पंडो जनजाति के धनराज पंडो की पट्टा भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, न्याय के लिए मानवाधिकार फाउंडेशन ने उठाई आवाज

स्थान: वाड्रफनगर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल पंडो समुदाय के धनराज पंडो की पट्टा भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन, जिला शाखा बलरामपुर-रामानुजगंज ने शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप कर पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग की है।
1977 में मिला था शासकीय पट्टा
फाउंडेशन द्वारा मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग तथा संबंधित अधिकारियों को संबोधित आवेदन के अनुसार, धनराज पंडो पिता रामकिशुन, निवासी ग्राम पंचायत कोटराही,थाना बसंतपुर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज को वर्ष 1977 में ग्राम कोटराही स्थित खसरा नंबर 16/47, रकबा लगभग ढाई एकड़ भूमि का शासकीय पट्टा प्रदान किया गया था। आवेदन में पट्टा दिनांक 27 सितंबर 1977 और प्रकरण क्रमांक 22 अ 19/76-77 का उल्लेख किया गया है।
तीन व्यक्तियों पर भूमि कब्जाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, कोरोना काल के दौरान धनराज पंडो के अपने ससुराल चिरमिरी में रहने के समय गांव के विवेक यादव, रामकुमार यादव एवं विनोद यादव, पिता डोमन यादव, द्वारा कथित तौर पर उक्त भूमि पर कब्जा कर खेती की जाने लगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब अभी सामने नहीं आया है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारियों के समक्ष आवेदन देने के बाद भी न्याय की मांग
फाउंडेशन के आवेदन में बताया गया है कि पीड़ित ने तहसील न्यायालय वाड्रफनगर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वाड्रफनगर तथा संभागायुक्त कार्यालय अंबिकापुर तक अपनी शिकायत पहुंचाई है। इसके बावजूद, शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले का अब तक संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ है।
फाउंडेशन ने इस मामले में राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और लंबे समय से लंबित शिकायत पर जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।
कानूनी कार्रवाई और भूमि वापस दिलाने की मांग
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने अपने ज्ञापन में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170-ख तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
फाउंडेशन ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों की टीम गठित कर भूमि का सीमांकन कराया जाए। जांच में अवैध कब्जा पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए पीड़ित को उसकी भूमि का वास्तविक कब्जा वापस दिलाया जाए।
शासन-प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील
फाउंडेशन का कहना है कि पंडो समुदाय जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के लोगों के भूमि एवं आजीविका संबंधी अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। संगठन ने मुख्यमंत्री, राज्य मानवाधिकार आयोग, जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से मामले को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने की अपील की है।
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ के लिए विशेष रिपोर्ट
नोट: यह खबर प्राप्त शिकायत एवं ज्ञापन में दर्ज आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होना शेष है।
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