उत्तर प्रदेशराम मंदिर अयोध्या

एक अस्पताल, तीन डॉक्टर, और मंत्री जी की कृपा। यही है यूपी की स्वास्थ्य नीति का असली ‘प्रिस्क्रिप्शन’

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। कुमारगंज अस्पताल में ‘रविवार शासन। जहां डॉक्टर भगवान नहीं, ‘अफसर’ हैं।।

💫 एक अस्पताल, तीन डॉक्टर, और मंत्री जी की कृपा। यही है यूपी की स्वास्थ्य नीति का असली ‘प्रिस्क्रिप्शन’।

अयोध्या।

कुमारगंज का 100 शैय्या अस्पताल इन दिनों इलाज से ज्यादा ‘इल्ज़ाम’ लिख रहा है। दीवारों पर पोस्टर भले सेवा ही धर्म है’ का नारा चिपका हो, पर असल में यहां धर्म से पहले दिन देखकर सेवा दी जाती है। सोमवार से शनिवार तक इलाज, रविवार को आराम।

जी हां, यही वह अस्पताल है जहाँ के सीएमएस डॉ. रवि पांडेय ने हाल ही में एक प्रसूता को यह कहकर लौटा दिया। 

💫 रविवार है… मैं मरीज नहीं देखता, मैं प्रशासनिक अफसर हूं।

अब जनता सोच में पड़ गई है डॉक्टर भगवान होते हैं या *शअब फाइलों में तब्दील देवता? क्योंकि यहां भगवान भी सरकारी छुट्टी पर जाते हैं।

💫 कार्रवाई हुई, मगर ‘चयनित’ अंदाज में—

* शासन ने दो डॉक्टरों डॉ. आशा आर्य और डॉ. अरविंद मौर्य पर बिजली की तरह कार्रवाई की।

एक महीनों से गायब थीं, दूसरी बाहर इलाज कर रहे थे, लेकिन अफसोस, तीसरे डॉक्टर यानी सीएमएस पांडेय साहब, जिनके सामने महिला तड़पती रही, उन पर किसी का आदेश नहीं गिरा।

क्यों? क्योंकि ऊपर से ‘कृपा’ है।

ब्रजेश पाठक जी की ‘अदृश्य दवा’ शायद सिर्फ खास लोगों को ही मिलती है।

👉 अस्पताल नहीं, ‘पॉलिटिकल ओपीडी—

यहां मरीज की हालत देखकर नहीं, सिफारिश देखकर इलाज होता है। अस्पताल में अफवाह है कि रजिस्टर के पहले कॉलम में ‘ब्लड ग्रुप’ नहीं, बल्कि ‘संपर्क सूत्र’ लिखा होता है। स्टाफ के बीच नया जोक चल रहा है —यहां मरीज नहीं, मंजूरी चाहिए।

💫 जनता के तंज— गांव के एक बुजुर्ग बोले — कुमारगंज अस्पताल अब मंदिर नहीं, मंत्रालय बन गया है। यहां इलाज नहीं, आदेश मिलता है।

दूसरे ने कहा डॉक्टर साहब की डिग्री में अब नया विषय जोड़ देना चाहिए रविवार प्रशासन विज्ञान।”शासन का रवैया देखिए, मानो पूरे विभाग ने एक साथ ‘साइलेंट मोड’ ऑन कर दिया हो।ऊपर से बयान आता है — जांच चल रही है। मगर जनता पूछ रही है — किस दिशा में? शायद वही दिशा, जहाँ फाइलें जाती हैं और फिर कभी लौटती नहीं।

💫 क्या यह अस्पताल है या ‘संरक्षण गृह’?

क्या मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति रविवार को छुट्टी पर चली जाती है?

और आखिर, मंत्री जी आपकी कृपा कब तक इस ‘रविवार वाले डॉक्टर साहब’ पर यूं ही बरसती रहेगी? कुमारगंज अस्पताल अब एक प्रतीक बन गया है जहाँ डॉक्टर छुट्टी मनाते हैं, मरीज रिफर होते हैं, और सिस्टम मुस्कुराता है।

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