कांठ के डायट में दो दिवसीय संस्कृत शिक्षक संदर्शिका कार्यशाला का हुआ आयोजन

कांठ के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में दो दिवसीय संस्कृत शिक्षक संदर्शिका कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना और मां शारदे की वंदना से किया गया। सभी प्रतिभागियों ने अपना परिचय संस्कृत भाषा में आदान-प्रदान किया। कार्यशाला में जनपद मुरादाबाद के सभी विकास खण्डों के 50-50 शिक्षकों के दो बैच में 100 प्रतिभागियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम में कार्यशाला प्रभारी डायट प्रवक्ता अंशु गुप्ता द्वारा कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्कृत भाषा, वेदों और पुराणों की महत्वपूर्ण भाषा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिपेक्ष्य में त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत संस्कृत भाषा शिक्षण महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर संदर्भदाता मुकुल कौशिक ने संस्कृत भाषा के महत्व पर विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जिसमें संस्कृत भाषा स्वरूप और महत्व, दैनिक जीवन एवं कक्षा में प्रयुक्त होने वाले शब्दों और सरल वाक्य के निर्माण को सहजता के साथ समझाया। संदर्भदाता डॉ. लोकेंद्र कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मुख्य बातों पर प्रकाश डालते हुए, शब्दों के उच्चारण और व्याकरण सम्बन्धी नियमों पर सत्र व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस का आरंभ प्रथम दिवस के प्रतिवेदन के साथ हुआ जिसमें शिक्षकों प्रदीप कुमार शर्मा, चारु, दीपशिखा शर्मा मोनिका, सौरभ, रंजना, समरपाल सिंह आदि ने प्रथम दिवस की महत्वपूर्ण गतिविधियों को सभी के साथ साझा किया। कार्यशाला के द्वितीय दिवस में कार्यशाला प्रभारी डॉ अंशु गुप्ता ने गतिविधियों द्वारा भाषा अधिगम को सरल और रुचिकर बनाने पर बल दिया। संदर्भदाता मुकुल कौशिक द्वारा क्रिया आधारित शिक्षण, खेल-खेल में संस्कृत सीखने के नवाचारी तरीके, टी एल एम का प्रभावी निर्माण और उनके उपयोग, आधुनिक तकनीकी उपकरणों का शिक्षा में समावेश विषयों पर अपने महत्वपूर्ण संस्कृतमयी वार्तालाप व्याख्यान सत्र प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संदर्भदाता डॉ. लोकेंद्र कुमार ने दैनिक जीवन एवं कक्षा में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण संस्कृत विषयों पर शिक्षण अधिगम सामग्री का निर्माण करा कर प्रस्तुत कराया।
शिक्षा शास्त्र प्रवक्ता शशिबाला ने शिक्षकों से सीखे ज्ञान का कार्यक्षेत्र में प्रयोग करने का आह्वान किया। डायट प्रवक्ता डॉ. अनिल यादव ने शिक्षकों से आम बोलचाल की भाषा में संस्कृत को अपनाकर उसे सुदृढ़ करने पर जोर दिया। कार्यशाला के अंत में कार्यशाला प्रभारी डॉ. अंशु गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये। कार्यशाला में वंदना शर्मा, प्रियंका, सुषमा, सीमा, रूपाली शुभम,माधुरी, विनय, कुंवरपाल, चंद्रशेखर, शमीमुल, मुनीश, रूपाली बबीता, संदेश, ज्योति, सुनीता आदि सभी शिक्षकों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर कार्यशाला को सफल बनाया।
Report: Pankaj Kumar, Kanth ✍️
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