नो वर्क..नो पे मामले में पुलिसकर्मियों को मिली बड़ी राहत, हाईकोर्ट से बर्खास्तगी अवधि का वेतन और वेतनवृद्धि देने का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने 46 पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए 23 जून 2016 से 22 जनवरी 2021 तक का बकाया वेतन, वेतनवृद्धि और अन्य वित्तीय लाभ देने का आदेश दिया है l
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य के 46 पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने बर्खास्तगी की अवधि के लिए कर्मचारियों को बकाया वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धि और अन्य परिणामी वित्तीय लाभ देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। कोर्ट ने सरकार की ओर से लगाई गई ‘नो वर्क, नो पे’ की शर्त को इस मामले में कानूनन उचित नहीं माना और इसे आंशिक रूप से रद्द कर दिया।जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारियों को राज्य सरकार की कार्रवाई के कारण सेवा से बाहर रहना पड़ा, तो उस अवधि के लिए ‘नो वर्क, नो पे’ का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता।
23 जून 2016 से 22 जनवरी 2021 तक मिलेगा लाभ
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 23 जून 2016 से 22 जनवरी 2021 तक की अवधि के लिए संबंधित 46 कर्मचारियों को सभी पात्र वित्तीय लाभ दिए जाएं।इसमें बकाया वेतन के साथ वार्षिक वेतनवृद्धि और सेवा से जुड़े अन्य परिणामी लाभ शामिल होंगे। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद अधिकतम आठ सप्ताह के भीतर भुगतान और अन्य लाभ देने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
सरकार अपने ही फैसले का लाभ नहीं उठा सकती: हाईकोर्ट
अदालत ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि कर्मचारियों को काम से दूर रखने की स्थिति राज्य सरकार की अपनी कार्रवाई के कारण बनी थी। ऐसे में सरकार उसी अवधि का हवाला देकर कर्मचारियों को उनके वैधानिक वित्तीय लाभ से वंचित नहीं कर सकती।
कोर्ट ने यह भी माना कि संबंधित कर्मचारियों की सेवा निरंतरता पहले ही बहाल की जा चुकी है। ऐसे में केवल वेतन से वंचित रखना पहले दिए गए न्यायिक आदेश के अनुरूप नहीं होगा।
2015 में हुई थी नियुक्ति
यह पूरा मामला वर्ष 2015 में हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। डिकेश कुमार समेत कुल 46 लोगों की नियुक्ति झारखंड आर्म्ड पुलिस, इंडियन रिजर्व बटालियन और स्टेट इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स में विभिन्न पदों पर हुई थी।इनमें बार्बर, वाटर कैरियर, कुक, स्वीपर और वॉशरमैन जैसे पद शामिल थे।बाद में चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इसके बाद राज्य सरकार ने 23 जून 2016 को इन कर्मचारियों की नियुक्तियां समाप्त कर दी थीं।
हाईकोर्ट ने 2019 में ही बर्खास्तगी रद्द कर दी थी
सेवा समाप्त किए जाने के खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 8 नवंबर 2019 को बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया था।अदालत ने कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर वापस लेने के साथ-साथ सेवा से जुड़े सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को उच्चतर अदालत में चुनौती नहीं दी, जिसके बाद यह आदेश अंतिम हो गया।
2021 में बहाल हुई सेवा, लेकिन लगाई गई ‘नो वर्क, नो पे’ शर्त
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने 22 जनवरी 2021 को अधिसूचना जारी कर बर्खास्तगी का आदेश वापस लिया और कर्मचारियों को सेवा में निरंतरता प्रदान की।हालांकि, सरकार ने 23 जून 2016 से 22 जनवरी 2021 के बीच की अवधि के लिए ‘नो वर्क, नो पे’ की शर्त लगा दी। कर्मचारियों ने इसी शर्त को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।अब अदालत ने इसी मामले पर फैसला सुनाते हुए सरकार को उक्त अवधि के वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया है।
वेतनवृद्धि का असर भविष्य के लाभों पर भी पड़ेगा
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि यदि कर्मचारियों को संबंधित अवधि की वार्षिक वेतनवृद्धि नहीं दी जाती है, तो इसका असर केवल तत्काल वेतन पर नहीं पड़ेगा। इससे आगे चलकर उनके वेतन निर्धारण, पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं।इसी आधार पर अदालत ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए कर्मचारियों को निर्धारित अवधि के सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया।
आठ सप्ताह में करना होगा भुगतान
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट समय-सीमा भी दी है। आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद आठ सप्ताह के भीतर 46 पुलिसकर्मियों को उनके पात्र वित्तीय लाभ उपलब्ध कराने होंगे।इस फैसले के बाद संबंधित कर्मचारियों को न केवल बकाया वेतन मिलने का रास्ता साफ हुआ है, बल्कि उनकी सेवा अवधि से जुड़े वेतनवृद्धि और अन्य लाभ भी बहाल होंगे।
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