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बड़ी खबर | सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा

09 Sep 2026, 03:20 PM • Vande Bharat Live TV News
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बड़ी खबर | सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा - SAHARANPUR, उत्तर प्रदेश

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🔥 मस्जिद कमेटी ने दाखिल की याचिका, बिना कानूनी नोटिस ध्वस्तीकरण का आरोप — वर्शिप एक्ट के उल्लंघन का भी दावा, अगले हफ्ते सुनवाई संभव
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए और महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। मस्जिद कमेटी की ओर से इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। जानकारी के मुताबिक मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर कई गंभीर कानूनी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित पक्ष को पर्याप्त कानूनी नोटिस और प्रक्रिया का पालन किए बिना मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही याचिका में Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 यानी वर्शिप एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है।
मामला अब स्थानीय प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच विवाद से आगे बढ़कर सीधे न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले क्या विधिक प्रक्रिया पूरी की गई थी? क्या संबंधित पक्ष को नोटिस दिया गया था? क्या जवाब दाखिल करने और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला था? और यदि विवादित स्थल को लेकर कोई कानूनी या ऐतिहासिक दावा मौजूद था, तो कार्रवाई से पहले उसके दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर की गई?
मस्जिद कमेटी की याचिका में कथित तौर पर इस बात पर भी सवाल उठाया गया है कि धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद में वर्शिप एक्ट के प्रावधानों का किस प्रकार पालन किया गया। ऐसे में अब हाईकोर्ट के सामने केवल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी पूरी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।

🔴 अब हाईकोर्ट में किन सवालों पर टिकी नजर?
क्या ध्वस्तीकरण से पहले कोई वैधानिक नोटिस जारी हुआ था? क्या संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया गया? किस आदेश या प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई? क्या स्थल से जुड़े पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और अन्य अभिलेखों की जांच की गई थी? क्या धार्मिक स्थल की स्थिति और उससे जुड़े कानूनी अधिकारों का परीक्षण किया गया? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या वर्शिप एक्ट के प्रावधान इस मामले में लागू होते हैं और यदि होते हैं तो उनका पालन किस तरह किया गया?
इधर, ध्वस्तीकरण के बाद मौके से पुराने निर्माण अवशेष और एक करीब 20 फीट गहरा पुराना कुआं मिलने की चर्चा ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। पुरातत्व विभाग की प्रारंभिक जांच में कुएं की उम्र करीब 200 से 250 वर्ष आंकी जाने की बात सामने आई है, हालांकि इसकी सटीक ऐतिहासिक पहचान और निर्माण काल को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत वैज्ञानिक जांच और रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। कुएं की मौजूदगी अब इस पूरे विवाद में एक अलग ऐतिहासिक और पुरातात्विक सवाल भी खड़ा कर रही है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मस्जिद कब बनी और किसके आदेश से बनी? सवाल यह भी है कि जिस जमीन और परिसर पर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ, उसका पुराना रिकॉर्ड क्या कहता है? पुराने राजस्व अभिलेखों में इस स्थान की स्थिति क्या दर्ज थी? पुराने नक्शों में यहां क्या मौजूद था? ध्वस्तीकरण से पहले प्रशासन के पास कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध थे? और क्या कार्रवाई से पहले उन सभी रिकॉर्ड का विधिवत परीक्षण किया गया?

⚖️ हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर
बताया जा रहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई संभव है। हालांकि सुनवाई की अंतिम तारीख और अदालत द्वारा क्या आदेश पारित किया जाएगा, यह न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। यदि मामले की सुनवाई होती है तो प्रशासन की कार्रवाई, नोटिस की प्रक्रिया, उपलब्ध रिकॉर्ड और याचिका में लगाए गए कानूनी आरोपों पर अदालत के सामने पक्ष रखे जा सकते हैं।
इस मामले में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि याचिका में लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं; उन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और आदेश के बाद ही माना जाएगा।
सहारनपुर के इस चर्चित मामले में अब स्थानीय प्रशासन, मस्जिद कमेटी, पुराने दस्तावेज और पुरातात्विक जांच—चारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ ध्वस्तीकरण की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल हैं, तो दूसरी तरफ पुराने कुएं और निर्माण सामग्री ने ऐतिहासिक जांच का रास्ता खोल दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करने वाली अहम कड़ी साबित हो सकती है।

दावा नहीं—दस्तावेज चाहिए।

आरोप नहीं—कानूनी प्रक्रिया की जांच चाहिए।

इतिहास नहीं—इतिहास का प्रमाण चाहिए।

और सबसे बड़ा सवाल—ध्वस्तीकरण से पहले क्या कानून की हर जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई थी?

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विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
8217554083

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