बस्ती: मौत को दावत देता जर्जर बिजली पोल, चार दिन बीतने पर भी कुंभकर्णी नींद में सोया विभाग!

अजीत मिश्रा (खोजी)
मौत को दावत देता जर्जर पोल और खामोश बिजली विभाग: क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
- मौत का लाइव ट्रेलर: आवास विकास में नीचे से टूटा पोल और लटकते तार, क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
- जिम्मेदार मौन, जनता भगवान भरोसे: चार दिन से खतरे में मासूमों की जान, पर अधिकारियों की फाइलें धूल फांक रही हैं।
- जनता भरे बिजली का बिल, विभाग दे मौत का पैगाम: जर्जर पोल पर बंदरों का आतंक, कभी भी घट सकती है बड़ी दुर्घटना।
बस्ती: शहर के आवास विकास कॉलोनी स्थित पानी टंकी के पास एक जर्जर बिजली का पोल इन दिनों मौत का लाइव ट्रेलर बन चुका है। नीचे से बुरी तरह टूट चुका यह पोल किसी भी पल धराशायी होने की स्थिति में है, और इससे जुड़े खुले हुए बिजली के तार जमीन के इतने करीब लटक रहे हैं कि वहां से गुजरना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस आसन्न खतरे की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा विभाग को दिए हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। क्या विभाग किसी बड़े हादसे और किसी की अर्थी उठने का इंतजार कर रहा है?
लापरवाही की इंतहा और बंदरों का आतंक
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इस जर्जर पोल के आसपास बंदरों की लगातार उछल-कूद बनी रहती है। कमजोर हो चुके इस ढांचे पर बंदरों के कूदने से पड़ने वाले जरा से दबाव से यह पोल कभी भी ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है। इसके अलावा, नीचे लटकते खुले तारों में दौड़ता करंट किसी भी राहगीर, मासूम बच्चे या वाहन सवार की जिंदगी पल भर में लील सकता है।
जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते अधिकारी
जनता हर महीने समय पर बिजली का बिल चुकाती है, लेकिन इसके बदले उन्हें सुरक्षा की जगह मौत का साया मिल रहा है। चार दिन पहले स्थानीय लोगों ने जबान और लिखित रूप से अधिकारियों को इस गंभीर खतरे से आगाह किया, पर उनकी फाइलों पर धूल जमती रही। यदि इस बीच कोई अप्रिय घटना घटती है, तो क्या लापरवाह अधिकारियों की नौकरी या उनके स्पष्टीकरण से किसी की छीनी गई सांसें वापस लौट आएंगी?
अब जनता का सब्र हो रहा है खत्म
बिजली के पोल और तारों को दुरुस्त रखना विभाग की बुनियादी जिम्मेदारी है, पर बस्ती में यह जिम्मेदारी कागजों तक सिमट कर रह गई है।
चेतावनी: यदि समय रहते इस टूटे हुए पोल को नहीं बदला गया और खुले तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर नहीं किया गया, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर फूटेगा। किसी भी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर लापरवाह विभागीय अधिकारियों की होगी।
अब देखना यह है कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या उससे पहले अपनी नींद तोड़कर अपनी जिम्मेदारी निभाता है?
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