वास्तुकला, अभियांत्रिकी, संपूर्ण ब्रह्मांड को देवता हैं श्री विश्वकर्मा जी

विश्वकर्मा जी को समस्त ब्रह्मांड का मूल निर्माता, अभियंता माना जाता है। विश्वकर्मा जयंती/ विश्वकर्मा पूजा, वास्तुकला, अभियांत्रिकी, के देवता श्री विश्वकर्मा जी के पूजन वंदन का है, जो कि समस्त ब्रह्मांड के निर्माता माने जातें हैं।
विश्वकर्मा जी उन सभी देवताओं में से एक हैं जिनका संबंध भगवान श्री हरि और अन्य देवताओं के सुंदर महल बनानें की प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं। विश्वकर्मा जी ने पवित्र द्वारका नगरी की रचना की थी ,जहां पर भगवान श्रीकृष्ण का शासन रहा,पांडवों की माया सभा का निर्माण किया गया और देवताओं के लिए अनेक अद्भुत शस्त्र शास्त्रों का सृजन भी किया गया था ।
विश्वकर्मा जी को दिव्य कारीगर भी माना जाता है,ऋग्वेद में विश्वकर्मा जी का उल्लेख मिलता है और यांत्रिकी एवं डिजाइन के विज्ञान स्थापत्यवेद का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है।.विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर प्रतिवर्ष 17 सितंबर को ही मनाया जाता है,विश्वकर्मा पूजा भारत में उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, असम,पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा आदि राज्यों में बहुत ही श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस दिन इंजीनियरिंग और वास्तुकला समुदाय के साथ साथ कारीगरों,शिल्पकारों, मैकेनिकों, लुहारों, वेल्डरों,औद्योगिक श्रमिकों, कारखाना श्रमिकों,तथा अन्य लोगों के द्वारा भी मनाया जाता है।
विश्वकर्मा पूजन के दिन सभी कल कारखानें,उद्योगों, में काम बंद रहता है। विश्वकर्मा पूजन के दिन सुंदर पंडाल और भगवान विश्वकर्मा जी की सजी हुई सुंदर मूर्तियां दिखाई देतीं हैं,जहां पर सभी कर्मचारी, श्रमिक, पूजा के लिए एकत्रित होतें हैं, इस दिन पूरी फैक्ट्री की सफाई, कर सजावट की जाती है,कर्मचारियों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले औजारों की भी पूजा की जाती है,।
हिंदू वर्ष में एक दिन एसा भी होता है,जिसमें कि पूजा-पाठ अपने काम के लिए नहीं बल्कि अपने काम पर की जाती है। विश्वकर्मा पूजन के दिन सभी अस्त्र शस्त्रों, औजारों वाहनों आदि की साफ सफाई कर रोली लगाई जाती है,और इस दिन के लिए इन्हें अलग रख दिया जाता है ,और यह दिन होता है भगवान श्री विश्वकर्मा पूजा का दिन ।
इस बार श्री विश्वकर्मा पूजा का दिन गुरुवार 17 सितंबर 2026 को होगा । इस वर्ष श्री विश्वकर्मा पूजा ,श्री गणेश उत्सव के दौरान बीच में ही पड़ रहा है, तो भारत भर की हजारों कार्यशालाओं और फैक्ट्रियों में जबकि विश्वकर्मा जी के सामने औजार रखें जायेंगे, और तबतक गणपति बप्पा भी पहले से विराजमान होंगे, और यह एक सुंदर सुखद संयोग भी होगा कि विघ्न बाधाओं को दूर करनें वाले और संसार के निर्माता भगवान एक साथ एक ही सप्ताह में सम्मानित हो रहें हैं।.विश्वकर्मा पूजा अधिकतर 16 से 18 सितंबर के आसपास ही पड़ता है।
हमारे यहां भारतदेश में लगभग हर पर्व त्योहार चंद्रमा से जुड़ा हुआ होता है, एक विशेष तिथि और पक्ष में, परंतु विश्वकर्मा पूजा सूर्य से जुड़ा हुआ होता है। और यह कन्या संक्रांति पर मनाई जाती है,जिस दिन सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करतें हैं।
सौर वर्ष ग्रेगेरियन कैलेंडर सापेक्ष स्थिर रहता है, इसलिए विश्वकर्मा पूजा की तारीख भी स्थिर रहता है। विश्वकर्मा जी माप,अनुपात, परिशुद्धता के देवता हैं,उनका यह त्योहार वह है जो कि विचलित होने से इंकार करता है।
विश्वकर्मा पूजा एक ऐसी शिक्षा देती है जिसे कि बताना बहुत ही सरल है ,किंतु इसका पालन करना ,जीना मुश्किल है, वह है श्रम की पूजा , श्रम ही पूजा है। वे हाथ जो कि दिनरात मेहनत करतें हैं,वेल्ड,करतें हैं,सिलाई करतें हैं,कोड करतें हैं, कल कारखानों में तपते हैं, बड़ी बड़ी ईमारतें खड़ी करतें हैं, मानवीय तौर पर वही करतें हैं जो कि विश्वकर्मा जी ने ब्रह्माण्डीय पैमाने पर किया था, श्रमिक वर्ष में एकबार रूकते हैं और अपने काम के औजारों को साफ स्वच्छ करतें हैं,पूजते हैं ,और धन्यवाद देते हैं।
हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए विश्वकर्मा पूजा बहुत ही महत्व रखती है। यह दिन पवित्र बढ़ई,दूनियां के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा जी के सम्मान में मनाया जाता है।
विश्वकर्मा जी ब्रम्हा जी के पुत्र हैं, उनकी महानता वास्तुकला, यांत्रिकी के विज्ञान, ऋग्वेद, और स्थापत्य वेद में वर्णित है। श्रमिक वर्ग के लिए विश्वकर्मा पूजा का दिन बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन होता है, इस दिन श्रमिक बंधु भगवान विश्वकर्मा जी से अपने अपने क्षेत्र कार्य में उन्नति और अपनी मशीनरी के सुरक्षित रूप से कामकाज के लिए विनती / प्रार्थना करतें हैं।
हमारे धार्मिक ग्रंथों से पता चलता है कि भगवान विश्वकर्मा जी वही हैं जिन्होनें त्रिपक्षीय ब्रम्हांड- आकाशीय, राज्यों, और ग्रहों, नश्वर क्षेत्र और उनकी दुनियां और आकाशीय स्थानों और अन्य दुनियाओं को अस्तित्व में लाए । विश्वकर्मा जी ने वाहनों और देवताओं की विभिन्न भुजाओं को आकार दिया, और उन्हें सभी अद्वितीय दैवीय विशेषताएं भी प्रदान की।
विश्वकर्मा जी ने हमें उधोग विज्ञान के बारें में बतलाया,जो कि हमें हासिल की गई प्रगति में दिखाता है। विश्वकर्मा पूजा के दिन कर्मचारी काम नहीं करतें हैं, इस दिन वे केवल अपने औजारों उपकरणों की पूजा करतें हैं और विश्वकर्मा जी से उनकी सुरक्षा रक्षा के प्रार्थना करतें हैं।
विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों कार्यस्थलों, दफ्तरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है,इस दिन लोग अपने औजारों को साफ करतें हैं , हल्दी चंदन आदि लगातीं हैं, और भगवान विश्वकर्मा जी से प्रगती उन्नति के लिए प्रार्थना करतें हैं, विश्वकर्मा पूजन का यह दिन न केवल शिल्प कला कौशल का सम्मान करता है बल्कि यह दिन मेहनत, रचनात्मकता का भी दिन होता है।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







