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परिजनों ने लगाया आरोप : महावीर हॉस्पिटल की लापरवाही से 24 साल के आशुतोष की मौत, बहन मृण्मयी पाण्डेय ने कलेक्टर से की उच्च स्तरीय जांच की मांग

28 Sep 2026, 10:33 PM • Vande Bharat Live TV News
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परिजनों ने लगाया आरोप : महावीर हॉस्पिटल की लापरवाही से 24 साल के आशुतोष की मौत, बहन मृण्मयी पाण्डेय ने कलेक्टर से की उच्च स्तरीय जांच की मांग - सरगुजा, छत्तीसगढ़

अंबिकापुर, जिला सरगुजा। शहर के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल श्री महावीर हॉस्पिटल पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल की कथित चिकित्सकीय लापरवाही और समय पर सही इलाज न मिलने के कारण 24 वर्षीय युवक आशुतोष दास की जान चली गई। इस संबंध में मृतक की बहन मृण्मयी पाण्डेय (निवासी सुभाषनगर, बनारस रोड, होटल बंधन के पास, अंबिकापुर) ने श्रीमान जिलाधीश एवं मुख्य जिला दंडाधिकारी, सरगुजा को विस्तृत आवेदन सौंपकर निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड से उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

पहली भर्ती से लेकर ऑपरेशन तक का घटनाक्रम
परिजनों के आवेदन के अनुसार, आशुतोष दास सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उन्हें 13 जून 2026 को श्री महावीर हॉस्पिटल, अंबिकापुर में भर्ती कराया गया। परिजनों ने बताया कि वहां डॉ. चंदन दुबे द्वारा उनके सिर का ऑपरेशन किया गया और 11 अगस्त 2026 तक इलाज चलने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि इस दौरान आयुष्मान कार्ड से इलाज होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीज के परिजनों से 6 से 7 लाख रुपयों की अवैध वसूली कैश व फोनपे के माध्यम से की गई।

दूसरी भर्ती में बिगड़ी स्थिति, गलत इलाज का आरोप
परिजनों के अनुसार, 30 अगस्त 2026 को जब मरीज को पुनः अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों ने फेफड़ों के गंभीर संक्रमण की सही जानकारी परिजनों से छिपाकर रखी और केवल 4 दिनों के इलाज का झांसा देकर भर्ती कर लिया।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि मरीज आशुतोष दास को मूल रूप से सिर की चोट के इलाज हेतु भर्ती कराया गया था, परंतु लगातार गलत इलाज, उचित देखभाल के अभाव एवं डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण मरीज के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण फैल गया और फोड़े (Lung Abscess) बन गए, जिससे फेफड़े अत्यधिक खराब हो गए।

परिजनों का यह भी आरोप है कि उनके द्वारा बार-बार मुख्य डॉक्टर (डॉ. शैलेंद्र गुप्ता) को बुलाने के अनुरोध के बावजूद उन्हें बिना बुलाए गुमराह करके इलाज किया जाता रहा।

ट्रैकियोस्टोमी ट्यूब निकालने पर सवाल
आवेदन में परिजनों ने आरोप लगाया है कि 2 सितंबर 2026 को मरीज के फेफड़ों व गले की स्थिति सही तरीके से आंके बिना ही हड़बड़ी में ट्रैकियोस्टोमी (Tracheostomy Tube) निकाल दी गई, जिससे मरीज की हालत अत्यंत भयावह हो गई और अंततः फेफड़े पूरी तरह खराब होने व सही समय पर वेंटिलेटर/रेफरल न मिलने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

अचानक स्थिति बिगड़ना और संदिग्ध रेफर का आरोप
परिजनों के अनुसार, 3 सितंबर 2026 की देर रात मरीज आशुतोष की स्थिति अचानक बहुत अधिक बिगड़ गई। रात लगभग 11 बजे अस्पताल के डॉक्टरों ने अचानक मरीज को रायपुर ले जाने की बात कही।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि इसके बाद भी रात 2:30 बजे तक सीटी स्कैन व अन्य जांच के नाम पर समय गंवाया गया और अंततः सुबह 05:30 बजे (4 सितंबर) अत्यंत नाजुक अवस्था में मरीज को रायपुर के लिए रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि मरीज को जिस मरणासन्न स्थिति में रेफर किया गया, उससे स्पष्ट है कि समय रहते सही इलाज नहीं दिया गया। दुखद रूप से, दूसरे अस्पताल पहुंचने से पूर्व रास्ते में ही आशुतोष दास की मृत्यु हो गई।

साक्ष्य छिपाने और अभिलेख न देने का आरोप
घटना के पश्चात जब परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मरीज की संपूर्ण मेडिकल फाइल, सीटी स्कैन (फिल्म व सीडी), एक्स-रे रिपोर्ट्स एवं ट्रांसफर/डेथ समरी मांगी, तो परिजनों का आरोप है कि उन्हें केवल इलाज की अधूरी केस शीट दी गई। मूल सीटी स्कैन, एक्स-रे की मूल रिपोर्ट्स एवं ट्रांसफर/डेथ समरी देने से साफ इनकार कर दिया गया।

आवेदन में कहा गया है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों एवं मरीज अधिकार चार्टर के तहत इलाज के संपूर्ण दस्तावेज प्राप्त करना मरीज के परिजनों का वैधानिक अधिकार है। परिजनों ने आशंका जताई है कि महत्वपूर्ण जांच रिपोर्टों को छिपाना इस बात का अंदेशा देता है कि अस्पताल प्रशासन अपनी लापरवाही को छिपाने हेतु साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रहा है।

परिजनों की तीन प्रमुख मांगें
मृण्मयी पाण्डेय ने आवेदन में निम्न मांगें रखी हैं :
1. प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच हेतु तत्काल एक विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड (Medical Board Committee) का गठन किया जाए। 2. श्री महावीर हॉस्पिटल प्रशासन को कड़े निर्देश देकर मरीज के समस्त मूल अभिलेख, सीटी स्कैन (फिल्म व सीडी), एक्स-रे एवं ट्रांसफर/डेथ समरी को तुरंत जब्त/सुरक्षित कराया जाए ताकि साक्ष्य नष्ट न किए जा सकें। 3. घोर चिकित्सकीय लापरवाही, मरीज के जीवन से खिलवाड़ एवं साक्ष्य छिपाने के आरोप में संबंधित डॉक्टरों एवं अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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