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अधिवक्ताओं और उपखंड अधिकारी के बीच गहराया विवाद

उपखंड न्यायालय शाहपुरा में उपखंड अधिकारी के तानाशाही रवैया से अधिवक्ता गण आए दिन परेशान हो रहे और न्याय मिलने में विलंब हो रहा| इस बाबत अभिभाषिक संस्था के अध्यक्ष दुर्गा लाल राजोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकचंद नौलखा ने उपखंड अधिकारी शाहपुरा से पूर्व में मिलकर कार्यशीली एवं समस्याओं के बारे में बताया बावजूद इसके उपखंड अधिकारी की कार्य शैली मैं कोई परिवर्तन नहीं आया और दिनों दिन उपखंड अधिकारी अधिवक्ताओं को बेवजह परेशान करने लग गए जिस पर न्यायालय परिसर स्थित अभिभाषक कक्ष में अधिवक्ताओं की जनरल हाउस की बैठक अध्यक्ष दुर्गा लाल राजोरा की अध्यक्षता में 14 मई को 10:00 बजे आहूत की गई। बैठक में सभी अधिकताओं ने सर्वसम्मति से उपखंड अधिकारी की कार्यशैली एवं आचरण में सुधार बाबत जिलाधीश महोदय भीलवाड़ा अजमेर रेवेन्यू मंडल में लिखित शिकायत देने का निर्णय लेते हुए एक बार उपखंड अधिकारी से सामूहिक रूप से मिलने का निर्णय लेकर उपखंड अधिकारी से अभिभाषक संस्था अध्यक्ष दुर्गा लाल राजोरा की अगवाई में मिलने गए वहां पर उपखंड अधिकारी से समस्याओं के बारे में निवेदन करने के बावजूद उपखंड अधिकारी का रवैया तानाशाह पूर्ण रहा और अधिवक्ताओं की नहीं सुनी इससे अधिवक्ता नाराज हो गए और है-है के नारे लगाते हुए बाहर निकल गए। फिर समस्त अधिवक्ताओं ने निर्णय लिया कि जब तक उपखंड अधिकारी शाहपुरा की कार्यशैली में सुधार नहीं होता तब तक उपखंड न्यायालय शाहपुरा एवं फुलिया कला में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी रहेगा। अभिभाषक संस्था की ओर से उपखंड अधिकारी की कार्यशैली एवं आचरण से परेशान होकर न्यायिक कार्य बहिष्कार करने का पत्र अभिभाषक संस्था सचिव वीरेंद्र पत्रिया व सहसचिव कमलेश मुंडेतिया ने उपखंड अधिकारी को जाकर दिया तथा उच्च अधिकारी जिला कलेक्टर एवं राजस्व मंडल अजमेर को शिकायत पत्र प्रेषित किया। अभिभाषक संस्था सहसचिव कमलेश मुंडेतिया ने बताया कि 3 महीने से अधिक समय होने के बावजूद नए प्रकरण दावे दर्ज नहीं किया जा रहे हैं तथा पत्थरगड्डी एवं खेतों के रास्तों के प्रार्थना पत्र को जानबूझकर लटकाया जा रहा है और रजिस्टर्ड एडी से तमिल करने का अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है जिससे काश्तकार और अधिवक्ताओं का आर्थिक नुकसान होता है जबकि सीपीसी के अनुसार तमिल पुलिंदा उपखंड न्यायालय के राजकीय कर्मचारियों को तमिल करवाना होता है। न्यायालय में अधिवक्ताओं को से ससम्मान संबोधित नहीं किया जाता है और अधिवक्ताओं कोई एक ही समय में एक साथ न्यायालय में जबरन उपस्थित रहने का फरमान जारी कर रखा है नहीं जाने पर पत्रावली आदमपुर में खारिज करने की धमकी दी जाती है जबकि इसी समय उपखंड न्यायालय के अलावा अप्रिशिएसन न्यायालय एवं वरिष्ठ ने सिविल न्यायालय में भी अधिवक्ता गण मौजूद रहते हैं। कई बार उपखंड अधिकारी शाहपुरा से निवेदन करने के बावजूद उपखंड अधिकारी शाहपुर अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं लाकर उल्टा अधिवक्ताओं से जानबूझकर उलझते रहते हैं। इस कारण सभी अधिवक्ता गण नाराज हो गए और कार्यों का बहिष्कार कर दिया। इस मौके पर अभिभाषक संस्था के अध्यक्ष दुर्गा लाल राजोरा उपाध्यक्ष गजेंद्र प्रताप सिंह राणावत सचिव वीरेंद्र पत्रिका सहसचिव कमलेश मुंडेतिया कोषाध्यक्ष तेज प्रकाश पाठक वरिष्ठ देवता त्रिलोकचंद नौलखा गोविंद सिंह हाडा कन्हैयालाल धाकड़ कल्याणमल धाकड़ अनिल शर्मा रामप्रसाद जाट कैलाश सुवालका पन्नालाल खारोल चावंड सिंह अक्षय राज रेबारी नमन ओझा लालाराम गुर्जर शिवराज कुमावत संजय हाडा अंकित शर्मा किशन खटीक सोहेल खान गणपत बंजारा पूरणमल खटीक अंकित मालू   अविनाश जीनगर और दिनेश चंद्र व्यास सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे         

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