*नगर परिषद जैतवारा की पानी टंकी पर ‘ग्राम पंचायत’ लिखे जाने से भड़के लोग सोशल मीडिया पर पूछा- ‘तहसील और अस्पताल के बाद अब नगर परिषद का दर्जा भी छिन गया क्या?*

'सतना (मध्य प्रदेश):
नगर परिषद जैतवारा के वार्ड नंबर 3 में नवनिर्मित पानी की टंकी पर हुई एक प्रशासनिक लापरवाही ने स्थानीय क्षेत्र में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पानी की टंकी की पुताई के दौरान उस पर "ग्राम पंचायत जैतवारा" लिखवा दिया गया है,
*जिसे देखकर स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश है*।
सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक लोग अब प्रशासन से तीखे सवाल पूछ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है, "जैतवारा से पहले ही पूर्ण तहसील का दर्जा और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं छीन ली गईं। अब क्या नगर परिषद का दर्जा भी छीनकर इसे दोबारा ग्राम पंचायत बना दिया गया है?"क्या है जमीनी हकीकत?
*आधिकारिक प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार*
जैतवारा का नगर परिषद (नगर पंचायत) का दर्जा सुरक्षित है और इसे ग्राम पंचायत में नहीं बदला गया है। जिला प्रशासन सतना के आधिकारिक दस्तावेजों में जैतवारा आज भी एक शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Body) के रूप में ही दर्ज है। *लापरवाही या भारी चूक?*
जानकारों का मानना है कि यह लोक नगर परिषद जैतवारा की पानी टंकी पर 'ग्राम पंचायत' लिखे जाने से भड़के लोग, सोशल मीडिया पर पूछा- 'तहसील और अस्पताल के बाद अब नगर परिषद का दर्जा भी छिन गया क्या?'सतना (मध्य प्रदेश): नगर परिषद जैतवारा के वार्ड नंबर 3 में नवनिर्मित पानी की टंकी पर हुई एक प्रशासनिक लापरवाही ने स्थानीय क्षेत्र में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पानी की टंकी की पुताई के दौरान उस पर "ग्राम पंचायत जैतवारा" लिखवा दिया गया है, जिसे देखकर स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश है।सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक लोग अब प्रशासन से तीखे सवाल पूछ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है, "जैतवारा से पहले ही पूर्ण तहसील का दर्जा और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं छीन ली गईं। अब क्या नगर परिषद का दर्जा भी छीनकर इसे दोबारा ग्राम पंचायत बना दिया गया है?"क्या है जमीनी हकीकत?आधिकारिक प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, जैतवारा का नगर परिषद (नगर पंचायत) का दर्जा सुरक्षित है और इसे ग्राम पंचायत में नहीं बदला गया है। जिला प्रशासन सतना के आधिकारिक दस्तावेजों में जैतवारा आज भी एक शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Body) के रूप में ही दर्ज है।
*लापरवाही या भारी चूक?*
जानकारों का मानना है कि यह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) या जल जीवन मिशन के तहत काम करने वाले ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की गंभीर लापरवाही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की टंकी पर 'ग्राम पंचायत' लिखने का एक तय प्रारूप (Format) होता है, और ठेकेदार के पेंटर ने बिना सोचे-समझे शहरी निकाय (नगर परिषद) की टंकी पर भी वही पुरानी गाइडलाइन पेंट कर दी।जनता में गुस्सा क्यों?जैतवारा के नागरिकों का गुस्सा इस वजह से ज्यादा है क्योंकि क्षेत्र लंबे समय से अपनी प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज चल रहा है। पहले तहसील और स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़ने के बाद, इस नई पेंटिंग ने लोगों के पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। स्थानीय युवाओं और नागरिकों ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) और जिला कलेक्टर से इस घोर लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लेने और टंकी पर सुधार करवाने की मांग की है। यांत्रिकी विभागy (PHED) या जल जीवन मिशन के तहत काम करने वाले ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की गंभीर लापरवाही है।
*ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की टंकी पर 'ग्राम पंचायत' लिखने का एक तय प्रारूप (Format) होता है और ठेकेदार के पेंटर ने बिना सोचे-समझे शहरी निकाय (नगर परिषद) की टंकी पर भी वही पुरानी गाइडलाइन पेंट कर दी।जनता में गुस्सा क्यों?*
जैतवारा के नागरिकों का गुस्सा इस वजह से ज्यादा है क्योंकि क्षेत्र लंबे समय से अपनी प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज चल रहा है। पहले तहसील और स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़ने के बाद,
इस नई पेंटिंग ने लोगों के पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। स्थानीय युवाओं और नागरिकों ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) और जिला कलेक्टर से इस घोर लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लेने और टंकी पर सुधार करवाने की मांग की है।
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