लखनऊ। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है।
इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने दलित और वंचित समाज के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए बहुजन समाज के प्रमुख नेता एवं बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के निर्वाण दिवस, 9 अक्टूबर को प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की है। समाजवादी बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी की ओर से सभी जिला एवं महानगर मुख्यालयों के साथ-साथ विधानसभा और ब्लॉक स्तर पर विचार गोष्ठी, श्रद्धांजलि सभा और सामाजिक न्याय संवाद आयोजित किए जाएंगे।
सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा का संकल्प
अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मीडिया प्रभारी रामबाबू सुदर्शन ने कहा कि कांशीराम ने सामाजिक रूप से वंचित और शोषित समाज को राजनीतिक चेतना देने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने सत्ता में भागीदारी को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया और दलित, पिछड़े तथा वंचित समाज को अपने अधिकारों के लिए संगठित होने की दिशा दिखाई।
उन्होंने कहा कि कांशीराम के विचार आज भी सामाजिक न्याय की लड़ाई में प्रासंगिक हैं। 9 अक्टूबर का आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के संकल्प को मजबूत करने वाला अभियान बनेगा।
पीडीए एकजुटता पर जोर
अंबेडकर वाहिनी की ओर से कार्यक्रमों के दौरान भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए जाएंगे। सपा का आरोप है कि बहुजन समाज के अधिकारों और संवैधानिक हितों पर लगातार कुठाराघात किया जा रहा है तथा वंचित वर्गों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
पार्टी पीडीए—पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और वंचित समाज की एकजुटता को आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक लड़ाई में महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश कर रही है। चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कवायद
9 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रमों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सपा की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
जिला, विधानसभा और ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रमों के जरिए पार्टी संगठन को सक्रिय करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय, संविधान और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज
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