
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती मंडल में ‘मौत’ का सामान बेच रही है ‘एंकर’ कंपनी: क्वालिटी कंट्रोल के नाम पर केवल वसूली?
ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- मुनाफे की आग में जलती जनता: डुप्लीकेट स्विच और वायर से घर-घर में शार्ट सर्किट का खतरा।
- करोड़ों का वारा-न्यारा: सरकार को जीएसटी की चपत और ग्राहकों को थमाया जा रहा नकली सामान।
- एसी कमरों में दुबके एंकर कंपनी के अधिकारी, बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा जानलेवा ‘डुप्लीकेट’ माल।
- सिद्धार्थनगर और गोंडा बने नकली सामान के गढ़: क्या कंपनी की मिलीभगत से चल रहा है यह खेल?
- सावधान! एंकर का नाम देख कर न ठगाएं, मोबाइल से स्कैन करें तभी खरीदें असली सामान।
बस्ती/सिद्धार्थनगर/गोंडा।। विद्युत उपकरण बनाने वाली नामचीन ‘एंकर बाई पैनासोनिक’ (Anchor by Panasonic) कंपनी इन दिनों उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल में विवादों के घेरे में है। आरोप है कि कंपनी अपने ब्रांड के नाम पर बिक रहे नकली (डुप्लीकेट) सामानों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है, जिससे न केवल सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है, बल्कि आम जनता के ‘जीवन’ के साथ भी सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
एसी रूम में सो रही क्वालिटी कंट्रोल टीम
बस्ती मंडल के ग्रामीण और शहरी इलाकों में एंकर कंपनी के नाम पर धड़ल्ले से नकली तार, स्विच और अन्य उपकरण बेचे जा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि कंपनी की ‘क्वालिटी कंट्रोल’ टीम, जो लाखों रुपये वेतन डकार रही है, बाजार में झांकने तक नहीं आती। ऐसा प्रतीत होता है कि इन अधिकारियों को एसी कमरों से बाहर तभी फुर्सत मिलती है जब कंपनी का सेल गिरता है या कोई बड़ी शिकायत आती है। क्या कंपनी को तब होश आएगा जब किसी गरीब के घर में शार्ट सर्किट से आग लगेगी या किसी मासूम को करंट लगेगा?
नकली सामान का मकड़जाल और करोड़ों का वारा-न्यारा
एक अनुमान के मुताबिक, अकेले बस्ती जिले में एंकर का लगभग 48-50 करोड़ का कारोबार है। इसमें से करीब 10 करोड़ का सामान डुप्लीकेट बिक रहा है।
- राजस्व की चोरी: नकली सामान की बिक्री से सरकार को जीएसटी के रूप में हर साल लगभग 2 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
- डुप्लीकेसी का केंद्र: सिद्धार्थनगर का डुमरियागंज व बांसी और गोंडा का नवाबगंज क्षेत्र नकली एंकर सामानों की मंडी बन चुका है।
- मुनाफे का खेल: एंकर का असली स्विच जहाँ 37-40 रुपये का है, वहीं नकली मात्र 15-19 रुपये में उपलब्ध है। दुकानदार अधिक मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
बर्बादी की कगार पर डिस्ट्रीब्यूटर
कंपनी की इस लापरवाही का खामियाजा उन ईमानदार डिस्ट्रीब्यूटर्स को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने करोड़ों रुपये निवेश किए हैं। नकली सामानों के कारण असली माल की बिक्री नहीं हो रही, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर बैंक के कर्ज और ब्याज के बोझ तले दबता जा रहा है। सवाल यह है कि जब एंकर कंपनी के नाम की डुप्लीकेसी सबसे ज्यादा हो रही है, तो कंपनी सख्त कानूनी कार्रवाई और छापेमारी से पीछे क्यों हट रही है?
सावधानी ही बचाव: क्यूआर कोड (QR Code) जरूर स्कैन करें
कंपनी के टेरिटरी मैनेजर (सेल्स) अंकित मिश्र ने ग्राहकों को सलाह दी है कि एंकर का कोई भी उत्पाद खरीदते समय बॉक्स पर लगे कंपनी के स्कैनर/क्यूआर कोड को मोबाइल से जरूर स्कैन करें। यदि सामान नकली होगा, तो वह स्कैन नहीं होगा।
मुख्य बिंदु:
- नकली सामान के कारण बच्चों को करंट लगने और घरों में आग लगने की घटनाएं।
- असली (37-40 रुपये) और नकली (15-19 रुपये) सामान के दाम में बड़ा अंतर, जिससे दुकानदार ग्राहकों को ठग रहे हैं।
- सरकार को लगभग 2 करोड़ रुपये के जीएसटी का सीधा नुकसान।
ब्यूरो की चेतावनी: जब तक क्वालिटी कंट्रोल टीम और पुलिस प्रशासन मिलकर इन ‘मौत के सौदागरों’ पर एफआईआर दर्ज कर जेल नहीं भेजते, तब तक बस्ती मंडल की जनता के घरों पर शार्ट सर्किट का खतरा मंडराता रहेगा। कंपनी की चुप्पी उसकी मिलीभगत या निकम्मेपन की ओर इशारा करती है।




















