वाराणसी। दुनिया के सबसे प्राचीन शहर वाराणसी में भारत-जापान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का उद्घाटन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे-सान की धर्मपत्नी श्रीमती अकी आबे-सान और जापान से आए प्रतिनिधियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसे जापान के रूप में एक सच्चा मित्र मिला है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में अधिकांश रिश्ते हित और लाभ-हानि को देखकर तय होते हैं, लेकिन भारत और जापान के संबंध विश्वास, विचार और साझा विरासत पर आधारित हैं।
शिंजो आबे के योगदान को समर्पित स्मृति स्थल
मुख्यमंत्री ने कहा कि रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में तैयार किया गया यह स्मृति गलियारा जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह स्मृति स्थल भारत-जापान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने में शिंजो आबे के योगदान को याद दिलाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों के बीच विश्वास का आधार बन जाती है, तो उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के बीच इसी प्रकार की आत्मीय मित्रता और विश्वास का संबंध रहा।
पद्म विभूषण से सम्मानित हुए थे शिंजो आबे
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2021 में भारत सरकार ने शिंजो आबे को देश के प्रमुख नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया था। उन्होंने इसे भारत की ओर से अपने सच्चे मित्र के प्रति सम्मान बताया।
टेक्नोलॉजी और टैलेंट की साझेदारी
मुख्यमंत्री ने भारत-जापान सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान के पास टेक्नोलॉजी और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा। उन्होंने बताया कि करीब 1,400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत-जापान की साझेदारी अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ केवल एक स्मृति स्थल नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच गहरे विश्वास, मित्रता और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। यह दोनों देशों की मैत्री को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।