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बभनान: पत्रकार पर चेयरमैन और उनके गुर्गों का जानलेवा हमला, सीसीटीवी में कैद हुई शर्मनाक करतूत

15 Jul 2026, 09:14 AM • Vande Bharat Live TV News
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अजीत मिश्रा (खोजी)

बभनान में लोकतंत्र पर हमला: पत्रकार की पिटाई और चेयरमैन की ‘गुंडागर्दी’

  • नगर पंचायत बभनान में ‘जंगलराज’: चेयरमैन प्रबल मलानी बने ‘गुंडा’, पत्रकारिता पर पहरा
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ खबर लिखने पर मिली मारपीट, चेयरमैन के आगे नतमस्तक प्रशासन
  • पत्रकार पर हमले से उपजा आक्रोश: क्या राजनीतिक संरक्षण में सुरक्षित है ‘गुंडागर्दी’?
  • ‘बभनान’ का घिनौना सच: पत्रकार की पिटाई पर मौन रहा समाज और तंत्र

बस्ती: बभनान नगर पंचायत में एक पत्रकार के साथ हुई बर्बरतापूर्ण घटना ने स्थानीय प्रशासन और राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रबल मलानी और उनके समर्थकों पर पत्रकार विनोद जायसवाल को सरेआम पीटने और धमकाने का गंभीर आरोप लगा है।

घटना का घटनाक्रम

​पत्रकार विनोद जायसवाल ने बभनान में हो रहे घटिया नाली निर्माण की पोल खोलते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसी रंजिश के चलते, 10 जुलाई को उन्हें सरेआम पीटा गया। घटना का सिलसिला यही नहीं थमा; जब अगले दिन 11 जुलाई को पत्रकार पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने जा रहे थे, तब उन पर दोबारा हमला किया गया। सीसीटीवी फुटेज में भी कथित तौर पर चेयरमैन को पत्रकार के साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है।

घटना की पृष्ठभूमि

  • मारपीट का कारण: पत्रकार विनोद जायसवाल ने बभनान में हुए घटिया नाली निर्माण की रिपोर्टिंग की थी और भ्रष्टाचार को उजागर किया था।
  • दो चरणों में हमला:
    • ​पहली बार विनोद जायसवाल को प्रबल मलानी और उनके गुर्गों द्वारा सरेआम पीटा गया।
    • ​जब 11 जुलाई को पत्रकार गौर थाने में तहरीर (शिकायत) देने जा रहे थे, तब उनके साथ फिर से मारपीट की गई।
  • सीसीटीवी साक्ष्य: मारपीट का वीडियो सीसीटीवी फुटेज में भी कैद हुआ है, जिसमें चेयरमैन को पत्रकार के साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है।

आरोप और गंभीर सवाल;

चेयरमैन की कार्यशैली और राजनीतिक संरक्षण

  • ​लेख के अनुसार, चेयरमैन बनने से पहले प्रबल मलानी की छवि एक ईमानदार नेता की थी, लेकिन पद संभालने के बाद वे कथित तौर पर ‘भ्रष्ट चेयरमैन’ की श्रेणी में आ गए हैं।
  • ​उन पर पैसे मांगने और रंगदारी वसूलने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
  • ​पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे यह आरोप लग रहा है कि सत्ताधारी दल के होने के कारण उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

​लेख में कई तीखे सवाल उठाए गए हैं:

  • प्रशासनिक निष्क्रीयता: लेख के अनुसार, गौर थाने में तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
  • राजनीतिक संरक्षण: चेयरमैन के भाजपा से जुड़े होने के कारण उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जबकि अन्य दलों के नेताओं पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर दी जाती।
  • पत्रकारों की एकता पर प्रहार: पत्रकार बिरादरी के कुछ लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पत्रकार का साथ देने के बजाय भ्रष्ट चेयरमैन के साथ मिलकर साजिश रची, जो पूरी पत्रकारिता के लिए शर्मनाक है।

पत्रकारिता का गिरता स्तर और डर का माहौल

​यह लेख इस बात पर जोर देता है कि पत्रकारिता अब ‘समझौतावादी’ होती जा रही है। लेख का तर्क है:

  • ​जो पत्रकार डरकर समझौता कर लेते हैं, उन्हें पत्रकारिता छोड़ देनी चाहिए।
  • ​चेयरमैन की इस गुंडागर्दी के कारण स्थानीय स्तर पर एक डर का माहौल है, जहाँ लोग बीच-बचाव करने तक से कतरा रहे हैं।
  • ​चेयरमैन जैसे लोग जो चुनाव से पहले ‘आदर्श’ होने का दावा करते थे, वे अब सत्ता में आने के बाद पूरी तरह से निरंकुश हो गए हैं।
  • आरोप है कि कुछ दलाल किस्म के पत्रकारों ने भ्रष्ट चेयरमैन के साथ मिलकर साजिश रची और पत्रकार विनोद जायसवाल के खिलाफ ही झूठी खबरें फैलाकर शिकायतें दर्ज करवाईं।
  • ​लेख में चेतावनी दी गई है कि यदि पत्रकार आपसी गुटबाजी से ऊपर नहीं उठे और अपनी संस्थाओं व साथियों का समर्थन नहीं किया, तो वे भविष्य में भी ऐसी साजिशों का शिकार होते रहेंगे।
  • ​लेखक का स्पष्ट मत है कि डरकर पत्रकारिता करने से बेहतर है कि पत्रकारिता छोड़ दी जाए; पत्रकारिता हमेशा निडर और निष्पक्ष होकर की जानी चाहिए।

निष्कर्ष

​यह मामला केवल एक पत्रकार की पिटाई का नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है जहाँ जन-प्रतिनिधि ही गुंडागर्दी पर उतर आएं। लेखक का स्पष्ट कहना है कि यदि पत्रकारिता को निडर और निष्पक्ष बनाए रखना है, तो पत्रकारों को अपने दम पर खड़े होना होगा और आपसी गुटबाजी से ऊपर उठना होगा।यह घटना न केवल एक पत्रकार की पिटाई का मामला है, बल्कि बभनान के पूरे प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे पर एक तमाचा है। जिस प्रकार सरेआम मारपीट के दौरान किसी भी व्यक्ति ने बीच-बचाव नहीं किया, इसे समाज का एक ‘घिनौना सच’ बताया गया है।

  • घटना का मुख्य कारण: पत्रकार विनोद जायसवाल ने बभनन में हुए घटिया नाली निर्माण के भ्रष्टाचार को उजागर किया था।
  • हमले का विवरण:
    • ​पत्रकार विनोद जायसवाल को चेयरमैन प्रबल मलानी और उनके गुर्गों द्वारा सरेआम पीटा गया।
    • ​घटना के अगले दिन, 11 जुलाई को, जब पत्रकार गौर थाने में शिकायत दर्ज कराने जा रहे थे, तब उन पर दोबारा हमला किया गया।
    • ​सीसीटीवी फुटेज में चेयरमैन को पत्रकार के साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है।
  • प्रशासनिक और राजनीतिक पहलू:
    • ​चेयरमैन प्रबल मलानी पर भाजपा से जुड़े होने के कारण राजनीतिक संरक्षण का आरोप है, जिसके चलते पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
    • ​लेख में तर्क दिया गया है कि यदि यही काम विपक्ष (सपा) के किसी चेयरमैन ने किया होता, तो अब तक एफआईआर दर्ज हो चुकी होती।
  • पत्रकार बिरादरी की स्थिति:
    • ​लेख में कुछ पत्रकारों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पत्रकार विनोद जायसवाल का साथ देने के बजाय चेयरमैन के साथ मिलकर साजिश रची।
    • ​लेखक का मानना है कि पत्रकारों को आपसी गुटबाजी छोड़कर निडर होकर पत्रकारिता करनी चाहिए।
  • सामाजिक उपेक्षा: घटना के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा बीच-बचाव न करना समाज के लिए एक “घिनौना सच” बताया गया है।
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