बड़ी खबर | आगरा में 14 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित शोषण और जबरन बाल विवाह का गंभीर आरोप, सुरक्षा की गुहार लेकर थाने पहुंची बच्ची

# 🚨 बड़ी खबर | आगरा में 14 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित शोषण और जबरन बाल विवाह का गंभीर आरोप, सुरक्षा की गुहार लेकर थाने पहुंची बच्ची

**मां की मौत के बाद पिता और सौतेली मां पर पैसे लेकर नाबालिग को दूसरे परिवार के पास सौंपने का आरोप; कथित उत्पीड़न से परेशान बच्ची ने लौटने से किया इनकार, दंपति ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और सुरक्षित संरक्षण की मांग की**
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के थाना ताजगंज क्षेत्र से नाबालिग बच्ची की सुरक्षा, कथित बाल विवाह और यौन उत्पीड़न से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में 29 अक्टूबर 2026 को थाना ताजगंज पुलिस को एक लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया है। प्रार्थना पत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग की ओर से अपने पिता, सौतेली मां और कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से बच्ची को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
मां की मृत्यु के बाद कथित तौर पर पैसों के बदले दूसरे परिवार को सौंपने का आरोप
थाना ताजगंज पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता सानिया पत्नी भूरा, निवासी तेलीपाड़ा, थाना ताजगंज, आगरा ने बताया है कि नाबालिग बच्ची की मां की मृत्यु के बाद उसके पिता भूरा और सौतेली मां रुखसार ने कथित तौर पर कुछ रुपये लेकर बच्ची को शाकिर, चंदा, सोहेल और साहिबा के पास भेज दिया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद बच्ची की इच्छा के विरुद्ध शाकिर पुत्र चंदा, निवासी तेलीपाड़ा, के साथ उसका विवाह करा दिया गया, जबकि उसकी उम्र मात्र 14 वर्ष बताई गई है।
कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के भी गंभीर आरोप
प्रार्थना पत्र में बच्ची की ओर से आरोप लगाया गया है कि शाकिर उसके साथ अश्लील एवं यौन प्रकृति का दुर्व्यवहार करता था और उसके साथ बलात्कार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। वहीं सोहेल पर जगह-जगह परेशान करने, छेड़छाड़ और बदतमीजी करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार बच्ची इन परिस्थितियों में वहां नहीं रहना चाहती और अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए सुरक्षित माहौल में जीवन बिताना चाहती है।
ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और सत्यता पुलिस जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
15 दिन तक कमरे में बंद रखने का आरोप, किसी तरह बाहर निकली बच्ची
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि लगभग 15 दिन पहले साहिबा ने कथित तौर पर बच्ची को उसके भाई के कमरे में बंद कर रखा था। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, बच्ची किसी तरह वहां से निकलकर अपने घर पहुंची। आरोप है कि इसके बाद भी उसे वापस ले जाने की कोशिश की गई और बच्ची के परिजनों की ओर से उसकी उचित देखभाल नहीं की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि लगभग 15 दिन बीत जाने के बावजूद बच्ची के परिवार की ओर से उसकी देखभाल और सुरक्षा को लेकर कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद आवेदक और उनकी पत्नी नागिना ने मानवीय आधार पर बच्ची को अपने पास आश्रय दिया और 29 अक्टूबर 2026 को उसे लेकर थाना ताजगंज पहुंचे, ताकि बच्ची को सुरक्षा और न्याय मिल सके।
बच्ची ने आरोपित लोगों के पास वापस जाने से किया इनकार
प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बच्ची उन लोगों के पास वापस नहीं जाना चाहती, जिनके खिलाफ उसने कथित उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। वह सुरक्षित वातावरण में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करना और अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहती है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से आग्रह किया है कि बच्ची की इच्छा, उम्र और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे किसी भी दबाव में कथित आरोपितों के पास वापस न भेजा जाए तथा नियमानुसार बाल कल्याण समिति और संबंधित बाल संरक्षण अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था की जाए।
पुलिस से पांच प्रमुख मांगें
29 अक्टूबर 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से मुख्य रूप से ये मांगें की हैं—
1. नाबालिग की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए उसे तत्काल सुरक्षित संरक्षण दिया जाए।
2. पिता भूरा, सौतेली मां रुखसार, शाकिर, सोहेल, साहिबा, चंदा और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
3. नाबालिग को कथित रूप से पैसों के बदले सौंपने, जबरन बाल विवाह कराने, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अन्य संबंधित आरोपों की जांच कर उचित कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जाए।
4. बच्ची को उसकी इच्छा के विरुद्ध कथित आरोपितों के पास वापस न भेजा जाए तथा बाल कल्याण समिति और संबंधित बाल संरक्षण अधिकारियों के माध्यम से सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था की जाए।
5. बच्ची की शिक्षा जारी रखने और भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
सबसे बड़ा सवाल—नाबालिग की सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नाबालिग की उम्र, कथित बाल विवाह, यौन उत्पीड़न के आरोप और उसके सुरक्षित भविष्य का गंभीर प्रश्न जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में पुलिस की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ बाल कल्याण समिति और बाल संरक्षण तंत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब देखना होगा कि थाना ताजगंज पुलिस इस प्रार्थना पत्र पर क्या कार्रवाई करती है, नाबालिग के बयान किस प्रकार दर्ज किए जाते हैं और उसकी सुरक्षा एवं शिक्षा के लिए क्या व्यवस्था की जाती है। सबसे जरूरी है कि बच्ची की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए और उसे किसी भी प्रकार के दबाव या भय से मुक्त वातावरण मिले।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज 29 अक्टूबर 2026 को दिया गया शिकायत प्रार्थना पत्र है। इसमें लगाए गए आरोपों पर पुलिस की कार्रवाई, एफआईआर दर्ज होने या किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती।
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✍️ जिला प्रभारी: हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर
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📰 विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
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