सरकारी प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की शिक्षा का स्तर अब डिजिटल रूप से परखा जायेगा

छत्तीसगढ प्रदेश के सरकारी स्कूलों के के बच्चों का शिक्षा स्तर अब डिजिटल रूप से परखा जायेगा, छत्तीसगढ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद- एनसीईआरटी नें इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसके लिए आंकलन के तौर पर छत्तीसगढ प्रदेश के करीब तीन सौ से अधिक प्राथमिक विद्यालयों का रेंडम चयन किया जायेगा।
प्राथमिक स्कूलों में अध्ययनरत करीब तीन हजार बच्चों को भी रेंडम तरीके से इस मूल्यांकन में शामिल किया जायेगा। इस डिजिटल आंकलन का उद्देश्य यह है कि प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों नें अपनी कक्षा के अनुसार गणित और भाषा की बुनियादी दक्षता कितनी हासिल कर पाए हैं, यह परखना है।
जानकारी अनुसार इसके अंतर्गत केवल किताबों में पढ़ी हुई चीजों को याद करनें पर ही जोर देना ही ,बल्कि बच्चों की वास्तविक समझदारी और उनके कौशल को भी देखा जायेगा ।.इस डिजिटल आंकलन में बच्चों की भाषा संबंधी बुनियादी क्षमता को भी परखा जायेगा,और यह देखा जायेगा कि बच्चे किसी भी लिखी हुई सामग्री को कितनी अच्छी तरह से पढ़ और समझ पा रहें हैं। बच्चों को अपनी बात समझाकर बनानें और भाषा का सही उपयोग करनें जैसी क्षमताओं की ओर भी ध्यान दिया जायेगा।
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्राथमिक स्तर के बच्चों का भाषा सीखने का स्तर उनकी कक्षा के हिसाब से कितना सही है। गणित विषय में बच्चों की बुनियादी जानकारी को भी परखा जायेगा, इसमें जोड़ घटाना, गुणा, भाग, संख्या का ज्ञान, गणना आदि मूलभूत अवधारणाओं से जुड़े हुए सवाल भी शामिल किए जायेंगे।
इसमें यह देखा जायेगा कि बच्चे केवल सवाल का जवाब याद करके ही बता रहे हैं या वास्तव में गणित को समझते हुए सवाल का जवाब दे रहैं। जानकारी अनुसार रेंडम चयन का उद्देश्य किसी एक स्कूल या क्षेत्र के आधार पर बच्चों के सीखने का स्तर का पता लगाने के बदले प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों की वास्तविकता को देखना है।
यह आंकलन पूरी तरह से डिजिटल रूप से होना है। डिजिटल माध्यम में बच्चों के प्रदर्शन का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज किया जायेगा।
इससे परिणाम तैयार करने और अलग अलग स्कूलों या क्षेत्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण करने भी आसानी होगी। प्राथमिक कक्षाओं में भाषा और गणित की बुनियादी दक्षता बच्चों की आगे पढ़ाई के लिए नींव का काम करती है, इसलिए शुरुआत में ही यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि बच्चे अपना कक्षाओं के अनुसार सही तरीके से सीख समझ पा रहें या नही।
डिजिटल आंकलन में किताबी ज्ञान के बदले में बच्चों की बुनियादी ज्ञान की क्षमता पढ़ने लिखने समझने की क्षमता और गणितीय दक्षता भी बढ़ेगी ।.
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