क्या झुनझुना पकड़ा गए क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी सुधांशु तिवारी

मैहर केजेएस सीमेंट उद्योग की रेलवे साइडिंग पर फ्लाई ऐश के उतारने और उससे जुड़े पर्यावरणीय मानकों के पालन का मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है। कलेक्टर मैहर के निर्देश पर एसडीएम दिव्या पटेल और क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी सुधांशु तिवारी ने रेलवे साइडिंग का औचक निरीक्षण किया।
मौके पर कामकाज में अनियमितताएं और व्यवस्थाओं में कमियां देखकर एसडीएम ने नाराजगी जाहिर की और आम लोगों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रदूषण का खतरा लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, तो कार्रवाई के लिए 30 से 45 दिनों के मेमोरेंडम की बात क्यों की गई?
रेलवे साइडिंग के निरीक्षण के दौरान एसडीएम दिव्या पटेल ने क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी को निर्देश दिए कि संबंधित रेलवे अधिकारियों और केजेएस सीमेंट उद्योग के जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में दो से चार दिनों के भीतर दोबारा जांच की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइडिंग क्षेत्र में कंक्रीटीकरण, धूल को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था, रेलवे साइडिंग की सीमा पर टीन शेड से कवरेज और फ्लाई ऐश की लोडिंग-अनलोडिंग एवं परिवहन के दौरान उसे ढककर रखने जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए।
एसडीएम ने निर्देश दिए कि यदि निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, तो काम बंद कराने की कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित पक्षों को तत्काल नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
इस मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी सुधांशु तिवारी की भूमिका भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित कमियों को दूर करने के लिए 30 से 45 दिनों का समय दिए जाने की बात सामने आई थी।
वहीं, तिवारी की सेवानिवृत्ति भी निकट होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में क्या निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी कार्रवाई हो पाएगी?
क्या सेवानिवृत्ति से पहले इस मामले का ठोस निराकरण हो सकेगा, या फिर जनता को आश्वासनों और नोटिसों के भरोसे ही रहना पड़ेगा? हालांकि, अधिकारी की सेवानिवृत्ति की तारीख और मेमोरेंडम की वास्तविक शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
फिलहाल प्रशासन की अगली जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मामला केवल फ्लाई ऐश का नहीं, जनस्वास्थ्य का है
मैहर की रेलवे साइडिंग के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है।
फ्लाई ऐश के अनुचित रखरखाव, परिवहन या लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान धूल फैलने की स्थिति में आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में केवल निरीक्षण, नोटिस और समयसीमा तय कर देना पर्याप्त नहीं होगा।
जरूरी है कि पर्यावरणीय मानकों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और कमियां मिलने पर नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई हो।
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