धमतरी /नगरी जनपद में तबादले के बाद भी नहीं मिला नए सीईओ को प्रभार! आखिर किसके संरक्षण में चल रही मनमानी?

धमतरी /नगरी :- जनपद पंचायत नगरी में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत प्रभारी सीईओ रोहित बोर्झा को हटाकर आदिम जाति विकास विभाग के अधिकारी नारद मांझी को जनपद पंचायत नगरी का नया मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पदस्थ किया गया है। लेकिन उसे प्रभार नहीं दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, नारद मांझी ने 8 जुलाई 2026 को अपना कार्यभार ग्रहण करने के लिए जॉइनिंग भी दे दी, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें आज तक विधिवत प्रभार नहीं सौंपा गया है। दूसरी ओर, रोहित बोर्झा अब भी सीईओ की कुर्सी पर कार्य करते दिखाई दे रहे हैं।
इस स्थिति ने न केवल शासन के आदेशों के पालन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि शासन ने स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया और नए अधिकारी ने जॉइनिंग भी कर ली, तो फिर आखिर किसके निर्देश पर पुराने अधिकारी अब भी पद पर बने हुए हैं?
क्या शासन के आदेश से ऊपर हैं स्थानीय अधिकारी?
प्रशासनिक व्यवस्था में सामान्य नियम यही है कि स्थानांतरण आदेश प्रभावी होने और नए अधिकारी के कार्यभार ग्रहण करने के बाद पुराने अधिकारी को तत्काल प्रभार सौंपना होता है। यदि किसी कारणवश प्रभार नहीं दिया जाता है, तो उसके लिए सक्षम प्राधिकारी से स्पष्ट निर्देश आवश्यक होते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नगरी जनपद पंचायत में शासन के आदेशों की अनदेखी की जा रही है, या फिर किसी वरिष्ठ अधिकारी के संरक्षण में यह स्थिति बनी हुई है?
समाचार के बाद हुई थी कार्रवाई, अब फिर नया विवाद
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले नगरी जनपद पंचायत को लेकर यह मुद्दा सामने आया था कि आदिवासी विकासखंड होने के बावजूद आदिम जाति विकास विभाग के अधिकारी के स्थान पर पंचायत विभाग के अधिकारी को सीईओ का प्रभार दिया गया था। इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद शासन ने संज्ञान लेते हुए रोहित बोर्झा का स्थानांतरण किया और आदिम जाति विकास विभाग के अधिकारी नारद मांझी को पदस्थ किया।
लेकिन अब, जब नए अधिकारी ने जॉइनिंग भी कर ली है, तब भी उन्हें कार्यभार नहीं मिलना पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला रहा है।
जनप्रतिनिधियों और लोगों में चर्चा
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि शासन के आदेशों का पालन ही नहीं होगा तो प्रशासनिक व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा? साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन इस मामले की जांच कर यह स्पष्ट करे कि प्रभार सौंपने में देरी किसके निर्देश पर हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
वहीं जनपद पंचायत नगरी के प्रभारी सीईओ रोहित बोर्झा ने कार्यभार हस्तांतरण को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि जिला आदिवासी विकास विभाग से उन्हें औपचारिक पत्र जारी कर यह निर्देश दिया जाए कि जनपद पंचायत नगरी में नए सीईओ की पदस्थापना हो चुकी है तथा उन्हें जिला पंचायत में उपस्थित होना है। संबंधित पत्र प्राप्त होते ही वे नवपदस्थ सीईओ नारद मांझी को विधिवत कार्यभार सौंप देंगे।
सबसे बड़ा सवाल
यदि शासन का आदेश लागू हो चुका है और नए अधिकारी ने विधिवत जॉइनिंग भी दे दी है, तो फिर प्रभार हस्तांतरण में हो रही देरी प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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