीन साल की फीस एकसाथ देना होगा, इसके बाद ही स्कूल के लिए एनओसी सर्टिफिकेट मिलेगा।.स्कूल का मैनेजमेंट भी मंडल की अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकेगा। शिक्षा मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूलों के लिए मिनिमम स्टैंडर्ड हैं।
जो भी स्कूल शिक्षा मंडल द्वारा बनाए गए इन नियमों का पालन नहीं करेंगे उनकी मानयता अगले वर्ष के लिए विचार नहीं किया जायेगा।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।





