#शाहाबाद में गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी बंद, जनता परेशान—बचत किसकी, नुकसान किसका?

#शाहाबाद में गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी बंद, जनता परेशान—बचत किसकी, नुकसान किसका?
#शाहाबाद, हरदोई। आपदा और गैस संकट के दौर में अगर किसी व्यवस्था ने जनता को सबसे ज्यादा परेशान किया है, तो वह घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति व्यवस्था बताई जा रही है। ईरान-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद गैस सिलेंडर को लेकर शाहाबाद में लंबी कतारों से लेकर कथित ब्लैक बिक्री तक के मामले सामने आए। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उस समय सिलेंडर हजारों रुपये तक में बेचे गए। अब हालात सामान्य होने के बावजूद होम डिलीवरी पूरी तरह बहाल न होने पर सवाल उठने लगे हैं।
उपभोक्ताओं के अनुसार, इंडेन गैस का 968 रुपये वाला सिलेंडर करीब 980 रुपये में दिया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उपभोक्ता को सिलेंडर लेने के लिए खुद एजेंसी अथवा निर्धारित स्थान तक जाना पड़ रहा है, तो होम डिलीवरी के नाम पर लिया जाने वाला शुल्क कहां जा रहा है?
30 रुपये प्रति सिलेंडर का गणित!
उपभोक्ताओं के मुताबिक, होम डिलीवरी में करीब 18 रुपये डिलीवरी चार्ज शामिल होता है। यदि घर तक डिलीवरी नहीं की जा रही है तो उपभोक्ताओं का सवाल है कि यह राशि उन्हें वापस क्यों नहीं मिल रही?
दूसरी ओर, 968 रुपये के सिलेंडर के लिए 980 रुपये लिए जाने की स्थिति में 12 रुपये अतिरिक्त का अंतर भी सामने आता है।
यानी उपभोक्ताओं द्वारा लगाए जा रहे हिसाब के मुताबिक—
₹12 अतिरिक्त + ₹18 डिलीवरी चार्ज = ₹30 प्रति सिलेंडर
एक डिलीवरी कर्मचारी द्वारा बताए गए आंकड़े के अनुसार, एक पिकअप में करीब 60 सिलेंडर आते हैं। इस हिसाब से 60 सिलेंडर × ₹30 = ₹1,800 का अंतर एक पिकअप पर बनता है।
इसके अलावा, यदि घर-घर डिलीवरी नहीं हो रही है तो डिलीवरी वाहन के ईंधन खर्च में भी बचत होने का दावा किया जा रहा है। उपभोक्ताओं के अनुसार, करीब ₹500 डीजल खर्च बचने को जोड़ें तो यह आंकड़ा लगभग ₹2,300 प्रति पिकअप तक पहुंच सकता है।
हालांकि, इन आंकड़ों और शुल्क की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित गैस एजेंसी तथा तेल कंपनी के रिकॉर्ड से होना जरूरी है।
जनता बाइक पर सिलेंडर ढोने को मजबूर
शाहाबाद में स्थिति यह बताई जा रही है कि डिलीवरी बॉय घर-घर सिलेंडर पहुंचाने के बजाय नगर में निर्धारित स्थानों पर खड़े रहते हैं और उपभोक्ताओं को वहीं जाकर सिलेंडर लेना पड़ रहा है। कई लोग बाइक पर सिलेंडर रखकर सड़कों पर आने-जाने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल—होम डिलीवरी बंद क्यों?
जब गैस आपूर्ति को लेकर परिस्थितियां पहले जैसी सामान्य हो चुकी हैं, तो फिर घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचाने की व्यवस्था अब तक पूरी तरह बहाल क्यों नहीं हुई?
क्या उपभोक्ताओं से डिलीवरी चार्ज लिया जा रहा है?
अगर लिया जा रहा है तो घर तक डिलीवरी क्यों नहीं?
यदि होम डिलीवरी नहीं हो रही तो शुल्क की राशि उपभोक्ता को वापस क्यों नहीं?
बाइक पर सिलेंडर ले जाने के लिए मजबूर उपभोक्ताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
अब जरूरत है कि संबंधित तेल कंपनी, गैस एजेंसी और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जांच कर स्पष्ट करे कि शाहाबाद में होम डिलीवरी व्यवस्था आखिर क्यों बाधित है और उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे शुल्क का वास्तविक हिसाब क्या है।
जनता का सवाल सीधा है—सिलेंडर घर तक नहीं आएगा, तो डिलीवरी का पैसा किस बात का?
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