विजयदशमी पर शस्त्र पूजन करते समय

*प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा है भारत- डॉ. मोहन यादव*
जिला संवाददाता – पी एल तिवारी वंदे भारत लाइव टीवी
स्थान- आगर मालवा
विजयादशमी सत्य की शक्ति और शक्ति की सार्थकता का महापर्व है। यह भारतीय चेतना का वह प्रकाश है, जो हमें विश्वास दिलाता है कि अन्याय कितना भी प्रबल हो, प्रतिकार का संकल्प उससे बड़ा होता है। असत्य का वैभव क्षणिक है, सत्य का सामर्थ्य शाश्वत। भगवान श्रीराम की विजय इसी विश्वास की प्रतिष्ठा है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य के प्रति आस्था के साथ उसकी रक्षा का साहस भी आवश्यक है। न्याय की कामना तभी फलित होती है, जब समाज उसके लिए खड़ा होने का संकल्प लेता है।
भगवान श्रीराम के देश में शक्ति की आराधना का उद्देश्य सदैव लोकमंगल रहा है। श्रीराम का धनुष पीड़ितों के लिए आश्वासन और अत्याचारियों के लिए चेतावनी है। उनका पराक्रम मर्यादा से प्रेरित है और उनका प्रत्येक संकल्प जनकल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने वनवास के कठिन मार्ग पर समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर यह सिद्ध किया कि विश्वास, संगठन और सामूहिक पुरुषार्थ से बड़ी से बड़ी चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यही हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार और राष्ट्रनिर्माण का मार्ग है।
विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन इसी चेतना की अभिव्यक्ति है। शस्त्रों का पूजन करते हुए हम शक्ति के विवेकपूर्ण उपयोग और उसके साथ जुड़े उत्तरदायित्व को स्वीकार करते हैं। हम संकल्प लेते हैं कि हमारा बल निर्बल की रक्षा करे, हमारा साहस अन्याय के विरुद्ध खड़ा हो और हमारा पराक्रम मानवता के कल्याण में समर्पित रहे। शस्त्र धारण करने वाले हाथों में संयम और निर्णय लेने वाले मन में संवेदना हो यही इस परंपरा का संदेश है। मर्यादा से अनुशासित शक्ति ही समाज का विश्वास बनती है।
आज यही भाव भारत के राष्ट्रीय आत्मविश्वास में दिखाई देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प और भारतीय सशस्त्र बलों का अदम्य पराक्रम देशवासियों को गर्व से भरता है। भारत शांति, सहयोग और सह-अस्तित्व में विश्वास रखता है। अपनी संप्रभुता, स्वाभिमान और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लेने का उसका संकल्प भी उतना ही अटल है। हमारी शांतिप्रियता को हमारे सामर्थ्य का संबल प्राप्त है। सजग और समर्थ भारत विश्वशांति के प्रति अपने दायित्व को भी दृढ़ता से निभा सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी ढांचों के विरुद्ध सटीक कार्रवाई कर साहस, कौशल और सैन्य दक्षता का परिचय दिया। हमारे वीर जवानों ने अपने पराक्रम से राष्ट्र के सुरक्षा संकल्प को साकार किया। यह शौर्य प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव और विश्वास का विषय है। विजयादशमी पर हम अपने सैनिकों को नमन करते हुए उस कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरणा लें, जिसके लिए राष्ट्र की रक्षा सर्वोपरि है। देश का सम्मान सुरक्षित रखने वाले इन प्रहरियों के प्रति हमारी कृतज्ञता हमारे आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए।
सीमा पर तैनात सैनिक का जीवन त्याग और तपस्या की जीवंत गाथा है। जब हम अपने परिवार के साथ पर्व मनाते हैं, तब वह अपने परिवार से दूर हमारी सुरक्षा में तैनात रहता है। हमारे घरों का उत्सव उसकी चौकसी के विश्वास पर टिका है। उसके साथ उसके परिवार का धैर्य और समर्पण भी वंदनीय है। सैनिकों, वीर नारियों और सैन्य परिवारों का सम्मान हमारी राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न अंग होना चाहिए। उनके त्याग का स्मरण हमें अपने नागरिक दायित्वों के प्रति अधिक सजग बनाता है।
मध्यप्रदेश में सुशासन के हमारे प्रयासों का केंद्र भी नागरिकों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण है। माताओं-बहनों को निर्भय वातावरण मिले, युवाओं को प्रतिभा निखारने के अवसर मिलें, किसानों का परिश्रम समृद्धि में बदले और जरूरतमंद तक शासन का सहयोग पहुंचे—यही हमारा संकल्प है। शासन के सामर्थ्य की वास्तविक कसौटी अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में आने वाला सकारात्मक परिवर्तन है। जब नागरिक को समय पर न्याय, सहज सेवा और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तब रामराज्य की भावना लोकजीवन में आकार लेती है।
विजयादशमी हमें अपने भीतर झांकने का अवसर भी देती है। रावण दहन के साथ अहंकार, लोभ, भेदभाव और कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता से मुक्ति का संकल्प आवश्यक है। ईमानदारी को व्यवहार में, सद्भाव को संबंधों में और अनुशासन को दिनचर्या में स्थान देना होगा। समाज की एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। प्रत्येक नागरिक का सम्मान और राष्ट्रहित के प्रति साझा समर्पण भारत को अजेय आत्मबल प्रदान करता है।
आइए, इस विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन के साथ अपने संकल्पों को भी नई धार दें। भगवान श्रीराम की मर्यादा, मां दुर्गा की शक्ति और वीर सैनिकों का साहस हमारा पथ प्रकाशित करे। हम सत्य के पक्ष में खड़े हों, न्याय के लिए कार्य करें और अपने कर्तव्य से राष्ट्र को सशक्त बनाएं। शक्ति से सुरक्षा, सामर्थ्य से समृद्धि और सत्य से विजय—इसी संकल्प के साथ भारत का गौरवशाली भविष्य गढ़ें।
सभी प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक मंगलकामनाएं।
*(लेखक-मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।)*
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






