पर्यावरण और वन्य कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे तस्कर:

रावतपुर में बिना अनुमति हरे नीम के पेड़ का अवैध कटान,
वन विभाग की सुस्ती और संलिप्तता पर उठे गंभीर सवाल
औरैया (बिधूना/अछल्दा):
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण, भू-गर्भ जल संवर्धन और हरित आवरण को बचाने के लिए भले ही बड़े-बड़े दावे और कठोर कानून बनाए जा रहे हों, लेकिन मैदानी स्तर पर वन विभाग और भू-माफियाओं की मिलीभगत इन तमाम दावों की धज्जियां उड़ा रही है। जनपद के अछल्दा रेंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत रावतपुर के मजरा कटरा नकी में वन संरक्षण अधिनियम और उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम की तराई में हरे-भरे नीम के पेड़ों का अवैध कटान धड़ल्ले से जारी है। यह केवल एक पेड़ की कटाई नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र, भौगोलिक स्थिति और आम जनजीवन के भविष्य पर एक गहरा प्रहार है।
कानूनों की खुली अवहेलना और पर्यावरण का विनाश:
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के तहत किसी भी हरे पेड़ को काटना एक दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति अनिवार्य है। नीम को एक अति महत्वपूर्ण औषधीय और प्रतिबंधित प्रजाति माना गया है, जो पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने और ऑक्सीजन संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। बावजूद इसके, नासिर अली और भूरा अली पुत्रगण सब्बीर अली तथा उनके अन्य साथियों द्वारा बिना किसी विभागीय अनुमति के दिन के उजाले में प्रतिबंधित नीम के पेड़ को काटकर 15 क्विंटल जलाने योग्य लकड़ी में तब्दील कर दिया गया। मौके से 160 सेंटीमीटर गोलाई वाले तने के अवशेष इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कैसे बेखौफ होकर प्राकृतिक संपदा का सफाया किया जा रहा है।
आम जनजीवन और भौगोलिक भविष्य पर आसन्न खतरा:
लगातार हो रहे इस तरह के अंधाधुंध पेड़ कटान से क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बिगड़ रही है। ग्लोबल वार्मिंग, भू-जल स्तर में गिरावट और शुद्ध हवा के संकट से जूझ रहे ग्रामीण अंचल के लिए यह स्थिति बेहद भयावह है। पेड़ों के कटने से न केवल स्थानीय आबोहवा दूषित हो रही है, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी नष्ट हो रहा है। भविष्य में यह अनियंत्रित कटान मानव जीवन के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय आपदा का संकेत दे रहा है, जिसके प्रति जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदकर बैठा है।
वन विभाग की संदिग्ध भूमिका और बीट प्रभारी की कार्यप्रणाली कटघरे में:
जब ग्रामीणों की सूचना पर 'न्याय पथ', 'वन्दे भारत न्यूज़', 'समृद्ध भारत न्यूज़ एवं समाचार पत्र' की टीम ने मौके की वास्तविकता को उजागर किया और उपजिलाधिकारी बिधूना कमल कुमार सिंह को अवगत कराया, तो प्रशासनिक सख्ती के बाद हड़कंप मच गया। एसडीएम के निर्देश पर अछल्दा रेंज के बीट प्रभारी गौरव मिश्र को मौके पर भेजा गया, लेकिन उनकी कार्यशैली ने वन विभाग की संलिप्तता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आरोप है कि बीट प्रभारी ने बिना मौके पर पहुंचे ही नापजोख कर लौटने की बात कही, और जब मीडिया टीम मौके पर मौजूद थी तब वहां कोई विभागीय अधिकारी नहीं था। इससे भी गंभीर मामला यह है कि ग्रामीणों के अनुसार बीट प्रभारी ने विभागीय वर्दी बदलकर सादा कपड़ों में आरोपियों से मुलाकात की, जो सीधे तौर पर विभागीय कदाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। भिखरा, रावतपुर, असजना और रूपपुर सहार समेत कई गांवों में चल रहे इस अवैध कटान के खेल में यदि उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो, तो कई कर्मचारियों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।
प्रशासनिक चेतावनी और 'न्याय पथ' की प्रतिबद्धता:
उपजिलाधिकारी बिधूना कमल कुमार सिंह ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि क्षेत्र में हरे पेड़ों का अवैध कटान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने नामजद आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की बात कही है।
'न्याय पथ', 'वन्दे भारत न्यूज़', 'समृद्ध भारत न्यूज़ एवं समाचार पत्र' का यह स्पष्ट मानना है कि पर्यावरण और जनहित से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दबंग या भ्रष्ट अधिकारी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। अखबार और मीडिया समूह की यह सशक्त टीम जनहित, पर्यावरण सुरक्षा और शासन की 'जीरो टालरेंस' नीति के तहत इस पूरे मामले की अंतिम छोर तक पैनी नजर रखेगा, ताकि प्रकृति के दुश्मनों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






