खुलेआम घूसखोरी के आरोप: भारतीय किसान यूनियन (भानु) के बस्ती मंडल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि कृषि विभाग के लोग खुलेआम घूस ले रहे हैं और जांच में गंभीर अनियमितत

अजीत मिश्रा (खोजी)
‘कृषि’ विभाग में खुलेआम भ्रष्टाचार: अन्नदाताओं की गाढ़ी कमाई पर डाका और मौन प्रशासन
- कृषि यंत्रों के नाम पर अवैध वसूली: कार्यालय में बैठाए गए इन कर्मचारियों द्वारा कृषि यंत्रीकरण योजना के नाम पर किसानों से धन उगाही की जा रही है और डीलरों के माध्यम से खुली लूट मचाई जा रही है।
- कर्मचारियों का अभद्र व्यवहार: न्याय पंचायतों में कर्मचारियों के तैनात न होने से किसानों को भारी समस्या हो रही है और कार्यालय आने पर किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है।
- यूनियन की चेतावनी: भारतीय किसान यूनियन ने मांग की है कि दोनों कर्मचारियों का अनधिकृत संबद्धीकरण समाप्त कर उन्हें मूल न्याय पंचायतों में भेजा जाए तथा दोषी अधिकारियों और डीलरों पर सख्त कार्रवाई हो; सात दिन के अंदर कार्रवाई न होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
बस्ती जिले से जो तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं, वे प्रशासनिक व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान लगाती हैं। जिस विभाग की जिम्मेदारी किसानों के उत्थान और कृषि को बढ़ावा देने की है, वही विभाग आज भ्रष्टाचार का अखाड़ा बन चुका है। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के बस्ती मंडल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कैसे अन्नदाताओं को खुलेआम लूटा जा रहा है।
कर्मचारियों की मनमानी और प्रशासनिक संरक्षण
स्थिति यह है कि विभागीय नियमों को ताक पर रखकर क्षेत्रीय कर्मचारियों को उनके कार्यक्षेत्र (न्याय पंचायतों) से हटाकर कार्यालयों में बैठा लिया गया है। उप कृषि निदेशक, सिद्धार्थनगर द्वारा दो क्षेत्रीय कर्मचारियों—राकेश शर्मा और सुनील कुमार (प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी)—को अनधिकृत रूप से कार्यालय से संबद्ध कर अवैध वसूली का जरिया बनाया गया है। जिनका मुख्य कार्य Farmer Registry, डिजिटल क्रॉप सर्वे, बीज वितरण और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसे महत्वपूर्ण कार्य करना था, वे कार्यालय में बैठकर कथित तौर पर कृषि यंत्रों के नाम पर किसानों से धन उगाही कर रहे हैं।
खुलेआम लूट और डीलरों की मिलीभगत
हैरानी की बात तो यह है कि जिले में कृषि यंत्रों के नाम पर डीलरों के साथ मिलकर खुली लूट मचाई जा रही है। न्याय पंचायतों में कर्मचारियों के न होने के कारण किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जब किसान अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचते हैं, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। यह सब इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि शासन की मंशा के विपरीत व्यक्तिगत लाभ और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंच ही नहीं पा रहा है।
प्रशासन को चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है:
- अनधिकृत संबद्धीकरण तुरंत समाप्त हो: दोनों क्षेत्रीय कर्मचारियों को तुरंत उनके मूल न्याय पंचायतों में भेजा जाए।
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई: अवैध वसूली करने वाले कर्मचारियों और डीलरों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उप कृषि निदेशक, सिद्धार्थनगर की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच हो।
- सात दिन का अल्टीमेटम: यदि एक सप्ताह के भीतर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भारतीय किसान यूनियन (भानु) बस्ती मंडल द्वारा जोरदार धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अन्नदाता जो देश का पेट भरता है, यदि उसी का शोषण इस तरह खुलेआम होता रहा, तो यह व्यवस्था के लिए बेहद शर्मनाक है। समय आ गया है कि प्रशासन नींद से जागे और इन भ्रष्ट तंत्र पर कड़ा प्रहार करे।
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